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Author Topic: अपने मन का साई  (Read 19550 times)
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साई राम اوم ساي رام ਓਮ ਸਾਈ ਰਾਮ OM SAI RAM


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« on: January 05, 2008, 12:19:01 PM »

मिलकर करे एक अच्छा और नेक काम

जय साई राम

बाबा साई ने तो बहुत रास्ते दिखाए है हम सब को, पर हम सिर्फ़ मन्दिर मै जाकर अपना फ़र्ज़ पूरा कर लेते है, आरती कर ली, नाम जाप किया, १० रूपये डाले आरती की थाली में और बस हो गया अपना काम | बोलो जय साई राम | हो गया अपना कर्तव्य पूरा |  मन्दिर से बाहर आकर किसी भिखारी को २-४ रूपये दे दिए | क्या किसी भिखारी को २-४ रूपये देने से हो गयी हमारे अंदर के साई की आत्मा तृप्त ?  क्या हमारे अंदर का साई पूरी तरह से खुश है हम से ?  क्या वो आवाज़ नही देता है आपको ? क्या आपने कभी सुनी है साई की आवाज़ | मुझे पता है की एक साई हमारे अंदर भी तड़प रहा है और वो कुछ कहना चाहता है पर हम जानकर भी अनजान बन जाते है | हम अपना सर दर्द से लेकर अपने बच्चो, केरियर, शादी, प्यार, मोहब्बत तक सब कुछ उसको बोल देते है और एक वो है जो कुछ भी नही कह पता और अगर कभी कहता भी तो शायद हम सुन भी नही पाते है | बाबा ने तो पूरी दुनिया को सवारने का काम किया था और हमसे भी कहा की जाओ जो मैंने तुम्हारे साथ किया वो तुम दुनिया के साथ करो, यही मेरा संदेश है और यह ही मेरी सच्ची भक्ति है |

हम सभी बहुत अच्छे है पता है क्यों? क्यों की साई हमारे अंदर जो है | हम अगर रोज़ एक अच्छा काम नही कर सकते तो कम से कम एक हफ्ते मैं तो कर ही सकते है? कोई भी छोटा सा अच्छा काम जो मेरे तुम्हारे अंदर के साई को बहुत खुश करदे | मुझे पता है की जब भी साई खुश होता है ना वो आपकी-मेरी आँखे भिगो देता है क्यों की वो आँसू साई की आंखो के होते है और वो भी खुशी के सच्चे आँसू |

आओ हम सब मिलकर कुछ अच्छा काम करे, आओ मिलकर अपने अपने अंदर के साई को एक बार और खुश होने का मौका दे |

यह तो साई का मन्दिर और मस्जिद है, जो कुछ भी आप यहाँ लिखते और पड़ते हो वो साई भी देखता और पड़ता है तो अब आप मुझे २ बातें बताओगे:

१. ऐसा क्या किया जाए की साई बहुत खुश हो?
२. आज आपने ऐसा कौन सा अच्छा काम किया की आज वो हमारे मन वाला साई बहुत खुश हो गया?

सभी भक्तो से निवेदन है की वो अपने विचार जरूर लिखे |

जय साई राम
« Last Edit: January 05, 2008, 12:22:27 PM by Ravi » Logged

MANAV_NEHA
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अलहा मालिक


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« Reply #1 on: January 05, 2008, 12:38:35 PM »

RAVI BHAI AAPNE BAHUT KHUB LIKHA HAI,DIL KHUSH HO GAYA THANKS
MAIN AGAYANI KYA KAHU FIR BHI
YEH TOH TABHI HO SAKTA HAI JAB HUM SABME BABA KO DEKHE,
BIN KISI LALSA KE JAN KALYAN KE KARYE KARE,YEH NAHI KI KISI BHIKARI KO KHANA DIYA YA USE EK DO RUPEES DIYE JISE HAMARA KARTAVYA PURA HUYA,USKI RAKSHA KARNA BHI HAMARA KARTAVIYE HAI
KISI NISAHAY PUR HO RAHE JURM KO ROKANA BHI HAMARA KARTAVIYA HAI
SABHI KO SAMAN SAMJHKAR HI YEH SAMBHAV HO SAKTA,SABME MALIK KA RUP DEKH KAR HI YEH HO SAKTA HAI
SIRF INSAAN HI NAHI BALKI JAANWAR AUR BHI JIV JANTU KE LIYE BHI SAMAN BHAV HO
YEH SUB MALIK KE INSAN KI TARAH KHILAYE HUYE KHUBSURAT FOOL HAI JISE TODNE KA ADHIKAR KISI KO NAHI
BABA PRAY KE BHUKE NAHI HAI PRAY TOH HAR KOI KARTA HAI, BABA KE BATAYE RAASTE
PUR CHALNA HI SABSE BADI PRAY HAI TABHI INSAN BABA KO PAA SAKTA HAI
JAHA TAK PAISE KI BAAT HAI YEH TOH MOH MAYA HAI ,KISI PUR KAM HAI KISI PUR JYADA HAI ,AGAR MALIK NE DIYA HAI TOH USAE JAN KALYAN MEIN LAGAYE JISE MALIK KA DIL KHUSH HOTA HAI
MUJHE MAAF KAR DENA BABA AGAR MAINE KUCH GALAT KAHA HO....SAI RAM Smiley
« Last Edit: January 05, 2008, 12:51:23 PM by MANAV_NEHA » Logged

गुरूर्ब्रह्मा,गुरूर्विष्णुः,गुरूर्देवो महेश्वरः
गुरूर्साक्षात् परब्रह्म् तस्मै श्री गुरवे नमः॥
अखण्डमण्डलाकांरं व्याप्तं येन चराचरम्
तत्विदं दर्शितं येन,तस्मै श्री गुरवे नमः॥


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« Reply #2 on: January 05, 2008, 10:31:13 PM »

om shri sai nathay namah

bahut acha likha hai apne raviji maine yeh kaise keh sakte ho per main apne taarf se aise koi kaam galat nahin karna chahte ki mere wajhe se kise ka dil dukhe ya koi khast ho maine bas yahein chahte ho apne karm karte raho aur fhal ki ikcha mat rakho jo hai use main khush raho karm ache hoge bin mage sab mil jayega aur mera sai bhi bahut khush hoga
baba koi baat achi nahin likhe ho tomujhe maaf kar dena

om shri sai nathay namah
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Ramesh Ramnani
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« Reply #3 on: January 06, 2008, 12:32:54 AM »

जय सांई राम।।।

रवि भाई वाह़। मै कई दिनों से देख रहा हूँ कि अपने इस मन्दिर में मेरे भाई बहन बहुत अच्छा लिखने लगे है। अच्छे लेखो की कड़ी में आज फिर कुछ अच्छा लिखा पढ़ने को मिला। दोस्त बहुत ही सटीक बात लिखी है तुमने। मैं अपने अनुभव से बस यही कह सकता हूँ कि मेरे बाबा सांई जैसे सरल दयालु सन्त को खुश करना बहुत ही सरल है। इसके लिये हमसे वो कोई जप तप यां बहुत बड़ी तपस्या नही मांगते। बाबा ने हमे सिर्फ और सिर्फ ईमानदारी से अपने कर्मों को पूरा करने की शिक्षा दी है।

मै मानता हूँ कि भक्ति पथ पर अपनी इच्छा के अनुसार प्रत्युत्तर प्राप्त न होने पर मेरे भाई बहनों का मन ज्यादातर निराश यां फिर विश्वासरहित हो जाता है। ऐसा न हो इसके लिये 'सबूरी'  अत्यंत ज़रूरी है। सांई भक्तों को प्राप्ति एवम् अप्राप्ति से लेश मात्र भी विचलित हुए बिना स्वयम् के आध्यात्मिक कर्तव्य को अविरत चालू रखने के लिये सबूरी की आवश्यकता है। श्री सांई बाबा ने स्वयम् कहा है कि, मनु्ष्य जो कर्म करता है उसका फल एक दिन तो अवश्य मिलता ही है। 'सबूरी' भक्ति पथ पर एक कठिन परीक्षा है और वह परीक्षा बाबा अपने प्रियतम भक्तों से समय समय पर लेते रहते है। उससे हमे धबराना नही चाहिये और ना ही विचलित होना चाहिये!

साधारण मनुष्य बाज़ार में एक मिट्टी का घड़ा खरीदने जाता है जिसकी कीमत मात्र २० रुपये होती है। फिर भी उसे वो दस बार अपनी उंगलियो से बजा बजा कर देखता है। उसके बाद ही उसकी कीमत चुका कर खरीदता है। वैसे ही अपने बाबा भी अपनी भक्ति देने से पहले अपने भक्त को ठोक बजाकर देखते है। इसलिये भक्ति पथ पर सिर्फ बाह्य भक्ति, प्रदर्शन भक्ति नही होनी चाहिये, यानी श्रध्दा विहिन भक्ती नही होनी चाहिये। मेरे बाबा हमसे सिर्फ आन्तरिक, आत्मनिवेदन वाली भक्ति चाहते है।

हम तो बस बाबा को पूजा के दो फूलों की रिश्वत देकर सोचते है कि वो हमे मिल जायें। अंत में मैं तो बस यह कंहूगा कि कोई भी भावहीन क्रिया बाबा की सत्ता तक नहीं ले जा सकती है। जहाँ क्रिया का अभाव है,  वंही बाबा की सत्ता प्रकट होती है।

रवि भाई निष्काम भक्ति के विषय में सन्त कबीर भी कुछ ऐसा ही कहते है
 
प्रेम पियाला सो पियो, शीश दच्छिना देय
लोभी शीश न दे सकै, नाम प्रेम का लेय

वो कहते हैं कि प्रेम का प्याला वही प्रेमी पी सकता है जो अपना सिर दक्षिणा दे सकता है और जो भगवान का नाम केवल दिखाने के लिए लेता है वह लोभी कभी भी प्रेम नहीं कर सकता। यहाँ कबीरदास जी का अपना सिर दक्षिणा में दिने से आशय निष्काम भक्ति से है। हमारे दिमाग में भक्ति के समय भी अनेक बाते भरी होतीं है और अगर उन चिंताओं का बोझ सिर से उतार कर भक्ति में लीन हुआ जाये तभी सच्ची भक्ति प्राप्त हो सकती है।

कथन थोथी जगत में, करनी उत्तम सार
कह कबीर करनी भली, उतरै भौजल पार

उनका आगे यह भी कहना है कि अपने मुहँ से बातें करना बहुत आसन होता है परन्तु करना मुश्किल है। वास्तविकता यह है कि जब कोई अच्छा काम करेंगे, तभी इस जीवन रुपी भवसागर से पार हो सकेंगे।

अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

ॐ सांई राम।।।
« Last Edit: January 06, 2008, 12:53:01 AM by Ramesh Ramnani » Logged

अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी
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« Reply #4 on: January 09, 2008, 09:08:27 PM »

जय सांई राम।।।

आज का संकल्प

आईये आज हम यह संकल्प लें कि आज से हम अपने माता-पिता का किसी भी बात पर दिल नही दुखाऐंगे। और ऐसा हम सिर्फ आज ही नही बल्कि हर रोज़ करेंगे। फिर देखो कैसे आपका भी जीवन बाबामयी हो जायेगा, कैसे बाबा आपकी सुनते है और कैसे आपकी हर मुराद, हर कार्य को पूर्ण करते है।

अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

ॐ सांई राम।।।
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अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी
Ramesh Ramnani
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« Reply #5 on: January 09, 2008, 09:32:13 PM »

जय सांई राम।।।

बाबा भगवान होते हुऐ भी भगवान जैसे दूरस्थ, उच्च कोटि के परस्थ नही लगते,  वे सांई भक्तों के लिए माँ जैसे है, जब चाहे उनके पास जाओ,  दुःख-दर्द सुनाओ,  मन की तसल्ली पावो! जो चाहे मांगो,  झोली भर ले जाओ! शिर्डी एक ऐसा स्थान है,  जहां से कोई भी रिक्त हस्त - खाली हाथ लौटता नही है।

अगर कोई असन्तुष्ट लौटता है तो वह,  जिसे ५ दिन रहना था ३ दिन ही रहने को मिला पांछ बार दर्शन करने थे दो बार हुए! बस! सब की बिगड़ी  हुई यंहा बनती है! वे सब कुछ जानते है; कुछ कहने की ज़रूरत नही! बस केवल जाओ और उनके सामने खड़े हो जाओ! अपका काम बन जायेगा! इसीलिये तो रवि भाई ने अपने टापिक का नाम भी "आपके मन का सांई"  रखा है।

अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

ॐ सांई राम।।।
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अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी
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« Reply #6 on: January 09, 2008, 10:04:28 PM »

ॐ सांई राम~~~

बाबा~~~मेरे दिल के सांई~~~मेरे बाबा~~~

बस,यही चाहूं गी कि कभी गल्ती से भी किसी के दिल को दुःख न पहुचाऊं।बाबा इतनी समझ देना।

मेरे मन दिल न किसी का दुखा
भले ही तूं ऱब को न मना,
न मंदिर जा,न दीपक जला
पर किसी को यूं ही न सता,
आंसू कही जो तेरे कारण बहे
न सोच कि तूं बच जाए गा,
ये आंसू नहीं दरिया है पाप का
जिसमें तूं गोते खाएगा,
छटपटाए गा,चिल्लाएगा
पर कोई न बचाएगा,
तेरी करनी क्या रंग लाए,
ये तो ऱब ही तुझे बताएगा~~~~

बस ,मेरे मन का सांई तो यही बोलता है कि कभी भी किसी इंसान का दिल ना दुखाऊं, ये गलती कभी ना हो मुझसे।चाहे कुछ और करूं ना करूं पर ये पाप ना हो मुझसे।

जय सांई राम~~~
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"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

" Loka Samasta Sukino Bhavantu
Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~
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« Reply #7 on: January 09, 2008, 11:12:24 PM »

Mere Mann ka Sai Yehi kehta hai ki jo bhi karo, jiske liye bhi karo, sada uski bhalai ke liye karo. Kabhi kissi ka bura mat socho aur kabhi kisa ka bura mat karo. Baba kabhi bhi mujhse yeh galti na ho aur kabhi bhi me apne dar se kissi ko dutkaro nahi.
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Mere Sai ki Deepali

श्री साईनाथ । आपके ऋण हम किस प्रकार चुका सकेंगें । आपके श्री चरणों में हमारा बार-बार प्रणाम है । हम दीनों पर आप सदैव कृपा करते रहियेगा, क्योंकि हमारे मन में सोते-जागते हर समय न जाने क्या-क्या संकल्प-विकल्प उठा करते है । आपके भजन में ही हमारा मन मग्न हो जाये, ऐसा आर्शीवाद दीजिये ।

Baba mujh Dasi ko apne Charankamalon ki Sheetal Chaaya me Sthan de do.
Ramesh Ramnani
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« Reply #8 on: January 11, 2008, 08:02:46 AM »

जय सांई राम।।।

मंदिर होये मूरत, हृदय बसे भगवन

ये छोटी सी कहानी हमारी माँ काफ़ी बार हम सारे भाई बहनो को दोहराती रहती थी। एक कस्बे में सुखी नामक बहू, अपने पति और साँस के संग रहा करती थी।  उनकी ईश्वर पर अटल श्रद्धा थी! लेकिन सांसजी को प्रभु पर कोई भरोसा ना था | किसी हादसे वश वो अपना विश्वास प्रभु पर से खो  चुकी थी!  हालाकी पती जी ईश्वर को मानते थे!

जब भी सुखी बहू ईश्वर का नाम स्मरण करने लगती, सांसजी टोक दिया करती, गुस्सा हो जाती!  सुखी बहू की जीवन में बस एक ही इच्छा थी, के पास के गांव जाकर, वंहा के हरी नारायण मंदिर के दर्शन करे, जो की काफ़ी जागृत देव स्थान माना जाता था!  मगर अपनी नास्तिक साँस से कभी अनुमति नही माँग पाई!

एक बार पती जी लंबे अरसे से बाहर देश गये! सुखी बहू दिन भर काम करती, प्रभु को याद करती, मिलके आने दो की रट सुनाती! सासू मां ने गुस्से में सुखी बहू को पेड़ के साथ बँधवा दिया, कस कर रस्सिया बँधी!  सुखी को ना वो खाना देती ना पानी!  ’अपने ईश्वर को बुलाओ मदद के लिए’  सुखी भी नारायण का जाप करे जा रही थी!

आख़िर प्रभु को दया आ ही गयी सुखी पर! उन्होने पति का रूप धरा और पहुँचे, जंहा सुखी को बाँध रखा था!  हालचाल पूछा, क्यों बँधा पूछा? सुखी ने प्रभु मिलन की इच्छा प्रगट की! पति रूप में जो प्रभु थे बोले “ठीक है, तुम सांसु मा को बिना बताए ही चली जाओ, तुम्हारी जगह यंहा हम रहेंगे, सब संभाल लेंगे! तुम जाओ और उस पत्थर की मूरत के दर्शन कर आओ”

जैसे ही सुखी चली गयी, प्रभु ने सुखी का रूप धारण किया, खुद बँध गये,पेड़ से!  सासू मां समझती,सुखी ही है, रोज ताने कसती उस पर! प्रभु बस मिथ्या हंस पड़ते!

इधर सुखी बहू मूरत के दर्शन कर खुश हुई!  पर पत्थर की मूरत में, उसे भगवान का तेज ना दिखाई दिया!  कुछ गांववाले जो तीर्थ से आए, उन्होने सुखी बहू मंदिर में होने की खबर सांसुजी तक पहुँचा दी!

सांसुजी विश्वास ना करे, कहे सुखी तो पेड़ से ही बँधी है |लोग भी जाते, देख कर हैरान हो जाते!

सुखी बहू घर लौटी, तो दो दो सुखी को देख कर सारे लोग भ्रम में पड़ गये!  दोनो कहती मैं असली बहू हूँ! आख़िर हार कर असली सुखी बोली ’प्रभु अब खेल खत्म करो, मैं मंदिर दर्शन तो कर आई, पर आप मुझे वंहा नही मिले, बस आपकी मूरत थी” और रो पड़ी !

प्रभु प्रकट हुए बोले सुखी बहू, इसलिए तो हमने कहा था, जाओ और उस पत्थर के मूरत के दर्शन करो, अरे जब हम यंहा है, आपके मन में है, वंहा कैसे मिलेंगे इतना कह चले गये !

प्रभु दर्शन पाकर सारे लोग धन्य हो चुके थे! सासु मां को भी अपनी ग़लती का एहसास हुआ!  सुखी बहू को भी समझ आ गया के प्रभु, हर हृदय में बसते है! चाहे वो इंसान का हो या किसी और प्राणी मात्र का! दिल से उन्हे याद करो, प्रभु ज़रूर भक्तो की पुकार सुनते है!

हमारी मां अक्सर कहती, कि प्रभु से मिलना हो तो मदिर जाओ ना जाओ, मगर किसी की मदद जरूर करो!

किसीसे दो मीठे लफ्ज़ कहो!  किसी और के लिए भी कभी दुआ करो, किसी की खोई मुस्कान लौटाओ, किसीकी तकलीफ़ को समझो, प्रभु तुम्हे वंही मिल जाएँगे!

अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

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अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी
Ramesh Ramnani
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« Reply #9 on: January 20, 2008, 04:16:55 AM »

जय सांई राम।।।

मेरे मन के सांई ने आज मुझसे कहा कि निरंतर सोच-विचार करने वाला मनुष्य अपने आपको क्षति पहुंचाता है। अगर वह हमेशा अपने शरीर में रोग के लक्षणों पर ही उधेड़ बुन करते रहेगा तो निश्चित रूप से एक दिन रोग ग्रस्त हो जायेंगे।  वो वहमी कहलाया जाने लगेंगा

जानते हो मेरे साथ भी यही कुछ हुआ था?   

अगर आप रोग ग्रस्त होते हुए भी अपने को रोगी नहीं मानते तो आप जल्दी ही रोग मुक्त हो जायेगें। आपका आत्मविश्वास और बाबा में श्रध्दा और सबूरी आपको हमेशा के लिये निरोगी बना देगा.

आपने प्राय: यह भी देखा होगा कि लोग अपने रोग के लक्षणों और अपनी दुर्बलताओं को बढा-चढाकर बताते हैं. शायद वे समझते हैं कि इससे उन्हें लाभ मिलेगा. मगर नहीं, इससे उनके रोग एवं क्षीणता में वृद्धि होती है. वे और ज्यादा दुर्बल हो जाते हैं. निरंतर सोच-विचार व्यक्ति को विक्षिप्त कर देता है.

आईये इस सप्ताह यही संकल्प लें कि हमारे जीवन में जो कुछ भी कमियां है उन्हें बाबा को समर्पित करे और उन्हे दूर करने की कोशिश करें।  याद रखिये आपके जीवन के लिये यह उपाय आगे चलकर बहुत कारगर सिद्द होगा।

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अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी
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« Reply #10 on: January 21, 2008, 02:38:39 AM »

mere man ka sai to kehta hai aur chahta bhi hai ki mein nirmel ho jau apne vicharo mein

kanjoos ho jau galat kerne mein, hout bolne mein, gussa kerne mein
dildar ho jau pyar kerne mein, dene mein, hassi lane mein

aise bahut si cheeze chahte hai mere man ke sai

aage aage ayengi sabhi baatein
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Babaji ke pass jana hai muje
tana
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« Reply #11 on: January 21, 2008, 02:45:16 AM »

ॐ साईं राम~~~

मेरे मन का साईं अपने बाबा से बस हर पल दुआ यही चाहे~~~

हे साईं इक करिश्मा दिखा दे
सब के दिलों में प्यार बसा दे,
नफरत का नामों निशा मिटा दे!
कोई किसी का दिल न दुखाएं
कोई किसी को न सताएं
हर कोई किसी के काम आए
न कोई रोए न तिलमिलाए
सिर्फ प्यार ही प्यार दिखाए
आँखों में न आँसू आए
केवल चहरे खिलखिलाएं
हे साईं ऐसा करिश्मा दिखा दे
सदा के लिए न सही,बस इक दिन के लिए ही दिखा दे!!!

जय साईं राम~~~
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अलहा मालिक


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« Reply #12 on: January 21, 2008, 03:12:22 AM »

आज मेरे मन का साई कहता है कुछ ऐसा करो जिसे दूसरो को खुशी हो इसे तुम्हारा मन भी खुश होगा
सबके गम को अपना समझो तुम्हारा गम भी कम होगा
जैसे खुशी बाटने से बढती है वैसे ही गम बाटने से कम होता है
जितनी खुशी हमे मन्दिर में जाकर प्रे करने से मिलती है उसे कही जयादा किसी निसहाये का सहारा बनने से मिलेगी अगर हम किसी का सहारा बनेगे तोह वो मालिक हमारा सहारा बानेगा
दूसरो का भला करोगे तुम्हारा भी होगा
अगर हम भगवान की पूजा न भी करे और अगर जन कल्याण के लिए एक भी पूरे दिन में काम करे वो भी भगवान की पूजा के समान है
मालिक दोनों ही कर्मो से परसन होता है
साई राम   
 
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गुरूर्ब्रह्मा,गुरूर्विष्णुः,गुरूर्देवो महेश्वरः
गुरूर्साक्षात् परब्रह्म् तस्मै श्री गुरवे नमः॥
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Ramesh Ramnani
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« Reply #13 on: January 23, 2008, 03:32:40 AM »

जय सांई राम।।।

Today Sai of  My Heart Said....

"Promise Yourself"

To be strong that nothing can disturb your peace.....
To talk health, happiness, prosperity to every person......
To make all your friends feel that there is something of value in them....
To think only the best, to work only for the best, and to expect the best.....
To be just as enthusiastic about the success of others as you are at your own....
To forget mistakes of the past and press on to the greater achievement of future.....
To wear a cheerful face at all times and give a pleasant smile to all you meet.....

"To give so much time your improvement that you've no time to critisize others."


दोस्तो सुनो अपने मन के सांई की सदा....

अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

ॐ सांई राम।।।
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अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी
Ramesh Ramnani
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« Reply #14 on: January 27, 2008, 05:33:18 AM »

जय सांई राम।।।

मेरे मन के सांई की आज की आवाज़.....
 
तुम भी अपनी कोई पहचान रखना

मुस्कराहट....दोस्त की पहचान होती है
खुशबू.....फूल की पहचान होती है.
लहज़ा....ज़ज़बात की पहचान होता है
अलफाज़....इज़हार की पहचान होते है
सुर....नगमें की पहचान होते है
रक्स....खुशी की पहचान होते है.
आह....दर्द की पहचान होती है
दुआ....जज़बों की पहचान होती है
ज़र्फ....इन्सान की पहचान होता है
बूंद...बारिश की पहचान होती है
कतरा....दरिया की पहचान होता है
धड़कन....प्यार की पहचान होती है
हरारत.....ज़िन्दगी की पहचान होती है
गर्ज़ की हर शैय किसी ना किसी शैय से पहचानी जाती है
लेकिन ये....आंसू?Huh
  Aansoo .. khushi key .. ghum key ... hotey hain aik jaisey ....
Inn Aansoouon ki koie .. pehchaan nahin hoti ...??
आंसू खुशी के....गम के....होते है एक जैसे....
इन आंसूओं की कोई पहचान नहीं होती
अगर आंसू की कोई पहचान नहीं होती
तो हमारी तुम्हारी सब की क्या पहचान है???
क्या हम भी इन्सानों के समन्दर में
एक कतरे की सी हैसियत नहीं रखते है?

खुद को पहचानो...और....अपनी पहचान बना कर जाओ
     
अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

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अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी
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