September 03, 2010, 09:01:56 AM



Download Samarpan July 2010 Now

E-mail:
Pages: [1]   Go Down
  Print  
Author Topic: रामायण – उत्तरकाण्ड - राजा निमि की कथा  (Read 1722 times)
0 Members and 1 Guest are viewing this topic.
Jyoti Ravi Verma
Global Moderator
Member
*
Offline Offline

Posts: 4611


सांई की मीरा


WWW
« on: March 10, 2007, 02:47:43 AM »

श्रीरामचन्द्रजी बोले, "हे लक्ष्मण! अब मैं तुम्हें शाप से सम्बंधित एक अन्य कथा सुनाता हूँ। अपने ही पूर्वजों में निमि नामक एक प्रतापी राजा थे। वे महात्मा इक्ष्वाकु के बारहवें पुत्र थे। उन्होंने वैजयन्त नामक एक नगर बसाया था। इस नगर को बसाकर उन्होंने एक भारी यज्ञ का अनुष्ठान किया। पहले महर्षि वधिष्ठ को और फिर अत्रि, अंगिर, तथा भृगु को आमन्त्रित किया। परन्तु वशिष्ठ का एक यज्ञ के लिये देवराज इन्द्र ने पहले ही वरण कर लिया था, इसलिये वे निमि से प्रतीक्षा करने के लिये कहकर इन्द्र का यज्ञ कराने चले गये।

"वशिष्ठ के जाने पर महर्षि गौतम ने यज्ञ को पूरा कराया। वशिष्ठ ने लौटकर जब देखा कि गौतम यज्ञ को पूरा कर रहे हैं तो उन्होंने क्रद्ध होकर निमि से मिलने की इच्छा प्रकट की। जब दो घड़ी प्रतीक्षा करने पर भी निमि से भेंट न हो सकी तो उन्होंने शाप दिया कि राजा निमे! तुमने मेरी अवहेलना करके दूसरे पुरोहित को वरण किया है, इसलिये तुम्हारा शरीर अचेतन होकर गिर जायेगा।। जब राजा निमि को इस शाप की बात मालूम हुई तो उन्होंने भी वशिष्ठ जी को शाप दिया कि आपने मुझे अकारण ही शअप दिया है अतएव आपका शरीर भी अचेतन होकर गिर जायेगा। इस प्रकार शापों के कारण दोनों ही विदेह हो गये।"

यह सुनकर लक्ष्मण बोले, "रघुकुलभूषण! फिर इन दोनों को नया शरीर कैसे मिला?"

लक्ष्मण का प्रश्‍न सुनकर राघव बोले, "पहले तो वे दोनों वायुरूप हो गये। वशिष्ठ ने ब्रह्माजी से देह दिलाने की प्रार्थना की तो उन्होंने कहा कि तुम मित्र और वरुण के छोड़े हुये वीर्य में प्रविष्ट हो जाओ। इससे तुम अयोनिज रूप से उत्पन्न होकर मेरे पुत्र बन जाओगे। इस प्रकार वशिष्ठ फिर से शरीर धारण करके प्रजापति बने। अब राजा निमि का वृतान्त सुनो। राजा निमि का शरीर नष्ट हो जाने पर ऋषियों ने स्वयं ही यज्ञ को पूरा किया और राजा को तेल के कड़ाह आदि में सुरक्षित रखा। यज्ञ कार्यों से निवृत होकर महर्षि भृगु ने राजा नुमि की आत्मा से पूछा कि तुम्हारे जीव चैतन्य को कहाँ स्थापित किया जाय? इस पर निमि ने कहा कि मैं समस्त प्राणियों के नेत्रों में निवास करना चाहता हूँ। राजा की यह अभिलाषा पूर्ण हुई। तब से निमि का निवास वायुरूप होकर समस्त प्राणियों के नेत्रों में हो गया। उन्हीं राजा के प्रम पुत्र मिथिलापति जनक हुये और विदेह कहलाये।

Logged

सबका मालिक एक - Sabka Malik Ek

Sai Baba | प्यारे से सांई बाबा कि सुन्दर सी वेबसाईट : http://www.shirdi-sai-baba.com
Spiritual India | आध्य़ात्मिक भारत : http://www.spiritualindia.org
Send Sai Baba eCard and Photos: http://gallery.spiritualindia.org
Listen Sai Baba Bhajan: http://gallery.spiritualindia.org/audio/
Spirituality: http://www.spiritualindia.org/wiki
Pages: [1]   Go Up
  Print  
 
Jump to:  


SATHYA SAI BABA FORUM SPIRITUAL PHOTO GALLERY SAI BABA
SAMARPAN - A SAI BABA MAGAZINE SPIRITUAL INDIA SAI BABA QUESTIONS & ANSWER
SAI BABA DESKMATE DOWNLOAD SHIRDI 360 VIEW SAI SATCHARITRA HINDI AUDIO




Listen Sai Baba Radio: