tana
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« Reply #15 on: December 31, 2007, 02:57:38 AM » |
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ॐ सांई राम~~~
क्रोध करने का अर्थ है- दूसरों की गलतियों का अपने से बदला लेना~~~
जय सांई राम~~~
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"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"
" Loka Samasta Sukino Bhavantu Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~
May all the worlds be happy. May all the beings be happy. May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~
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tana
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« Reply #16 on: January 02, 2008, 04:31:28 AM » |
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ॐ सांई राम~~~
जैसे बादल पृथ्वी से जल लेकर फिर पृथ्वी पर बरसता है, वैस ही सज्जन भी जिस वस्तु का ग्रहण करते है उसका दान भी करते है |
जय सांई राम~~~
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rajiv uppal
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« Reply #17 on: January 02, 2008, 09:44:09 AM » |
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~~~ॐ सांई राम~~~ हर मनुष्य अच्छी सोच के साथ जीवन के लम्हों को जीना चाहता है केवल उसकी नकारात्मक और धनात्मक सोच ही उसके कल को बनाती है। एक दोहा याद आता है “काल करे सो आज कर, आज करे सो अब, पल मे प्रलय होयेगी बहुरी करेगा कब” आज को सुन्दर बनाये कल की चिंता कल के लिये छोड़ दे।~~~ॐ सांई राम~~~
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tana
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« Reply #18 on: January 06, 2008, 01:24:22 AM » |
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ॐ सांई राम~~~
जब हम कोई काम करने की इच्छा करते हैं, तो शक्ति अपने आप ही आ जाती है~~~
जय सांई राम~~~
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rajiv uppal
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« Reply #19 on: January 09, 2008, 04:19:28 AM » |
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~~~ॐ सांई राम~~~ 'अपने पापों को स्वीकार करने में शर्म मत करो।' क्योंकि पाप हमें ईश्वर से अलग कर देता है... यह मेल-मिलाप का संस्कार है। (प्रायश्चित-पाप स्वीकार) जो हमें वापस लाता है और ईश्वर से पुनः मिलाता है।~~~ॐ सांई राम~~~
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« Last Edit: January 09, 2008, 05:02:20 AM by rajiv uppal »
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rajiv uppal
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« Reply #20 on: January 09, 2008, 04:59:24 AM » |
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~~~ॐ सांई राम~~~ ईश प्राप्ति (शांति) के लिए अंतःकरण शुद्ध होना चाहिए | – रविदास
ईश्वर के हाथ देने के लिए खुले हैं. लेने के लिए तुम्हें प्रयत्न करना होगा | – गुरु नानक देव
रहिमन बहु भेषज करत , ब्याधि न छाडत साथ । खग मृग बसत अरोग बन , हरि अनाथ के नाथ ॥ अजगर करैं न चाकरी, पंछी करैं न काम। दास मलूका कहि गये सब के दाता राम।। —– सन्त मलूकदास ~~~ॐ सांई राम~~~
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« Last Edit: January 09, 2008, 05:03:54 AM by rajiv uppal »
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tana
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« Reply #21 on: January 13, 2008, 11:07:53 PM » |
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ॐ सांई राम~~~
मन एक मन्दिर है ; इसमे सद्विचारों की धूप जलाइए। ईर्ष्या –द्वेष का कूड़ा इसमें नहीं भरा जाता|
जय सांई राम~~~
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rajiv uppal
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« Reply #22 on: January 15, 2008, 09:32:24 AM » |
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जीवन और मृत्यु जीवन और मृत्यु आत्मा और परमात्मा को पाने के दो पहलू हैं। रात के बाद दिन, दिन के बाद रात होती है। इसी तरह चोले बदलते हुए... अनुभवों से गुजरते हुए अपने आत्मस्वरूप को ब्रह्मस्वरूप को पाने के लिए मंगलमयी व्यवस्था है। ~~~ॐ सांई राम~~~
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rajiv uppal
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« Reply #23 on: January 15, 2008, 09:44:10 AM » |
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आस्था आस्था सचमुच वह सबसे महान चमत्कारी शक्ति है जिसकी कल्पना की जा सकती है। आस्था कभी किसी व्यक्ति का साथ नहीं छोड़ती। हम तब असफल होते हैं जब हम अपनी आस्था का दामन छोड़ देते हैं। ~~~ॐ सांई राम~~~
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rajiv uppal
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« Reply #24 on: January 17, 2008, 09:55:59 PM » |
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~~~ॐ सांई राम~~~
मनुष्य को अच्छाइयाँ और बुराइयों का पुतला कहा गया है।ऐसा मनुष्य किस काम का जो औरों में केवल बुराई ही बुराई पाए। ऐसे बुरे आदमी के लिए कहा है-'बुरा जो देखन मैं चला, मुझ-सा बुरा न कोय।
~~~ॐ सांई राम~~~
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« Reply #25 on: January 17, 2008, 09:59:21 PM » |
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~~~ॐ सांई राम~~~ अन्यों में सदैव बुराई देखने वाले स्वयं बहुत बुरे होते हैं। मनुष्य के दो कान और दो आँखों के समान समाज में दूसरों की अच्छाइयाँ देखने वाले भी होते हैं। दानी, ज्ञानी, धार्मिक, परोपकारी तथा सेवा करने वालों की बड़े-बड़े समारोहों में प्रशंसा के गीत गाए जाते हैं। इससे इन सद्गुणों का व्यापक प्रचार होता है। ऐसे लोगों को सद्गुणी और प्रशंसक कहा जाता है। ~~~ॐ सांई राम~~~
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« Reply #26 on: January 22, 2008, 04:11:04 AM » |
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~~~ॐ सांई राम~~~ देखने में फूल खूब सुंदर हो, पर उसमें खुशबू न हो तो उसका होना, न होना बराबर है। उसी तरह जो आदमी बोलता तो बहुत मीठा है, पर जैसा बोलता है वैसा करता नहीं, उसकी मीठी वाणी व्यर्थ है।~~~ॐ सांई राम~~~
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rajiv uppal
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« Reply #27 on: January 22, 2008, 04:16:04 AM » |
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~~~ॐ सांई राम~~~ संतोष अर्थात सभी सुखों का दाता। संतोष का गुण ही जीवन में सुख-शांति लाने की उत्तम औषधि है, और कहा भी जाता है जिस मनुष्य के पास संतोषरूपी गुण है, उसे पानी की बूँद भी समुद्र के समान प्रतीत होती है और जिसके पास यह गुण नहीं उसे समुद्र भी बूँद के समान प्रतीत होता है। कबीरदासजी कहते हैं-
चींटी चावल ले चली/ बीच में मिल गई दाल। कहत कबीरा दो ना मिले/ इक ले दूजी डाल॥
अर्थात- एक चींटी अपने मुँह में चावल लेकर जा रही थी, चलते-चलते उसको रास्ते में दाल मिल गई।उसे भी लेने की इच्छा हुई, लेकिन चावल मुँह में रखने पर दाल कैसे मिलेगी? दाल लेने को जाती तो चावल नहीं मिलता। चींटी का दोनों को लेना का प्रयत्न था। ~~~ॐ सांई राम~~~
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« Reply #28 on: January 24, 2008, 01:17:08 AM » |
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ॐ सांई राम~~~
जब सोचना है तो सकारात्मक ही सोचें।जीत की बात सोचने से भले ही आप न जीत सकें;परन्तु उतने समय के लिए हार की दुर्बलता से तो दूर रहेंगे~~~
जय सांई राम~~~
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"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"
" Loka Samasta Sukino Bhavantu Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~
May all the worlds be happy. May all the beings be happy. May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~
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« Reply #29 on: January 28, 2008, 03:50:14 AM » |
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~~~ॐ सांई राम~~~ 'समय बेशकीमती है। समय जीवन है। इसे न खरीदा जा सकता है, न उधार लिया जा सकता है। समय की बर्बादी जीवन की बर्बादी है। बीता हुआ कल सुधारा नहीं जा सकता। आने वाला कल शायद कभी न आए।आज ही हमारा है, इसका हम श्रेष्ठतम उपयोग करें। जो अतीत से नहीं सीखता, वह भविष्य द्वारा दंडित किया जाता है।' ~~~ॐ सांई राम~~~
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