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« Reply #15 on: April 23, 2007, 10:50:31 AM » |
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नेक कोई एक तो करम करले,नेक कोई एक तो करम करले रोज़ थोड़ा-थोड़ा साँई का भजन कर ले 2
माया के दिवाने थोड़ा पुन्य भी कमाले तू साँई नाम की गंगा में गोते आ लगाले तू मोहमाया त्यागने का प्रण करले 2 रोज़ थोड़ा-थोड़ा साँई का भजन करले 2
होके धनवान भी तू कितना ग़रीब है दूर साँई चरणों से जग के करीब है मेरी इस बात का मनन करले 2 रोज़ थोड़ा-थोड़ा साँई का भजन करले 2
त्याग के शरीर जब साँई धाम जाएगा तेरा ये ख़ज़ाना तेरे काम नहीं आएगा जमा साँई नाम के रतन करले 2 रोज़ थोड़ा-थोड़ा साँई क भजन करले 2
प्यार से पुकार साँई दौड़े चले आएंगे देखना वो डेरा तेरे मन में लगाएंगे शिरडी के जैसा अपना मन करले 2 रोज़ थोड़ा-थोड़ा साँई का भजन करले
नेक कोई एक तो करम करले रोज़ थोड़ा-थोड़ा साँई का भजन करले[
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« Reply #16 on: April 25, 2007, 10:10:59 AM » |
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व्यर्थ गवाया 2 व्यर्थ गवाया इस जीवन को पुनर्जनम मैं पाऊँ साँई तेरे बाबा तेरे मन्दिर की मैं घंटी बनकर आऊँ 2
साँझ सकारे मन को तुम्हारे लगते हैं जो प्यारे साँई लगते हैं जो प्यारे घंटी के वो बोल मैं बनके गूँजू तेरे द्वारे साँई गूँजू तेरे द्वारे भक्तों के हाथों हो SSSSSSS भक्तों के हाथों हर पल हर दम कण-कण बजता जाऊँ साँई तेरे मंदिर की मैं घंटी बनकर आऊँ
चाँद का चाँद और तारों का तारा,लगता है मन को प्यारा साँई लगता है मन को प्यारा स्वर्ग से सुन्दर सबसे न्यारा बाबा धाम तुम्हारा साँई बाबा धाम तुम्हारा उतनी ही कम है SSSSSSS तेरी प्रशंसा जितनी करता जाऊँ साँई तेरे बाबा तेरे मंदिर की मैं घंटी बनकर आऊँ
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« Reply #17 on: May 19, 2007, 12:54:31 PM » |
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तेरे नाम के सहारे जीवन बिता रहा हूं जैसी भी निभ रही है वैसी निभा रहा हूं
तुम सबके राज़दां हो हर दिल की जानते हो फ़िर भी ये हाले दिल मैं तुमको सुना रहा हूं
मुझसे सहा न जाये अब ग़म ये ज़िन्दगी का नन्हीं सी जाँ पे कैसे छोटी सी जाँ पे कैसे सदमे उठा रहा हूं
जब तक रहूं मैं ज़िन्दा इज़्ज़त की भीख़ देना ये आस लेके साँई तेरे दर पे आ रहा हूं
दीदार की तलब से हाज़िर हुआ है बन्दा मुद्द्त से मेरे साँई तेरे दर पे आ रहा हूं
तेरे नाम के सहारे जीवन बिता रहा हूं जैसी भी निभ रही है वैसी निभा रहा हूं
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« Reply #18 on: May 19, 2007, 01:11:43 PM » |
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भावना की जोत को जगा के देख लो जगा के देख लो आयेंगे साँई बुलाके देख लो 2 सौ बार चाहे आज़माके देखलो आएंगे साँई बुलाके देख लो
श्रद्धा से सर को झुकाके देखिये सारे दुःख बाबा को सुनाके देखिये एक बार 2 आँसू बहाके देख लो बहाके देख लो आएंगे साँई……………
करोगे सवाल तो जवाब मिलेगा यहां पाप पुन्य का हिसाब मिलेगा कर्मों का हिसाब लगाके देख लो लगाके देख लो आएंगे साँई……………
साँई से अब नहीं दूर रहेंगे हम भी आज बाबा को बुलाके रहेंगे मन से साँई को पुकार देख लो पुकार देख लो आएंगे साँई ………………
चरणों में ज़िन्दगी गुज़ार देखिये बोझ सारा दिल का उतार फेंकिये भार अपना बाबा को सौंप देख लो सौंप देख लो आएंगे साँई बुलाके देख लो
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« Reply #19 on: May 24, 2007, 11:02:22 AM » |
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तकदीर के मारे बन्दों को शिरडी में बुलालो हे साँई बड़ा जग की बलाएं घूर रहीं हमें उनसे बचालो हे साँई
दुनिया के सताए बन्दों को जब अपनी शरण में लेते हो बन जाते कवच हो तुम उनका कोई आँच न आने देते हो अब हाथ पकड़ के हमको भी ज़रा पास बिठालो हे साँई
साँई तान के चादर करुणा की सब कमियाँ हमारी ढक लेना नस-नस ये हमारी विनती करे लाज श्रद्धा की मेरी रख लेना संसार ने जिसको ठुकराया उसे गले से लगालो हे साँई
हम बेबस और कमज़ोर बड़े दु:ख कैसे ज़माने भर के सहें जो दर्द हमारे दिल में है तुमसे न कहें तो किससे कहें अब अपनी महर की छाया तले हम सबको छुपालो हे साँई
तकदीर के मारे बन्दों को शिरडी में बुलालो हे साँई
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« Reply #20 on: May 26, 2007, 10:11:34 AM » |
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मेरे बाबाजी बनालीजिये अपना मेरे बाबाजी बना लीजिये अपना बना लीजिये अपना बना लीजिये अपना
मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊँ 2 हे पावन परमेश्वर मेरे मन ही मन घबराऊँ मेरे बाबाजी बना लीजिये अपना
गहरी नदिया नाव पुरानी पल-पल गोते खाये 2 आपका कहलाता हूँ साँई किसके द्वारे जाए मेरे बाबाजी बना लीजिये अपना
मन्दिर मस्जिद गिरजा गुरुद्वारा सब ही एक समान 2 सबके रूप तुम्हीं में साँई सबमें तेरी पहचान मेरे बाबाजी बना लीजिये अपना
साँई साँई जपते-जपते सब ही उतरे पार 2 हम सब आस लगाए खड़े हैं अबतो करो उद्धार मेरे बाबाजी बना लीजिये अपना
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« Reply #21 on: May 27, 2007, 10:08:41 AM » |
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दया करो साँई दया करो अब तो हम पर दया करो 2 देर भई बड़ी देर भई अब न देर लगाया करो दया करो साँई दया करो
मुद्दत हो गई हाथ पसारे कभी सुनी फ़रियाद नहीं साँई बाबा इन बच्चों की आई तुम्हें क्यों याद नहीं हम हैं बड़े कमज़ोर हमारा सबर न यूँ आज़माया करो दया करो साँई दया करो
धूनी रमाई अलख जगाई बिगड़ी बनादो साँई राम जग है भिखारी दुनिया सारी सबके हो तुम दाता राम जीते हैं जो तेरे सहारे उनको न यूँ तड़पाया करो दया करो साँई दया करो
कण-कण में बसते हो साँई हम ढूँढें तुझे मन्दिर में हम नादान हैं मूरख बालक साँई बसे मन मन्दिर में छोड़ेंगे न चरण तुम्हारे चाहे हमें ठुकराया करो
दया करो साँई दया करो अब तो हम पर दया करो देर भई बड़ी देर भई अब न देर लगाया करो दया करो साँई दया करो
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« Reply #22 on: May 27, 2007, 10:26:25 AM » |
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तुम सागर ठहरे हम गागर ठहरे,हाये प्राण तुम्हीं को ध्याएँ मोहे झलक दिखादो साँई मोहे झलक दिखादो साँई याद बड़ी तड़पाए रे तुम सागर ठहरे………………
आकुल-व्याकुल नैन हैं,सूने हैं दिन रैन रे 2 साँई के दर का कोई,साँई के दर का कोई रस्ता तो बतलाए रे तुम सागर ठहरे………………
श्र्द्धा और सबूरी का देते तुम संदेश रे, श्रद्धा और सबूरी का देते तुम संदेश भक्ति के रस में प्रभु भक्ति के रस में प्रभु तन मन घुलता जाए रे तुम सागर ठहरे…………
शिरडी वाले साँई की महिमा अपरम्पार रे 2 सूरज तुझसे पूछकर,सूरज तुझसे पूछकर चढ़ता ढलता जाए रे तुम सागर ठहरे……………
पत्थर पूजन से नहीं मिलते तुम चितचोर रे पत्थर पूजन से नहीं मिलते तुम चितचोर रे मौसम पर मौसम मेरा मौसम पर मौसम मेरा खाली बीता जाए रे
तुम सागर ठहरे हम गागर ठहरे हाए प्राण तुम्हीं को ध्यावें 2 मोहे झलक दिखादो साँई 2 याद बड़ी तड़पाए रे तुम सागर ठहरे हम गागर ठहरे[/color][/b]
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« Reply #23 on: May 29, 2007, 09:07:31 AM » |
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है ये पावन शिरडी यहाँ बार-बार आना साँईनाथ के चरणों में आकर के झुकजाना है ये पावन शिरडी यहाँ बार-बार आना
तेरा मुख्ड़ा सुन्दर है तू जान से प्यारा है 2 मैं आँखें जब खोलूँ मुझे तुम ही नज़र आना है य पावन शिरडी यहाँ बार-बार आना
तू जग का स्वामी है तू अन्तर्यामी है2 मेरी विनती सुनलेना साँई दया तू बरसाना है य पावन शिरडी यहाँ बार-बार आना
तू ही मेरी किस्मत है मुझे तेरी ज़रूरत है 2 साँई मेरी भक्ति का कुछ मोल तो दे जाना है य पावन शिरडी यहाँ बार-बार आना
इतनी मेरी अरज़ी है साँई इसको न ठुकराना जब द्वार तेरे आऊँ साँई दर्शन दिखलाना है य पावन शिरडी यहाँ बार-बार आना
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« Reply #24 on: May 29, 2007, 09:51:01 AM » |
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तू मारे या तारे 2 साँई बाबा हम हैं दास तुम्हारे
जब से अपनी आँख खुली है दिन उजला हर शब उजली है जागे भाग हमारे,जागे भाग हमारे ओ साँई बाबा हम हैं दास तुम्हारे
सदियों से थे पहरे दिल पर आ पहुँचे अपनी मज़िल पर आख़िर तेरे सहारे आख़िर तेरे सहारे ओ साँई बाबा हम हैं दास तुम्हारे
हम तड़पत हैं तेरे दर्शन को मांगत हैं तुझसे तेरे मन को कबसे हाथ पसारे कबसे हाथ पसारे ओ साँई बाबा हम हैं दास तुम्हारे
खोज में तेरी नीर बहाएँ जाने और कहाँ ले जाएँ इन अँखियन के धारे इन अँखियन के धारे ओ साँई बाबा हम हैं दास तुम्हारे
हर संकट हर पीड़ को देखो भक्तजनों की भीड़ को देखो कोई न पत्थर मारे कोई न पत्थर मारे ओ साँई बाबा हम हैं दास तुम्हारे
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« Reply #25 on: June 03, 2007, 10:54:09 AM » |
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भिक्षा देदे माई भिक्षा देदे माई तेरे द्वार पे चलके आया शिरडी वाला साँई भिक्षा देदे माई
चिमटा कटोरा सटका लेकर भिक्षा माँगने आए तू दे न दे फिर भी साँई आशिष दे कर जाए भिक्षा देदे माई
देवे भिक्षा उसको साँई दस पट कर लौटाए ना भी दे तो हरपल साँई उसका भार उठाए भिक्षा देदे साँई
दान धरम से भोग है कटता यह बतलाने आए एक इशारा हो जाए उसका भव से तू तर जाए भिक्षा देदे माई
रूप बदलना आदत उसकी घर भक्तों के जाए रोटी टुकड़ा भिक्षा मांगे असली रूप छिपाए भिक्षा देदे माई
तेरे द्वार पे चलकर आया शिरडी वाला साँई भिक्षा देदे माई
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« Reply #26 on: June 13, 2007, 10:39:13 AM » |
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धूल तेरे चरणों की बाबा चन्दन और अबीर बनी जिसने लगाई निज मस्तक पर उसकी तो तकदीर बनी धूल तेरे चरणों की बाबा……………
हर वस्तू का मोल है जग में इस वस्तू का मोल नहीं चरणधूल से बढ़कर जग में चीज कोई अनमोल नहीं धूल्………………
पार हुई पत्थर की अहिल्या चरण धूल को पाने से भिलनी तर गई राम चरण की रज में डुबकी लगाने से धूल्……………
जिन चरणों में गंगा बह्ती उन चरणों का करें हम ध्यान लाखों पत्थर हीरे बनगये चरण-धूल में कर स्नान धूल……………
तेरे चरणों की महिमा गाएँ युग-युग से ये वेद पुराण आके श्रद्धा से हम करलें तुमको लाखों बार प्रणाम धूल्……………
देवता तरसें इस धूली को पावन है कितनी धूली लाखों देवता ब्रिज में ढूँढें चरण धूल की कुन्ज गली
धूल तेरे चरणों की बाबा चन्दन और अबीर बनी जिसने लगाई निज मस्तक पर उसकी तो तकदीर बनी धूल तेरे चरणों की बाबा………………
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« Reply #27 on: June 27, 2007, 11:08:33 AM » |
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हम मतवाले हैं चले साँई के देस 2 जहाँ सभी को चैन मिलेगा कभी न लागे ठेस हम मतवाले हैं चले साँई के देस
फूल सी धरती बनती जाए एक पिघलता लावा पहन रही है पगली दुनिया अग्नि का पहरावा जाने अभी ये बन्दे तेरे बदलें कितने भेस हम मतवाले……………
देखो अपनी हर मुश्किल है आज समस्या उसकी चलो चलें चरणों में सोकर करें तपस्या उसकी किस सपने में कब मिल जाए प्रेम भरा संदेस हम मतवाले………………
हमें न है कुछ फ़िक्र आजकी न अँदेसा कलका मनका -मनका जपते कर लिया मनका बोझा हलका दो दिन की बहरूपी दुनिया असल में है परदेस
हम मतवाले हैं चले साँई के देस हम मतवाले………………
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PARAMGURU SRI SAINATH MAHARAJ KI JAY
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« Reply #28 on: July 03, 2007, 04:38:40 AM » |
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AUM SAI RAM!
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« Reply #29 on: July 14, 2007, 10:09:14 AM » |
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साँई कैसा तेरा ये विधान न सब दिन एक समान हे साँई बाबा हे साँई बाबा साँई कैसा तेरा ये विधान न सब दिन एक समान
इक दिन हरिश्च्न्द्र भरे ख़ज़ाना 4 फिर माँगे कफ़न का दान न सब दिन एक समान
इक दिन रामचन्द्र चढ़े विमाना 4 फिर हुआ उनका बनवास न सब दिन एक समान
इक दिन बालक भयो सयाना 4 फिर जाकर जरे मसान न सब दिन एक समान
कहत कबीरा पद निरवाना 4 जो समझे चतुर सुजान न सब दिन एक समान
साँई कैसा तेरा ये विधान न सब दिन एक समान
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