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Author Topic: कुछ अटपटे कुछ हटकर ख्याल।।  (Read 4209 times)
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Ramesh Ramnani
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« Reply #75 on: March 20, 2008, 11:40:33 PM »

जय सांई राम।।।

जो मांगोगे वही मिलेगा......कल्प वृक्ष की परिकल्पना

हमने कल्पना की की स्वर्ग में कल्प वृक्ष होंगे,  उनके नीचे आदमी बैठेगा। इच्छा करेगा,  करते ही इच्छा पूरी हो जायेगी। लेकिन अगर आपको कल्प वृक्ष मिल जाये, तो बहुत सम्हलकर उसके नीचे बैठना। क्योंकि आपकी इच्छाओं का कोई भरोसा नहीं है।
मैंने एक कहानी सुनी है। एक दफा एक आदमी -  हमारे -आपके ही जैसा एक आदमी - भूल से कल्प वृक्ष के नीचे पंहुच गया। उसको पता भी नहीं था कि यह कल्प वृक्ष है। उसके नीचे बैठते ही उसको लगा कि बहुत भूख लगी है:  अगर कहीं भोजन मिल जाता तो...। वह एक दम चौंका,  एक दम भोजन की थालियाँ चारो तरफ आ गईं। वह थोड़ा डरा भी कि यह क्या मामला है,  कोई भूत प्रेत तो नही है यहाँ!  कहीं यहाँ कोई भूत प्रेत न हो! उसके ऐसा सोचते ही -  भोजन की थालियाँ गायब हो गईं, भूत प्रेत चारों ओर खडे हो गए। वह घबराया! यह तो बडा उपद्रव है कोई गला न दबा दे!  भूत प्रेतों ने उसका गला दबा दिया।

आपको अगर कल्प वृक्ष मिल जाये तो भाग जाना,  क्योंकि आपको अपनी इच्छाओं का कोई पक्का पता नहीं की आप क्या मांग बैठेंगे। क्या आप के भीतर से निकल आएगा। आप झंझट में पड़ जायेंगे, वहां पूरा हो जाता है सब कुछ ................................. ।

अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

ॐ सांई राम।।। 
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अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी
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« Reply #76 on: March 23, 2008, 05:43:03 AM »

ॐ सांई राम~~~

छोङो छोङो मेरे यार
प्यार व्यार सब बेकार
मतलब के है सारे यार,
पल में तोला पल में माशा
जिन्दगी बना देते गमखार,
कहने को हर पल वो कहते
मुझको तुझसे बहुत है प्यार,
पर साथ ही कह देते ये भी
कहने में क्या जाता यार,
जीना हराम कर देते ये
ले कर के प्यार की आङ,
मतलब को करते सब प्यार
पल में देते धक्का मार,
इस जग में एक सच यही है
नहीं होता यहाँ कोई यार
कोई नहीं करता किसी से प्यार
मतलब निकला दिल भरा,
ढ़ुढा फिर कोई नया शिकार
बना लिया फिर उसको यार
कर लिया फिर उसको प्यार,
क्या-क्या बीतता है इस दिल पर
ये तो जाने वो सच्ची सरकार~~~

जय सांई राम~~~
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"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

" Loka Samasta Sukino Bhavantu
Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

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« Reply #77 on: April 25, 2008, 11:13:34 PM »

ॐ सांई राम~~~

आज पैसा ही सब कुछ~~~

आज पैसे से बनते है रिश्ते
आज पैसे से बनती है दुनिया,
पैसे के बिन इंसान का
कोई वजूद न रहा,
पैसे के बिना इंसान का
इंसान से कोई रिश्ता न रहा।
पैसे ने आज आदमी को इतना अंधा बनाया,
कि उसने मां की ममता को ठुकराया,
बहन की राखी को झुठलाया।
पैसे की दुनिया है निराली,
पैसे के साथ ही बजती है
आज दो हाथों से ताली,
आज कदम कदम पर,
अमीरों के शोशों ने बनाया,
गरीबों को आज दो वक्त की रोटी का मोहताज,
कहीं गरीबों की छोटी सी झोपङियां,
कहीं अमीरों के शीश महल।
आज पैसा ही सब कुछ,
पैसे के लिए लोग करते है,
अमीर अनपढ़ों को भी सलाम।
जिस कारण पढ़ें-लिखे,गरीब रह जाते है,
मंज़िल को पाने में नाकाम~~~

जय सांई राम~~~
« Last Edit: April 25, 2008, 11:26:06 PM by tana » Logged

"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
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« Reply #78 on: May 02, 2008, 12:09:33 AM »

ॐ सांई राम~~~
       
मैं सुनती अक्सर सब कहते
हाय बेचारा चला गया
पर मुझको ये समझ न आता
वो बेचारा या हम बेचारे
जाने वाला तो गया
जंजालो से छूट गया
कैद पंछी आज़ाद हुआ
बेचारे तो हम हुए
इन्ही घरों में घूम रहे
जानवरों की तरह जी रहे
इसी झूठ को सच मान रहे
जैसे कि हमें तो मरना नहीं
पगले है न समझे कि
यहाँ किसी ने रहना नहीं,
स्वास मिले है जितने भी
उनको ही पूरा करना है,
जितने भाग्य में लिखे दाने
उतने ही बस खाने है,
जितना चाहे जोङ ले हम
तिनका भी साथ न जाना है,
जिसकी दया पर जी रहे है
जिसका दिया खा रहे है
उसको ही भूले बैठे है,
फिर यही मुझे समझ न आए
कौन बना बेचारा है
मरने वाला बेचारा है
या हम सारे बेचारे है !!!

जय सांई राम~~~
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"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
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« Reply #79 on: May 08, 2008, 12:21:39 AM »

ॐ सांई राम~~~

तेरे फूल ने यारा ऐसा दर्द दिया
दूसरे के पत्थर से भी असर न हुआ,
क्योंकि तूं था यार पर तूने जो मारा
पर चाहे था वो फूल पर लगा ऐसा कि
दिल ही हिल गया,
पत्थर मारा जिसने वो मेरा कुछ भी न था
तभी मुझे पता भी न लगा
तेरे मारे फूल ने ऐसा जख्म दिया,
जिसकी कोई दवा नहीं
लोगों के पत्थरों की थी मुझे परवाह नहीं
असल में तो इन पत्थरों के लिए तो मैं तैयार थी,
पर तुझसे सदा प्यार की दरकार थी
तेरी मार वो असर कर गई
यारी से भरोसा ही उठा गई,
यार बनाम गद्दार के फूलों से
सांई बचाए सब को और मुझको
चाहे दुश्मनों के पत्थर खिलाए मुझको
उस दर्द के लिए तैयार हूँ मैं,
यारों के जख्म नहीं सह सकती हूँ मैं!!!

जय सांई राम~~~
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« Reply #80 on: May 13, 2008, 04:41:32 AM »

जय सांई राम।।।

बातें कितनी अच्छी होती हैं। समंदर की बातें करिये और आप समंदर किनारे पहुंच जाते हैं। बर्फ़ की बातें करिये और दिमाग़ पैरों तले बर्फ़ की सफ़ेद चादर बिछा देता है। रेत की बात छिड़े तो रेगिस्तान के थपेड़े महसूस होने लगते हैं। बातें, दिमाग़ और शब्द मिलकर सेकेंट के सौवें हिस्से से भी कम समय में आपको भारत से अमेरिका पहुंचा सकते हैं। बातों के ज़रिये उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव जाने में सेकेंड का कौन सा हिस्सा लगेगा, ये मापा भी नहीं जा सकता। हैरी पॉटर भी अपनी जादुई छड़ी हिलाकर इतनी जल्दी हमें यहां से वहां नहीं भेज सकता। बातों-बातों में हम जाने क्या-क्या बातें कर जाते हैं। बहुत ऊंची-ऊंची बातें करनेवालों को बुद्धिजीवी फ़र्ज़ी ठहराते हैं। निंदा रस की बातों का मज़ा ही दूसरा होता है। बातें नहीं करते तो घुन्ने कहलाते हैं, बातें बहुत करते हैं तो कहते हैं कि बात बनाते हैं। कुछ लोग बहुत अच्छा बोलते हैं लेकिन दिल के बहुत कड़वे होते हैं। कुछ बहुत कड़वी बातें बोलते हैं मगर दिल के बहुत अच्छे होते हैं। बातों से हम कितना बंधे हैं। अगर कोई अपना साथ छोड़ चला जाता है तो सबसे ज्यादा बातों की ही तो कमी खलती है, न मुलाक़ात होगी, न बात होगी। बातें ही तो हैं जिस पर ज़िंदगी चलती है।

अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

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अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी
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« Reply #81 on: May 18, 2008, 12:56:14 AM »

जय सांई राम।।।

Nice one J
 
This is very interesting..........(to women) please take time to ponder........(to men) enjoy the story........

Young King Arthur was ambushed and imprisoned by the monarch of a neighboring kingdom. The monarch could have killed him but was moved by Arthur's youth and ideals. So, the monarch offered him his freedom, as long as he could answer a very difficult question. Arthur would have a year to figure out the answer and, If after a year, he still had no answer, he would be put to death. The question was: What do women really want?

Such a question would perplex even the most knowledgeable man, And to young Arthur, it seemed an impossible query. But, since it was better than death, He accepted the monarch's proposition to have an answer by year's end.

He returned to his kingdom and began to poll everyone: The princess, the priests, the wise men, and even the court jester. He spoke with everyone, but no one could give him a satisfactory answer. Many people advised him to consult the old witch, For only she would have the answer. But the price would be high as the witch was famous through out the kingdom for the exorbitant prices she charged.
 
The last day of the year arrived and Arthur had no choice but to talk to the witch. She agreed to answer the question, but he would have to agree to her price first.

The old witch wanted to marry Sir Lancelot, The most noble of the Knights of the Round Table, And Arthur's closest friend! Young Arthur was horrified. She was hunch-backed and hideous, had only one tooth, Smelled like sewage, made obscene noises, etc.

He had never encountered such a repugnant creature in all his life. He refused to force his friend to marry her and endure such a terrible burden.

But Lancelot, having learnt of the proposal, spoke with Arthur. He said nothing was too big of a sacrifice compared to Arthur's life. And the reservation of the Round Table. Hence, a wedding was proclaimed and the witch answered. Arthur's question thus: "What a woman really wants?"

She said, "Is to be in charge of her own life."

Everyone in the kingdom instantly knew that the witch had uttered a great truth. And that Arthur's life would be spared.

And so it was.

The neighboring monarch granted Arthur his freedom.

And Lancelot and the witch had a wonderful wedding.

The honeymoon hour approached and, Lancelot, steeling himself for a horrific experience, entered the bedroom.

But, what a sight awaited him.

The most beautiful woman he had ever seen lay before him on the bed.

The astounded Lancelot asked what had happened.

The beauty replied that since he had been so kind to her when she appeared as a witch, She would henceforth be her horrible and deformed self only half the time. And the beautiful maiden the other half.

"Which would you prefer? She asked him. "Beautiful during the day .... or at night?"

Lancelot pondered the predicament.

During the day he could have a beautiful woman to show off to his friends, But at night, in the privacy of his castle, an old witch!

Or,

Would he prefer having a hideous witch during the day?

But by night a beautiful woman for him to enjoy wondrous, intimate moments with?

(If you are a man reading this...) What would YOUR choice be?

(If you are a woman reading this) What would YOUR MAN'S choice be?
What Lancelot chose, is given below:

BUT... make YOUR choice before you scroll down below... OKAY?
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Noble Lancelot, knowing the answer the witch gave Arthur to his question, He said that he would allow HER to make the choice herself.
 
Upon hearing this, she announced that she would be beautiful all the time. Because, he had respected her enough to let her be in charge of her own life.
Now... what is the moral to this story?



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The moral is...
1) There is a witch in every woman no matter how beautiful she is!
2) If you don't let a woman have her own way, things are going to get ugly.           

So, always remember:

IT'S EITHER "HER WAY" OR IT'S "NO WAY"

अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

ॐ सांई राम।।।
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अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी
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« Reply #82 on: May 22, 2008, 12:12:45 PM »

ॐ सांई राम~~~

ओ प्यारे तूं क्या किए जाए रे,पाप कमाए जाए रे,
तेरे अंदर जो ऱब बैठा,उसका भी खौफ न खाए रे,
अपने छोटे सुख की खातिर,दूसरे को तङपाए रे,
जब आती दुख की बारे,तो पूछे मैंने क्या पाप कमाए रे,
तेरी आत्मा सब कुछ जाने,वही ऱब का खौफ भी माने,
पर ये तेरा पापी मन,वही पर्दा बन जाए रे,
जो चाहे तूं अपना भला,
फिर तेरा मन,तेरी आत्मा तो क्या,ऱब भी साथ हो जाए रे~~~

जय सांई राम~~~
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"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
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« Reply #83 on: June 02, 2008, 03:21:07 AM »

ॐ सांई राम~~~

लोग कहे मैं एसे गल्त , लोग कहे मैं वैसे गल्त ,
चल छोङ ओ पगले , कि लोग कहें तुझको गल्त ,
तू तो जाने रे मन , लोग तो कहते ऱब को भी गल्त ,
फिर तेरी क्या औकात बांवरे , दे जो सफ़ाई कि मैं नही गल्त ,
तो फिर कहने दे जो कहता है , कि तू यूं गल्त , तू वूं गल्त~~~

जय सांई राम~~~~
       
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"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
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« Reply #84 on: June 05, 2008, 12:58:02 AM »

जय सांई राम़।।।

चुप रहने से क्या होता है
जीना आसान हो जाता है
इसलिए हम चुप हैं
क्योंकि चुप रहने से
रहना आसान हो जाता है
जिंदगी की सारी पेंच
सुलझ जाती है
और जिंदगी काटना आसान हो जाता है!

अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

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« Reply #85 on: June 19, 2008, 09:04:24 AM »

ॐ सांई राम~~~

कभी हस लिया कभी रो लिया
कभी खा लिया कभी सो लिया
कभी सोते दामन भिगो लिया
कभी खुद को खुद में डुबो लिया
कभी भाग जाने को दिल किया
कभी ये किया कभी वो किया
एक पल जो सोचा बैठ कर
अरे ये क्या हमने कुछ भी नहीं किया
जो गुनाह किया उसका फल लिया
शायद यही एक भला हुआ
जो मेरा गुनाह मुझे बयां हुआ
माफिया मांगी मैने किये सज़दे
पर गुनाह तो गुनाह किया..........

जय सांई राम~~~
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« Reply #86 on: July 10, 2008, 03:28:36 AM »

ॐ सांई राम~~~

खुमारी चढ़ के उतर गई
ज़िंदगी यूं ही गुजर गई~
कभी सोते सोते कभी जागते
ख़्वाबों के पीछे यू ही भागते
अपनी तो सारी उमर गई~~

रंगीन बहारों की ख्वाहिश रही
हाथ मगर कुछ आया नही~
कहने को अपने थे साथी कई
साथ किसीने निभाया नही~
कोई भी हमसफ़र नही
खो गई हर डगर कही
कभी सोते सोते कभी जागते
ख़्वाबों के पीछे यू ही भागते
अपनी तो सारी उमर गई~~

लोगों को अक्सर देखा है
घर के लिए रोते हुए~
हम तो मगर बेघर ही रहे
घरवालों के होते हुए~
आया अपना नज़र नही
अपनी जहाँ तक नज़र गई
कभी सोते सोते कभी जागते
ख़्वाबों के पीछे यू ही भागते
अपनी तो सारी उमर गई~~

पहले तो हम सुन लेते थे
शोर में भी शहनाईयां~
अब तो हमको लगती है
भीड़ में भी तन्हैया
जीने की हसरत किधर गई~
दिल की कली बिखर गई
कभी सोते सोते कभी जागते
ख़्वाबों के पीछे यू ही भागते
अपनी तो सारी उमर गई~~

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« Reply #87 on: August 04, 2008, 09:57:09 PM »

ॐ सांई राम~~~

निकले थे घर से सुख की तलाश में,
मायूसियां और उदासी राह में खङे थे और साथ हो लिए,
मैने पूछा अरे कौन हो तुम,
वो बोले बङे रोब से जिस तलाश में तुम हो,
उसी की भाई-बहन है हम,मायूसियां और उदासी हमारा है नाम,
तूं है जिसकी तलाश में वो हमारे है साथ,
यदि चाहते हो सुख को पाना तो पहले हमें अपना,
फिर सुख देंगे हम तुझे यही हमारी राह,
तूं हमे साथ ले न ले हमें तो साथ चलना है,

हम कोई सज़ा नहीं उस दाता की ही रज़ा~~~

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« Reply #88 on: August 10, 2008, 06:30:41 AM »

जय सांई राम़।।।

एक आदमी
घर में पालने के लिये
कुत्ता खरीदने बाजार आया
कुत्तों के मालिक ने उसे
अपना पूरा संग्रहालय दिखाया
आदमी को एक छोटे से
पिल्ले पर आ गया प्यार
कीमत चुका कर
उसे ले जाने को
हो गया तैयार
चलते समय पिल्ले ने
बड़े ही मान और दुलार से
अपनी मां को
चाटा और सहलाया
मां की आंखों की कोरों में
पानी भर आया
अपने मन पर काबू रख कर
उसने पिल्ले को समझाया
बेटे जा रहे हो..
अलविदा...
लेकिन याद रखना
जिस किसी का भी नमक खाना
उसे दगा मत देना
उसका अहित मत करना
अपने मालिक का
आजीवन साथ निभाना..
हर कीमत पर
सदैव अपना पशु धर्म निभाना..
लेकिन खबरदार...
आदमी के साथ रहते-रहते
आदमी मत बन जाना..

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« Reply #89 on: August 17, 2008, 11:29:48 PM »

ॐ सांई राम~~~

लङाई भी तूं,खैर भी तूं,
दर्द भी तूं,आराम भी तूं,
आँसूं भी तूं,खुशी भी तूं,
प्यास भी तूं,पानी भी तूं,
दुःख भी तूं,दवा भी तूं,
गिला भी तूं,प्यार भी तूं,
मेरा रोग भी तूं,मेरी दवाई भी तूं,

जब सब कुछ ही तूं है,
तो तूं ही कर,
मैं क्यूं करूं,मैं क्या करूं..........

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