tana
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~सांई~~ੴ~~सांई~
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« on: April 27, 2008, 09:00:25 PM » |
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ॐ सांई राम~~~
सबके आराध्य साँई बाबा~~~
'सबका मालिक एक है'... यह गूढ़ मंत्र देने वाले शिर्डी के साँई बाबा (1918 में समाधि) भारत में गुरु, योगी और फकीर के रूप में हिंदू व मुस्लिम श्रद्धालुओं के बीच बेहद सम्माननीय हैं। कुछ हिंदू श्रद्धालुओं का विश्वास है कि साँई बाबा शिव या दत्तात्रेय भगवान के अवतार हैं। उन्हें सतगुरु का सम्मान भी मिला और कबीर का अवतार भी माना गया। ‘साँई बाबा’ नाम फारसी और भारतीय से लिया गया है, ‘साँई’ एक फारसी शब्द है, जिसका अर्थ है पवित्र या संत, जबकि भारतीय भाषाओं में ‘बाबा’ शब्द का प्रयोग पिता के लिए किया जाता है। इस तरह से साँई बाबा का अभिप्राय पवित्र पिता से है। जन्म से लेकर सोलह वर्ष तक की आयु का उनका जीवन परिचय अस्पष्ट है, इसलिए उनके प्रारंभिक जीवन से जुड़े कई सारे अनुमान व अनुश्रुतियाँ सुनने को मिलती हैं। अपने जीवनकाल में उन्होंने हिंदू व इस्लाम धर्मों की एकता पर बल दिया है।
लोक मान्यता है कि वे जीवनभर एक मस्जिद में रहे और उनकी मृत्यु के पश्चात उनका अंतिम संस्कार एक मंदिर में हुआ था। उन्होंने हिंदू व मुस्लिम, दोनों ही परंपराओं को नया रूप दिया। इस तीर्थस्थान का मूल नारा ‘अल्लाह मालिक’ है।
साँई बाबा ने प्रेम, दया, सहिष्णुता, क्षमा, शांति और भक्ति जैसे सिद्धांतों का पाठ पढ़ाया। वे अद्वैतवाद दर्शन के अनुयायी थे और उन्होंने भक्ति व इस्लाम, दोनों ही धाराओं में शिक्षाएँ दीं। महाराष्ट्र, दक्षिणी गुजरात और आंध्रप्रदेश में इनकी लोकप्रियता अपरम्पार है, मगर उनके मूल को लेकर आज भी विवाद है।
शिर्डी में साँई बाबा से जुड़े सभी महत्वपूर्ण स्थान आसपास ही स्थित हैं, जिनमें साँई बाबा का ‘समाधि’ मंदिर, संत स्थान ‘गुरुस्थान’, मस्जिद ‘द्वारकामाई’, चावड़ी, लेंडीबाग, संग्रहालय तथा खंडोबा मंदिर। यहाँ पर तीन प्रमुख त्योहार श्री रामनवमी, गुरुपूर्णिमा तथा विजयादशमी महोत्सव के रूप में मनाए जाते हैं।
जय सांई राम~~~
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