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Author Topic: कुछ अटपटे कुछ हटकर ख्याल।।  (Read 25564 times)

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Offline rajiv uppal

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  • ~*साईं चरणों में मेरा नमन*~
    • Sai-Ka-Aangan
Re: कुछ अटपटे कुछ हटकर ख्याल।।
« Reply #30 on: December 17, 2007, 03:27:34 AM »
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  • मन को इतनी छूट न दो
    कि वह कहते-कहते
    तुम्हारी सुनना ही बंद कर दे।
    अगर उसकी सुनने लगो इतनी
    तो यह न हो
    कि बोलना ही वह तुम्हारा बंद कर दे।


    ..तन है तेरा मन है तेरा प्राण हैं तेरे जीवन तेरा,सब हैं तेरे सब है तेरा मैं हूं तेरा तू है मेरा..

    Offline rajiv uppal

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    • ~*साईं चरणों में मेरा नमन*~
      • Sai-Ka-Aangan
    Re: कुछ अटपटे कुछ हटकर ख्याल।।
    « Reply #31 on: December 17, 2007, 03:41:51 AM »
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  • क्या आत्मा अजर अमर है?

    आत्मा अजर अमर होती है। शरीर नाशवान है वह मरता है परन्तु आत्मा कभी नहीं मरती है। यही हमें बचपन से ही सिखाया जाता है।
    आत्माएं शरीर बदलती रहती है। आत्माओं के लिये शरीर मात्र एक किराए के मकान की तरह होता है। जब वे इसे छोडती हैं तो शरीर को मृत मान लिया जाता है।
    इसका मतलब हम आत्माए हैं जो इस शरीर में रह रहै है। किसी दिन हम इस शरीर को छोड देंगे।
    लेकिन जब सभी जानते हैं कि आत्माएं नहीं मरती तो फिर किसी के मरने पर इतना रोना धोना क्यों होता है।
    दुनिया की जनसंख्या क्यों बढ रही है?
    यह बात भी आश्यर्य की है कि दुनिया की जनसंख्या क्यों बढ रही है जबकी आत्मा तो अजर अमर है। आत्माएं शरीर बदलती है इससे
    मानव का जीवन मृत्यु का खेल चलता है, तो इस नियम के अनुसार तो जनसंख्या नहीं बढनी चाहीये न। क्योंकी जो मर रहा है वो
    कुछ दिनों बाद फिर जन्म ले रहा है, तो फिर इतनी पापूलेशन कैसे बढी।
    हम भारतीय 35 करोड से एक अरब कैसे होगये?
    क्या नई नई आत्माएं जन्म ले रही है?
    उदाहरण के तोर पर भारत देश में 1940 के समय लगभग 35करोड की जनसंख्या थी। इसका मतलब 35करोड आत्माएं 35करोड शरीरों में रह रही थी। तो फिर ये जनसंख्या उत्तरोत्तर आगे कैसे बडती गई। तो क्या लगातार आत्माएं भी जन्म ले रही थी?
    ये बात मेरी समझ से परे है
    क्या आत्माएं भी आपस में शादी करके बच्चे पैदा कर रही है?
    तभी तो एक अरब आत्माएं हो गई है।
    इसका मतलब सरकार को आबादी नियंत्रण के ये जनता को समझाने कि बजाय आत्माएं को समझाना चाहिये कि वो आत्माएं पैदा न करें। बैचारे शरीर फालतु ही बदनाम हो रहै हैं जनसंख्या वृद्धी के लिये।

    ..तन है तेरा मन है तेरा प्राण हैं तेरे जीवन तेरा,सब हैं तेरे सब है तेरा मैं हूं तेरा तू है मेरा..

    Offline Ramesh Ramnani

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      • Sai Baba
    Re: कुछ अटपटे कुछ हटकर ख्याल।।
    « Reply #32 on: December 20, 2007, 11:11:05 PM »
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  • जय सांई राम।।।

    सवाल और जवाब

    यह भी एक सवाल है कि आदमी के मन में पहला सवाल क्या आया होगा? वह चाहे जो भी रहा हो पर उस सवाल ने ही सभ्यता को एक गति दी होगी। उसका उत्तर ढूंढने निकले मनुष्य ने और भी कई चीजें खोज डाली होंगी। हमारे मन में अनगिनत सवाल उठते रहते हैं। उनके जवाब के भी कई स्त्रोत हैं। कई बार हमारे कुछ सवालों का जवाब समय देता है। लेकिन कुछ शाश्वत प्रश्न ऐसे हैं जिनका आज तक कोई ढंग का उत्तर नहीं मिल सका, जैसे जीवन के रहस्यों के बारे में। फर्ज कीजिए, एक दिन हमें उसका उत्तर मिल जाए। सब कुछ पता चल जाए। संभव है उस दिन से जीने की हमारी ललक कुछ कम हो जाएगी। यह ऐसा ही है जैसे हमें यह पता चल जाए कि हमारी आयु कितनी है? जीवन के अंत के बारे में ठोस जानकारी हमें जीवन से और दूर ले जा सकती है। इसलिए कई प्रश्नों का अनुत्तरित रहना ही हमारे हित में है। यह अनिश्चयता हमारे जीवन को रोचक बनाती है। सवाल तो उठते रहेंगे, लेकिन यह जरूरी नहीं कि उनका जवाब भी मिल ही जाए। 

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline Ramesh Ramnani

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      • Sai Baba
    जय सांई राम।।।

    अगर कोई बात गले में अटक गई हो तो उगल दीजिये, मन हलका हो जाएगा...

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline Ramesh Ramnani

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    जय सांई राम़।।।

    मन का खोखलापन
    तन को रुग्ण कर देता हैं
    विचारों की कलुषिता से
    अपना दिल बैचैन होता हैं

    जैसा ख़्याल दिल में होगा
    वैसा ही दृश्य सामने
    हर हाल में प्रकट होगा
    ख्वाब देखना ठीक है
    पर अगर पूरे न हों तो
    देखने वालों को तकलीफ
    का सामना करना पड़ता हैं

    जैसी सोच होती है
    वैसी ही दुनिया सामने नजर आती है
    कुछ अच्छा और बुरा नहीं
    नज़रिया जैसा होता है
    वैसे ही अहसास हो जाते हैं

    इसलिये जैसी दुनिया
    देखना चाहते हो
    वैसी ही सोच के साथ चलो
    ख़्वाबों और ख्यालों में
    कुछ खूबसूरत नजरिये
    जोड़ते हुए उनके साथ ढलो
    जिन्दगी का सफर तो सभी काटते
    कुछ रोते कराहते गुजारते
    जो हँसते,  गुनगुनाते और अपनी
    हकीकतों से करते दोस्ती
    वही सुख के पल जी पाते है...

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई
    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline Ramesh Ramnani

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      • Sai Baba
    Re: कुछ अटपटे कुछ हटकर ख्याल।।
    « Reply #35 on: February 25, 2008, 02:01:22 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    आज आप ऐसे हैं। पर कल कैसे होंगे ये पता नही किसी को भी। एक चीज है जिसका नाम है वक्त। ये वक्त बहुत बलवान है। कभी अमीर को गरीब तो कभी गरीब को अमीर इसे सब ढालना आता है। कभी संवेदनशील को संगदिल तो कभी संगदिल को फकत मोम। एक चीज है जिसे हिन्दी मे लौह या लोहा कहते है। रसायन शास्त्र वाले उसे Fe लिख के दर्शाते हैं। वो मजबूती का प्रतीक है। ये वक्त उसे भी जंग लगा के खा जाता है। वक्त ऐसी ही चीज है। कभी ऐसे भी दिन होते है जब हंसी ही हंसी हर पल। तो कभी ऐसा भी वक्त आता है जब अश्क ही अश्क बहते रहते हैं। और फ़िर कुछ वक्त बाद वो आंख भी सूख जाती है जिस से निर्झारनी झरती ही रहती है। सारांश मे वक्त बहुत बलवान है।

    अब आप सोच रहे होंगे कि मैं ये सब क्यों लिख रहा हूँ। बस वजह इतनी सी है जो छोटी सी जिंदगी गुजारी है वो वक्त गुजरने से ही गुजरा है। मैंने भी परिवर्तन महसूस किया है। एक वो वक्त जब हर समय बस पढ़ने और क्रिकेट खेलने की फिक्र। फ़िर वो समय जब अपने कल कि चिन्ता। और अब वो समय जब जिंदगी को बहुत करीब से देख रहा हूँ क्योंकि अब समझने की शक्ति बढ़ गई है। अब वो समय है जब अच्छा क्या है और बुरा वो बचपन की तरह माँ पापा को मुझे समझाने की जरूरत नही। मैं ख़ुद ये सब महसूस कर सकता हूँ। ये सब वक्त का कमल है। यही कुछ पहले का वक्त था थोड़ी थोड़ी बाधाएं मन को विचलित करती थी। अब वही वक्त है जिसमे समय के साथ लड़ने का हौसला है।

    कल का पता किसे है। जो होता है आज होता है। कल को कौन क्या होगा कोई क्या जाने। मैं नही रहा कल जैसा मुझे वक्त ने बदल दिया। कल मैं ऐसा नही रहूंगा जैसा आज हूँ। फ़िर कल कि चिन्ता में आज क्यों खोना? इतना तो पता है कि व्यसनी नही हूँ। काम कर रहा हूँ। वही काफ़ी सुकून दे जाता है। मुझे क्या जमाने से लेना। किसी को हँसा सकता हूँ तो हँसाने कि कोशिश करता हूँ। चाह कर किसी को नही रुलाता। पर फ़िर भी जाने अनजाने कभी न कभी आप किसी को रुला जाते है। पर मैं तभी किसी को रुला पाऊँगा जहाँ मेरे हाथ मेह्फूस होंगे मेरी रूह की आवाज से। नही तो मैं तो ख़ुद बहुत मस्त हूँ। पर वक्त मुझे भी संजीदा बना देता है। कई बार बच्चा सा बन जाता हूँ मैं भी इस भरी उम्र में। ये सब वक्त का कमाल ही तो है।

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline Ramesh Ramnani

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      • Sai Baba
    Re: कुछ अटपटे कुछ हटकर ख्याल।।
    « Reply #36 on: February 26, 2008, 07:57:37 AM »
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  • ॐ साईं राम~~~

    कल क्या होगा किसको पता,
    अभी ज़िन्दगी का लेलो मज़ा~~~  :) :) :)

    जय साईं राम~~~


    जय सांई राम।।।

    मैं भी किसी ना किसी बहाने बस यही तो कहता रहता हूँ। मेरा अथक प्रयास भी यही रहता है कि लोग समझें इस छोटी की ज़िन्दगी की सार्थकता को और जी ले इस ज़िन्दगानी को हंसते हंसते क्योकि किसको क्या मालूम फिर कल हो ना हो। क्यों है ना?  पर इतना ध्यान रखना मज़े मज़े और ऐश मे कंही ज़िन्दगी Ash ना बन जाये। 

    नफरत की हर गली से निकलने की बात कर
    तू प्यार वाली राह पे चलने की बात कर

    माना की हर तरफ ही अँधेरी है ज़ोर की
    उसका न कर ख़याल संभलने की बात कर

    आयी हुई मुसीबतें जाती कभी नहीं
    ऐसे सभी ख़याल कुचलने की बात कर

    चेहरे पे हर घड़ी ही उदासी भली नहीं
    ये खुरदरा लिबास बदलने की बात कर

    आएगी अपने आप ही चेहरे पे रौनकें
    बाबा के मन्दिर में दीप की तरह जलने की बात कर

    बाबा के मन्दिर में दीप की तरह जलने की बात कर....

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline Ramesh Ramnani

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      • Sai Baba
    जय सांई राम।।।

    कभी-कभी क्यों हम उन लोगों को गलत मान लेते हैं, जिनका कोई कसूर नहीं होता......
    और कभी कभी क्यूँ हम उन्हीं से दूरियाँ बना लेते हैं, जिन्हें कभी हम अपना मानते थे.......
    कभी कभी क्यों हम उन्हीं से नज़र भी नहीं मिला पाते, जिनकी नज़रों में कभी हम अपने आप को देखा करते थे......
    और कभी कभी क्यों हम उनसे मिलना भी नहीं चाहते, जिनसे कभी हम मिलने के बहाने तलाशते रहते थे....
    कभी कभी क्यों हम अपने दिल का दर्द उन्हें बता नहीं पाते, जिनके दिल में कभी हम रहते थे.....
    और कभी कभी क्यों हम इतने "पत्थर दिल" हो जाते हैं...की किसी का दिल उसी पत्थर दिल से तोड़ देते हैं......

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline nimmi_sai

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      • Sai Baba
    sai ram ....

    very well said !!!!!!!   thats y it is said ..........   An encouraging word to someone who is down can encourage them to achieve their goal.
    2. A destructive word to someone who is down can have negative effects. Be careful of what u say ….
    we should never ever hurt anyone as baba is watching everything ....
    om  sai ram .....



    Surrender your problem entirely to God.
    Be humble.
     Forgive all your enemies.
    Have faith. Do not doubt.
    Thank God in advance and praise Him.
    Pray from the heart.
    om sai shri sai jai jai sai
    Nimmi

    Offline Ramesh Ramnani

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    जय सांई राम।।।

    यह जरूरी नहीं कि जीवन की हर वस्तु या प्रसंग के दो पहलू हों - रात और दिन की तरह। जीवन का इतना सरल विभाजन कई स्तरों पर तो है, लेकिन हर जगह इसे ढूंढना गलत होगा। हमने अपनी सुविधा के लिए दो पहलू जरूर बना लिए हैं, पर चीजें उन्हीं में सिमटी नहीं। ऐसा नहीं है कि जीवन में या तो सुख है या फिर दुख, सच है या फिर झूठ।

    असल में सुख और दुख के बीच की भी एक अवस्था है। इसी तरह सच और झूठ के बीच भी कोई स्थिति है। इनके बीच एक रेखा है जो स्थान, समय और व्यक्ति की समझ और सोच के मुताबिक धुंधली तथा गहरी होती रहती है। इसी तरह निर्णय और अनिर्णय के बीच की भी एक दशा होती है, जिसमें अधिकतर लोग फंसे रहते हैं। 'बिटविन द लाइंस' की अवधारणा इसी के कारण पैदा हुई है। यानी अर्थ और अनर्थ के बीच तथा कहे और अनकहे के बीच अभी बहुत कुछ है, जिनका सामने आना बाकी है। संभव है, प्रकट और अप्रकट के बीच की किसी अवधारणा में हमें भावी जीवन के कई अहम सूत्र मिल जाएं। हो सकता है अब तक जो अपरिभाषित है, उसी में हमें अपने समय की कोई परिभाषा मिल जाए।

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।। 
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline Ramesh Ramnani

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    जय सांई राम।।।

    जो मांगोगे वही मिलेगा......कल्प वृक्ष की परिकल्पना

    हमने कल्पना की की स्वर्ग में कल्प वृक्ष होंगे,  उनके नीचे आदमी बैठेगा। इच्छा करेगा,  करते ही इच्छा पूरी हो जायेगी। लेकिन अगर आपको कल्प वृक्ष मिल जाये, तो बहुत सम्हलकर उसके नीचे बैठना। क्योंकि आपकी इच्छाओं का कोई भरोसा नहीं है।
    मैंने एक कहानी सुनी है। एक दफा एक आदमी -  हमारे -आपके ही जैसा एक आदमी - भूल से कल्प वृक्ष के नीचे पंहुच गया। उसको पता भी नहीं था कि यह कल्प वृक्ष है। उसके नीचे बैठते ही उसको लगा कि बहुत भूख लगी है:  अगर कहीं भोजन मिल जाता तो...। वह एक दम चौंका,  एक दम भोजन की थालियाँ चारो तरफ आ गईं। वह थोड़ा डरा भी कि यह क्या मामला है,  कोई भूत प्रेत तो नही है यहाँ!  कहीं यहाँ कोई भूत प्रेत न हो! उसके ऐसा सोचते ही -  भोजन की थालियाँ गायब हो गईं, भूत प्रेत चारों ओर खडे हो गए। वह घबराया! यह तो बडा उपद्रव है कोई गला न दबा दे!  भूत प्रेतों ने उसका गला दबा दिया।

    आपको अगर कल्प वृक्ष मिल जाये तो भाग जाना,  क्योंकि आपको अपनी इच्छाओं का कोई पक्का पता नहीं की आप क्या मांग बैठेंगे। क्या आप के भीतर से निकल आएगा। आप झंझट में पड़ जायेंगे, वहां पूरा हो जाता है सब कुछ ................................. ।

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।। 
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline Ramesh Ramnani

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    जय सांई राम।।।

    बातें कितनी अच्छी होती हैं। समंदर की बातें करिये और आप समंदर किनारे पहुंच जाते हैं। बर्फ़ की बातें करिये और दिमाग़ पैरों तले बर्फ़ की सफ़ेद चादर बिछा देता है। रेत की बात छिड़े तो रेगिस्तान के थपेड़े महसूस होने लगते हैं। बातें, दिमाग़ और शब्द मिलकर सेकेंट के सौवें हिस्से से भी कम समय में आपको भारत से अमेरिका पहुंचा सकते हैं। बातों के ज़रिये उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव जाने में सेकेंड का कौन सा हिस्सा लगेगा, ये मापा भी नहीं जा सकता। हैरी पॉटर भी अपनी जादुई छड़ी हिलाकर इतनी जल्दी हमें यहां से वहां नहीं भेज सकता। बातों-बातों में हम जाने क्या-क्या बातें कर जाते हैं। बहुत ऊंची-ऊंची बातें करनेवालों को बुद्धिजीवी फ़र्ज़ी ठहराते हैं। निंदा रस की बातों का मज़ा ही दूसरा होता है। बातें नहीं करते तो घुन्ने कहलाते हैं, बातें बहुत करते हैं तो कहते हैं कि बात बनाते हैं। कुछ लोग बहुत अच्छा बोलते हैं लेकिन दिल के बहुत कड़वे होते हैं। कुछ बहुत कड़वी बातें बोलते हैं मगर दिल के बहुत अच्छे होते हैं। बातों से हम कितना बंधे हैं। अगर कोई अपना साथ छोड़ चला जाता है तो सबसे ज्यादा बातों की ही तो कमी खलती है, न मुलाक़ात होगी, न बात होगी। बातें ही तो हैं जिस पर ज़िंदगी चलती है।

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

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    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline Ramesh Ramnani

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      • Sai Baba
    जय सांई राम।।।

    Nice one J
     
    This is very interesting..........(to women) please take time to ponder........(to men) enjoy the story........

    Young King Arthur was ambushed and imprisoned by the monarch of a neighboring kingdom. The monarch could have killed him but was moved by Arthur's youth and ideals. So, the monarch offered him his freedom, as long as he could answer a very difficult question. Arthur would have a year to figure out the answer and, If after a year, he still had no answer, he would be put to death. The question was: What do women really want?

    Such a question would perplex even the most knowledgeable man, And to young Arthur, it seemed an impossible query. But, since it was better than death, He accepted the monarch's proposition to have an answer by year's end.

    He returned to his kingdom and began to poll everyone: The princess, the priests, the wise men, and even the court jester. He spoke with everyone, but no one could give him a satisfactory answer. Many people advised him to consult the old witch, For only she would have the answer. But the price would be high as the witch was famous through out the kingdom for the exorbitant prices she charged.
     
    The last day of the year arrived and Arthur had no choice but to talk to the witch. She agreed to answer the question, but he would have to agree to her price first.

    The old witch wanted to marry Sir Lancelot, The most noble of the Knights of the Round Table, And Arthur's closest friend! Young Arthur was horrified. She was hunch-backed and hideous, had only one tooth, Smelled like sewage, made obscene noises, etc.

    He had never encountered such a repugnant creature in all his life. He refused to force his friend to marry her and endure such a terrible burden.

    But Lancelot, having learnt of the proposal, spoke with Arthur. He said nothing was too big of a sacrifice compared to Arthur's life. And the reservation of the Round Table. Hence, a wedding was proclaimed and the witch answered. Arthur's question thus: "What a woman really wants?"

    She said, "Is to be in charge of her own life."

    Everyone in the kingdom instantly knew that the witch had uttered a great truth. And that Arthur's life would be spared.

    And so it was.

    The neighboring monarch granted Arthur his freedom.

    And Lancelot and the witch had a wonderful wedding.

    The honeymoon hour approached and, Lancelot, steeling himself for a horrific experience, entered the bedroom.

    But, what a sight awaited him.

    The most beautiful woman he had ever seen lay before him on the bed.

    The astounded Lancelot asked what had happened.

    The beauty replied that since he had been so kind to her when she appeared as a witch, She would henceforth be her horrible and deformed self only half the time. And the beautiful maiden the other half.

    "Which would you prefer? She asked him. "Beautiful during the day .... or at night?"

    Lancelot pondered the predicament.

    During the day he could have a beautiful woman to show off to his friends, But at night, in the privacy of his castle, an old witch!

    Or,

    Would he prefer having a hideous witch during the day?

    But by night a beautiful woman for him to enjoy wondrous, intimate moments with?

    (If you are a man reading this...) What would YOUR choice be?

    (If you are a woman reading this) What would YOUR MAN'S choice be?
    What Lancelot chose, is given below:

    BUT... make YOUR choice before you scroll down below... OKAY?
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    Noble Lancelot, knowing the answer the witch gave Arthur to his question, He said that he would allow HER to make the choice herself.
     
    Upon hearing this, she announced that she would be beautiful all the time. Because, he had respected her enough to let her be in charge of her own life.
    Now... what is the moral to this story?



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    The moral is...
    1) There is a witch in every woman no matter how beautiful she is!
    2) If you don't let a woman have her own way, things are going to get ugly.           

    So, always remember:

    IT'S EITHER "HER WAY" OR IT'S "NO WAY"

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

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    जय सांई राम़।।।

    चुप रहने से क्या होता है
    जीना आसान हो जाता है
    इसलिए हम चुप हैं
    क्योंकि चुप रहने से
    रहना आसान हो जाता है
    जिंदगी की सारी पेंच
    सुलझ जाती है
    और जिंदगी काटना आसान हो जाता है!

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

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    जय सांई राम़।।।

    एक आदमी
    घर में पालने के लिये
    कुत्ता खरीदने बाजार आया
    कुत्तों के मालिक ने उसे
    अपना पूरा संग्रहालय दिखाया
    आदमी को एक छोटे से
    पिल्ले पर आ गया प्यार
    कीमत चुका कर
    उसे ले जाने को
    हो गया तैयार
    चलते समय पिल्ले ने
    बड़े ही मान और दुलार से
    अपनी मां को
    चाटा और सहलाया
    मां की आंखों की कोरों में
    पानी भर आया
    अपने मन पर काबू रख कर
    उसने पिल्ले को समझाया
    बेटे जा रहे हो..
    अलविदा...
    लेकिन याद रखना
    जिस किसी का भी नमक खाना
    उसे दगा मत देना
    उसका अहित मत करना
    अपने मालिक का
    आजीवन साथ निभाना..
    हर कीमत पर
    सदैव अपना पशु धर्म निभाना..
    लेकिन खबरदार...
    आदमी के साथ रहते-रहते
    आदमी मत बन जाना..

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

     


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