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Author Topic: अपने मन का साई  (Read 118588 times)

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Offline PiyaSoni

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  • ੴ ਸਤਿ ਨਾਮੁ
Re: अपने मन का साई
« Reply #105 on: July 02, 2011, 12:52:50 AM »
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  • OMSAIRAM

    VRY TRUE , JST KEEP ON HOLDING BABA'S LOTUS FEET  WITH FULL FAITH AND PATENICE ...

    BOW TO SHRI SAI ....PEACE BE TO ALL

    SAI SAMARTH.......SHRADDHA SABURI
    "नानक नाम चढदी कला, तेरे पहाणे सर्वद दा भला "

    Offline Pratap Nr.Mishra

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #106 on: July 03, 2011, 01:11:59 PM »
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  •  
    मैंने गलती से ये पोस्ट Spiritual  Discussion room मे करने  की बजाये  Welcome section मे कर दिया था .
    मै इसे फिर से दुबारा पोस्ट कर रहा हू चर्चा के लिए

    साईं राम

    रविजी नमस्कार ,

    अपने मन के साईं मे 5th January 2008 को एक बहुत ही सुंदर ओर महत्पूर्ण लेख "मिलकर करे एक अच्छा और नेक काम " लिखा था .

    मै आज आपके  लेख को बहुत ही ध्यान  से पढ़ा ओर समझने की कोशिस भी की है. आपने अपने पहले अनुच्छेद (पेराग्राफ ) मे जो भी विचार
    रखे है  सब  सच की पराकाष्टा को छुते है.  मै आपके विचारो से पूर्णता सहमत हु .  हमलोग साईं प्रेमी साधारणता : जेसा आपने अपने लेख मे
    संबोधित किया है प्रतिदिन कार्यप्रणाली का ही अनुसरण करते है. वेहस्पतिवार  को जो श्री साईंनाथ का वार है हमलोग प्राय :मंदिर जाके कुछ भोग
     वितरण कर देते है , कुछ दान दान पेटी या बाबा के चरणों मे चड़ा देते है ओर कुछ पैसे भिखारियों को दान मे दे  देते है . बस सम्पूर्ण हो जाती है
    अपनी भक्ति ओर बाबा के प्रति जिमेदारिया . सप्ताह के बाकि दिनों मे हमारे अन्दर का साईं प्रतीक्षा करता रहता है की मुझे कोई याद करे ओर
    फिर मायूस होके अगले वेहस्पतिवार का इन्तेजार करने लगता है. इन ६ दिनों मे प्राय:हम ना कोई भूखे  को खाना देते है ना ही भिखारी को दान
     उलटे दुत्कारके भगा देते है.छमा करियेगा मै किसी भी साईं प्रेमी को  व्यक्तिगत रूप से कोई भी दोषारोपण नहीं कर रहा हु क्योकि मै भी आपके ही
    समाज का एक हिस्सा हु . केवल वही कह रहा हु जो प्रतिदिन देख रहा हु . आम तौर पर प्राय :कोई भी बाबा के विचारो ओर उनके वचनों को पालन
    करने या फेलाने  का प्रयास नहीं कर रहा है आपतु  बाबा के नाम का सहारा लेके गलत-गलत भ्रांतियों को पहलने मे आपनी पूरी शक्ति  लगा रहे है.
    बाबा के नाम से अप्भ्रन्तिया,अंधविश्वास ,अविचार , द्रव्य उपार्जन व नाना प्रकार के कार्य जो कही भी बाबा के वचनों ओर विचारो से मेल नहीं कहते
    समाज मे फेला रहे है . प्राय::सभी बाबा के भक्त कहलाने मे आपनी शोभा ओर सम्मान समझते  है पर  भक्त की क्या नैतिक ,अधत्यामिक , सामाजिक
     जिमेदारिया होती है  सम्पूर्णता प्राय: भूल ही जाते है. बाबा के  अनमोल वचनों ओर विचारो को यदा -कदा कोई सम्मलेन के मंच पर , भजन संध्या ,
    मंदिर उत्सव  या साईं समाज मे अवश्य बोला जाता है ओर बहुत ही गंभीरता से वर्णन भी किया जाता है पर रोज की दैनिक वेवहार मे वचन ओर विचार
    अछूते ही रह जाते है.  भक्त कहलाना मुझे भी शोभा ओर सम्मानित लगता है पर मै  अभी  केवल सेवक की ही योग्यता रखता हु भक्त की नहीं .ना मै
    अभी एक भक्त की तरह सम्पूर्ण रूप से खुद को बाबा को समर्पित ही कर पाया हु ना ही सम्पूर्णता उनके वचनों ओर विचारो का ही पालन कर सका हु . 
    मै अभी भी नाना प्रकार  की व्याधियो से  ग्रषित हु .अहंकार,लोभ ,लालच, घृणा ,परनिंदा ,परचर्चा इत्यादि नाना प्रकार की कुरितियो का शिकार हु .
    ऐसा नहीं है की मै इनसे छुटकारा  पाने की कोशिस ही नहीं कर रहा हु . पर मुझे विश्वास है की बाबा मेरे एक ना एक दिन मेरे सभी विकारो का नाश
    करेगे . उसदिन ही मै एक भक्त के श्रेणी मे आने की योगता आर्जित करूंगा . बाबा ने मुझे सोते हुये से जगा दिया है ओर मै बाबा का सदा के लिए
     ऋणी हु. मै भली-भात जनता हु ओर समझता हु की मेरे प्रयास  से अगर एक भी साईं प्रेमी लाभान्वित होता है तो मेरा मेरे गुरु को ये सबसे बड़ी पूजा होगी .

    मै एक अज्ञानी हु जो अभी भी अज्ञानता के अन्धकार से निकलने की कोशिस कर रहा है. सागर से भी गहरे बाबा के वचन ओर विचार है . मै मूर्ख
    अभीतक केवल चंद कुछ बुँदे ही संचित कर सका हु.

    वेसे रविजी कुछ दिन पहले मैंने भी इसी फोरम मे आपके  विचारो  से प्राय : मिलते जुलते कुछ ऐसे ही विचार मैंने भी रखने की कोशिस की थी पर
    हमेहा की तरह फिर ना कोई सकारात्मक ओर ना ही नकारात्मक उतर प्राप्त हुआ . शायद बाबा ने मुझे अभी उपयुक ही ना समझा हो . मुझे अभी
    ओर भी परिक्षाये देनी बाकी है.

    रविजी आपने अपने दुसरे अनुच्छेद   मे पूछा है की कोनसे दो  नेक काम मेने आज किये है .:

    प्रथमता: इस फोरम के माध्यम से आज शायद पहली बार बिना हिचक के मैंने बाबा को नहीं बाबा की बताने की कोशिस की है  ओर बाबा की कृपा से
    मै काफी हदतक अपनी बाते  कह सका हु.

    द्वितीय  आज मेने फोरम के माध्यम से जानकारी हासिल की है ओर उसके  बाद एक संकल्प लिया है की मै अपनी छमता के तेहत गुप्त -रूप से किसी की  सहायता करूगा .वेसे भी मै कोन हु जो किसी की सहायता कर सकू. ये बाबा ही है जो खुद ही प्रेरणा देते है ओर खुद ही कार्य करते है . कर्ता बाबा खुद ही है मै तो केवल एक माध्यम हु.

    अंत: मे आज हमेशा की तरह छमा-याचना  नहीं मांगूगा कारण आज मेरे मन के साईं ने कहा की तूने  सच कह कर किसी का दिल नहीं दुखाया है पर
    हाथ जोड़ कर निवेदन अवश्य करूँगा की बाबा के अनमोल वचनों ओर विचारो को ही केवल ओर केवल ग्रहण करना चाहिए . हम अगर 5% भी
    बाबा के वचनों का अनुसार चल सके तो भी ये समाज साईं-साईं हो जायेगा .

    साईं राम




    दुर्लभ मानुष जनम है,देह न बारम्बार |तरुवर ज्यो पत्ती झड़े, बहुरि न लागे डार ॥आय हाय सो जाएँगे,राजा रंक फकीर। एक सिंघासन चिढ़ चले,एक बँधे जात जंजीर ॥

    Offline Pratap Nr.Mishra

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    • राम भी तू रहीम भी तू तू ही ईशु नानक भी तू
    Re: अपने मन का साई
    « Reply #107 on: July 03, 2011, 01:31:36 PM »
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  • मैंने गलती से ये पोस्ट Spiritual  Discussion room मे करने  की बजाये  Welcome section मे कर दिया था .
    मै इसे फिर से दुबारा पोस्ट कर रहा हू चर्चा के लिए


    साईं राम  साईं राम  साईं राम  साईं राम  साईं राम साईं राम साईं राम साईं राम साईं राम साईं राम साईं राम
      तनु बहन

    सर्वप्रथम बाबा को बहुत-बहुत धन्यबाद जो साईं बंधुयो के साथ साथ गुरु बहन भी मुझे दे दिया. अब मै बिना संकोच
    के बहन से विचारो का आदान -प्रदान बड़ी सहजता और सरलता से कर सकता हू.  तनुजी जिस सरलता ,सहजता और
     धैर्यपूर्वक आपने राकेशजी के प्रश्नों का दो दिनों तक सामना किया उसके किये बहुत-बहुत धन्यबाद . आखिर सकारात्मक
     वाद-विवाद से राकेशजी को उनके प्रश्नों के उतर भी मिल गए. अगर आपने राकेशजी के टापिक को फिर से ना खुलवाने
    की इच्छा रखी होती तो शायद आप अपने को माफ़ नहीं कर सकती .

    तनु बहन आपने बहुत ही सुंदर भाषा और सुंदर तरीके से  हर बात को अपने पोस्ट मे कहा है. मै और शायद सभी आपकी
    बातो से सहमत होंगे . भक्त की योग्यताये ,भक्त का इष्ट के प्रति विश्वास और पूर्णता  समर्पण सभी बातो का अपने बहुत ही
    सरलता से वर्णन किया है. पर जो प्रश्न  मैंने किये  थे  वो अभी भी अपने मूल्य स्थान  पर ही  भी कायम है .
    प्रश्न ये थे  कि ;
     क्या बाबा के नाम का साहारा लेके जो अप्भ्रन्तिया ,अंधविश्वास .द्रव्य उपार्जन का कार्य और नाना रकम के कुप्रचार चल रहे
     है ,उनका क्या खंडन किया जाये या बाबा पर ही छोड़ दिया जाये ?

    क्या छोड़ देने पर हमारी गुरु के प्रति जो जिमेदारी है वो ख़तम हो जाती है ?

    क्या एक अनुयाई होने के नाते हमारा कर्तव् नहीं बनता कि गुरु के सही वचनों और विचारो को ही फेलने या फेलाने मे सहयोग करे ?

    क्या उनके द्वारा दी गई शिक्षा का कोई मोल नहीं अगर गलत शिक्षा का विरोध ना करके केवल इन्तेजार ही करे ?

    क्या चुप रहने या तमाशबीन बनके रहने पर हम प्रतक्ष या अप्रतक्ष अपने गुरु की शिक्षा की  अवहेलना नहीं कर रहे है?

    क्या केवल ये कहकर की बाबा खुद ही सब देखेगे तो बाबा ने क्यों  ये अनमोल वचनों को कहे और उनको अनुसरण करने को कहा ?
    क्या केवल बाबा के वचन अब बड़ी-बड़ी सभायो, साईं संध्याओ ,साईं संस्थानों तक ही सिमित रह गए है. ?

    ऐसे ना जाने कितने प्रश्नों का सामना हम साईं प्रेमियों के अंदर बेठा हुआ साईं हर रोज हमसे करता  है पर हम चुप रहते है क्यों की
    हम अभी भी साईं के विचारो की महानता से अनजान  है.  कही ना कही एक डर है जो हमें अंदर के साईं की आवाज को सुनके भी
    अनसुनी करनेको मजबूर कर देता है.सच को कहने से कही अन्य साईं बंधू अपने को आहत ना महसूस करे , कही किसी की श्रधा
    को  ठेस नहीं पहुचे  इत्यादि नाना प्रकार की विचारो का मन मे एक पहाड़ खड़ा कर लिया है हमलोगों ने .

    बाबा ने  श्रधा और सबुरी का पाठ पढाया है . उन्होंने विनर्मता ,परोपकारिता ,सेहंसिलता और सदाचार का पाठ  पढाया है . जब कोई
     भी अज्ञानता के चलते अगर गलत रह पर कदम उठा रहा है तो क्या बाबा की शिक्षा के अनुसार उसको सही मार्ग नहीं दिखलाना चाहिए .
    हम अपने माता-पिता जो प्रारंभिक गुरु होते है अगर कोई उनका या उनकी शिक्षा का अनादर करता है तो हमलोग क्या करते है ? क्या
    मूक रहते है या फिर उसका खंडन करते है . यहाँ तो सदगुरु साईनाथ के वचनों और विचारो की बात है.  अहंकार से भरा हुआ ज्ञान
    अंधकार का हरन नहीं कर सकता वहा  अहंकार शुन्य ज्ञान  प्रकाश पुंज की भात है जिसके फेलते ही अंधकार का नाश हो जाता है .

    मेरा ऐसा मानना है बाबा ने सभी को  शिक्षा दी  है और उसके अनुयाई होने के नाते हमें केवल और केवल उनके वचनों और विचारो को
     ही आत्मसात करना चाहिए नाकि भ्रांतियों को फेलने या फेलाने मे मदत .मै सभी के विचारो का आदर और सम्मान करता हू .

    तनु बहन ये एक मूल समस्या है जो धीरे-धीरे फेलती जा रही है. इस मंच का सही प्रयोग करके आप, रविजी ,सैब्जी ,रमेश रामनानीजी
    एवंग और भी सदश्य इसके समाधान का मार्ग निकाल  सकते है. आपलोगों के लेख ,विचार और कहानिंया मेने पढ़ी है जिससे आपलोगों
     की लेखनी की ताकत का अंदाजा मिलता है . आपलोगों की हर एक बात सीधे दिल और दिमाग को छुती है.

    मेरे विचारो से आपलोग अगर छुब्ध है या महसूस करते है तो अवश्य बताने का कष्ट करियेगा कारण फिर मै बाबा से किसी नई मंजिल की
    प्राथना करूंगा जहा जो मेरे मन के साईं कह रहा है उसको कर सकू.

    साईं राम

     
    "जब लग नाता जगत का,तब लग भक्ति न होय | नाता तोड़े हरि भजे , भगत कहावे सोय ||
     

    Offline poojavivek

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #108 on: November 07, 2011, 01:54:34 AM »
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  • APNE BILKUL SHI LIKHA HAI, ROZ MANDIR ME JANAE SE BHAGVAN KI PUJA KARNAE SE HI SAB KUCH NHI HOTA. JO GYA VO HUMKO DETAE HAI USKO APNI ZINDGI ME UTARNA HI UNKI PUJA HAI.  KAI LOG HOTAE HAI JO KBHI KBHI DUSRO KO GALI DETAE HAI AGAR KOI GARIB UNSE KUCH MANGTA HAI TO VO USKO KUCH NA DEKAR GALIYA DETAE HAI. MERE ANUSHJAR AGAR AP KUCH DE NHI SAKATE TO USKO KUCH APSABD BHI BOLNE KA HAK BHI NHI RAKHTAE HUM, KAHTAE HAI HER GARIB KE VO BASTA HAI . MERA SOCHNA HAI AGAR AP KBHI BHI KISI KO KISI GARIB YA JANVAR PAR ABSABD USE KARATE HUAE DEKHAE , TO USKA VIRODH KARE NA KI VHA SE SUN KAR CHLAE JYE. MAIN HUMESHA YE SOCHTI HU EK GARIB KI DUA HI KAM KARI HAI :) :) :) :) :)OM SAI RAM :) :) :) :) :)

    Offline SANJAYA KAPOOR

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #109 on: May 02, 2013, 05:41:09 AM »
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  • MERE SAI BADE HI REHAMDIL, MERE BABA BADE HI REHAMDIL.
    JO SAI KA JAAP KARE, SAI USKE PAAP HARE,
    JO SAI KO DHYATA HEI, SAARI KHUSHIYAN PATA HEI,
    JO SAI KI PUJA KARE,SAI USKE DUKH DOOR KARE,
    BHARI SE BHARI SANKAT BHI PAL ME JATA TAL,
    MERE SAU BADE HI REHAMDIL,MERE BABA BADE HI REHAMDIL.
    JAI SAI RAM,JAI JAI SAI RAM, JAI JAI JAI SAI RAAAAAAM.

    Offline saiarvind3

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #110 on: December 27, 2013, 05:25:17 AM »
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  • Nice Post Jai Sai Baba Ji ki

     


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