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Author Topic: अपने मन का साई  (Read 118604 times)

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Offline Ramesh Ramnani

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Re: अपने मन का साई
« Reply #15 on: January 29, 2008, 08:05:56 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    मेरे मन के सांई की आज की आवाज़.....

    अगर  चाहते  हो  जीवन  में  मिले  सफलता  का  सिंहासन...
    मर्यादा   में रहना  सीखो,  करो  सदा  पालन  अनुशासन....
       
    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline Apoorva

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #16 on: January 30, 2008, 01:41:07 PM »
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  • आदरणीय रमेश जी,
    आपकी साडी बातें इतनी अच्छी लगती है कि मन करता है कि बस सुनते जाओ | यह सत्य है कि हम सभी जानते है कि क्या सही है क्या ग़लत है, पर उसको भूल जाते है | मैं तो आपके लिये बालक ही हूँ पर फ़िर भी यह कहूँगा आप हम सभी के लिये एक सच्चे मार्गदर्शक है |
     
    मेरे मन का साईं कहता है, भूखे को भोजन दो मेरा पेट भरेगा,
    जरूरतमंद कि मदद करो, मुझे तुम्हारी दक्षिणा मिल जायेगी |
    गुरुर्ब्रम्हा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वराः |
    गुरुः साक्षात्परब्रम्ह तस्मै श्रीगुरवे नमः ||

    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #17 on: February 14, 2008, 08:47:55 AM »
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  • आदरणीय रमेश जी,
    आपकी साडी बातें इतनी अच्छी लगती है कि मन करता है कि बस सुनते जाओ | यह सत्य है कि हम सभी जानते है कि क्या सही है क्या ग़लत है, पर उसको भूल जाते है | मैं तो आपके लिये बालक ही हूँ पर फ़िर भी यह कहूँगा आप हम सभी के लिये एक सच्चे मार्गदर्शक है |
     
    मेरे मन का साईं कहता है, भूखे को भोजन दो मेरा पेट भरेगा,
    जरूरतमंद कि मदद करो, मुझे तुम्हारी दक्षिणा मिल जायेगी |


    जय सांई राम।।।

    खुशामदीद मेरे भाई अपूर्वा!  ये तो तुम्हारा बढपन है कि तुम ऐसा महसूस करते हो!  दोस्त तुम बिलकुल सही कह रहे हो!  भारतीय होने के नाते बचपन से हम ना जाने कितने संस्कार अपने बड़े बुर्ज़गों से सीखते है! ना जाने कितने आर्दशों की कहानियाँ किस्से सुनते है लेकिन पर जब उनपर चलने, अमल करने की बात आती है तो हम सब भूल जाते है और ऐसे आगे बढ़ जाते है मानो वो आर्दश हमारे लिये नही किसी ओर के लिये कहे गये हो!

    मेरे मन के सांई का आज का संदेश -  कभी ज़िन्दगी में किसी के लिये मत रोना.....क्योंकि वो तुम्हारे आंसूओं के काबिल नही होगा....और वो जो इस काबिल होगा.....वो तुम्हें कभी रोने नही देगा.....
       
    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
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    Offline meghadeep

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #18 on: February 18, 2008, 04:42:50 AM »
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  • Lab pe aati hai duaa ban ke tamanna meri........
    Jindagi shamma ki surat ho khudaya meri.........

    ho Mera kaam garibon ki himayat karna..........
    dardmando se zaifon se muhabbat karna.........

    mere baba 2.........Burai se bachana mujhko.......
    nek jo rah ho us reh pe chalana mujhko.........

    mere baba ...........her burai se bachana mujhko.........
    nek jo rah ho us reh pe chalana mujhko.........

    Dur Duniya ka tere dam se andhera ho jaaye...........
    her jagha tere chamekne se Ujaala ho jaaye.........

    Ho tere dam se yunhi mere watan ki zinat........
    Jis tarha phool se hoti hai chaman ki Zinat.........

    mere baba ...........her burai se bachana mujhko
    nek jo rah ho us reh pe chalana mujhko

    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #19 on: February 24, 2008, 12:20:15 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    आज एक बार फिर मेरे मन के सांई ने मुझसे कहा - रूक जाओ

    बस रूक जाओ.  अभी. यहीं.  इसी वक्त.  एक क्षण आगे नहीं.  एक क्षण पीछे नहीं.  इसी घड़ी में इसी क्षण में रूक जाओ. अपने शरीर को स्थिर कर दो.  जड़वत.  शरीर का कोई हिस्सा हिलना नहीं चाहिए. तनिक भी नहीं.  हाथ जहां हैं रहने दो.  पैर जहां हैं वहीं रोक दो.  आंखें खुली हैं तो खुली ही रखना.  पुतलियों को रोक दो.  शरीर जिस हालत में है रहने दो. यह मत देखना कि यह टेढ़ा है तो थोड़ा सीधा कर दें. यह मत देखना कि थोड़ी रीढ़ की हड्डी सीधी कर लें. टेढ़े-मेढ़े आड़े-तिरछे जैसे हो वैसे ही स्थिर हो जाओ. थोड़ी देर उसी अवस्था में मन को अपने शरीर के साथ मिलाने की कोशिश करो. मन को अनुभव करो. सांस को अनुभव करो.

    तुम्हें अपूर्व शांति का अनुभव होगा. तुम्हारा मन स्थिर हो जाएगा. सांस लयबद्ध हो जाएगी. शरीर और मन में नयी ताजगी भर जाएगी. क्या अनुभव होगा यह तुम जानों लेकिन जो अनुभव होगा वह तुम्हारे जीवन में बहुत काम आयेगा. 

    ज्यादा नहीं. तीन-चार मिनट. ऐसे ही दिन में कई बार स्थिर होने का अभ्यास करो. जब याद आ जाए तो कर लेना. कोई नियम मत बनाना कि इतने बजे करना है. ऐसे करना है. बस जब याद आ जाए कर लेना. यात्रा करते हुए याद आ जाए तो कर लेना. बैठे-बैठे याद आ जाए तो कर लेना. चलते-चलते याद आ जाए तो कर लेना. कहीं किनारे खड़े हो जाना किसी अजनबी की भांति और बस वहीं थोड़ी देर के लिए स्थिर हो जाना. देखना दुनिया कैसे चल रही है और तुम कैसे स्थिर हो गये हो. धीरे-धीरे संसार का बहुत सारा रहस्य समझ में आने लगेगा.  अपने संकट और उनके समाधान भी समझ में आने लगेंगे.

    तुम इसका अभ्यास करना. धीरे-धीरे ध्यान की ओर बढ़ने लगोगे. मन को पकड़ना शुरू कर दोगे. क्योंकि अब मन समझ में आने लगेगा. उसकी गति समझ में आने लगेगी. और एक बार इसकी गति समझ में आने लगे तो सुख-दुख का भेद अपने आप मिटने लगता है. बहुत कुछ होने लगता है. बहुत कुछ…..
       
    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
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    Offline Dipika

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #20 on: February 24, 2008, 12:37:32 AM »
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  • Mere man ka Sai yeh kehtaa hai ki mein kissi ko dukh na do,kissi ko dokha na do,woh kaam  na karo jissey mere man ka Sai haan nahi kehtaa,mere dwaar se koi khaali haath na jai,mein kisi ke baddua na loo,Sach ki rah par sadaa chaloon................. :D :D

    ALLAH MALIK!


    Sai baba let your holy lotus feet be our sole refuge.OMSAIRAM
    साईं बाबा अपने पवित्र चरणकमल ही हमारी एकमात्र शरण रहने दो.ॐ साईं राम


    Dipika Duggal

    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #21 on: February 24, 2008, 05:59:07 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    जहाँ तक है तुम्हारी दृष्टि...वो सारा आकाश तुम्हारा है...क्षितिज भ्रम है...पर उस विस्तार तक, तुम्हे पहुचाना-मेरा लक्ष्य है...तुम्हारा बाबा

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।। 
    « Last Edit: February 24, 2008, 06:02:32 AM by Ramesh Ramnani »
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #22 on: February 25, 2008, 02:33:46 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    आज के मेरे मन के सांई की आवाज़.....

    चेहरे की हंसी से हर गम को छुपाओ
    बहुत कुछ बोलो पर कुछ ना बताओ
    खुद ना रूठो कभी पर सबको मनाओ
    ये राज़ है ज़िन्दगी का बस जीते ही जाओ।
     
    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
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    Offline R.K

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #23 on: March 09, 2008, 01:14:29 PM »
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  • मेरे मन का साई
    मेरे मन का साई मुझसे कहना चाहता हैं अगर कुछ कर सकते हो तो किसी के लिए कुछ एसा करो की किसी को मुस्कराहट मिल सके, अगर कर सकते हो तो किसी के आसू रोको, कम से कम किसी के दुःख का कारन तो मत बनो.


    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #24 on: March 16, 2008, 12:30:56 AM »
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  • मेरे मन का साई
    मेरे मन का साई मुझसे कहना चाहता हैं अगर कुछ कर सकते हो तो किसी के लिए कुछ एसा करो की किसी को मुस्कराहट मिल सके, अगर कर सकते हो तो किसी के आसू रोको, कम से कम किसी के दुःख का कारन तो मत बनो.


    जय सांई राम।।।

    आर के भाई स्वागत है आपका बाबा सांई के इस मनोरम मंदिर में।  बहुत खूब लिखा है आपने - किसी के आसू रोको,  कम से कम किसी के दुःख का कारण तो मत बनो।  अति सुन्दर.....

    हमेशा की तरह आज मेरे बाबा ने कहा कि

    तुम जलो तो साथ रौशन जाने कितने दीप होंगे

    तुम चलो तो हमकदम बन जाने कितने मीत होंगे

    आदमी को आदमी की नज़र से बस देखना

    जो मिलेंगे सच कहूँ 'मैं' वो बड़े विनीत होंगे
       
    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
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    Offline tana

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #25 on: March 17, 2008, 05:19:42 AM »
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  • ॐ साईं राम~~~

    आज मेरे मन का सांई....

    कुछ मौन पल चाहे~~

    खाली पन्नों पर
    अपने शब्दों से रंग भरना चाहे...
    उन शब्दों से सांई ही मूरत ही बन जाए...
    उन शब्दों के रंग भरते भरते सब कुछ सांईमय हो जाए,
    हम सब सांईमय हो जाए...
    हम सब सांईमय हो जाए...
    हम सब सांईमय हो जाए...

    जय सांई राम~~~



           
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
    Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

    May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
    May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #26 on: March 30, 2008, 07:34:08 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    आज बहुत दिन हो गये अपने मन के मीत की बात कहे...कुछ तरंगें उठीं मन में आज फिर और मन के मीत ने अपने मन को जीतने की कुछ रीत सुझाई। सोचा आपसे साझा कर लूँ....आईये विचारें ये चंद सुझाव जिन्हें आज के दौर में टिप्स कहने का चलन है - बाबा की टिप्स।

    एक ---- दूसरों को अपने विषय में बोलने दें।
    दो ----- दूसरों की रूचि की बात करें।
    तीन ----- दूसरों के महत्व को कम मत आँकें।
    चार ----- बहस से बचें,  समझ और सुझाव का मार्ग अपनाएं।
    पाँच----- कभी किसी को मुंह पर ग़लत न कहें।
    छः ------ दूसरों के सामने स्वयं की आलोचना की हिम्मत रखें।
    सात ----- कभी अपने मित्र को यह एहसास करायें कि कुछ मामलों में वह आपसे भी आगे निकल गया है।
    आठ ------ अपने मित्र को उसकी जगह पर स्वयं को रखकर समझने की कोशिश करें।
    नव -------- दूसरों की खासियत खोजें।
    दस -------- अपनी कमजोरियों से जी न चुराएं।

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई
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    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #27 on: April 03, 2008, 03:21:42 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    बाबा के मन्दिर के पत्थरों की दास्तान...

    कल मेरे मन के सांई मुझसे बोले कि तुम्हे मेरी शिरडी समाधि मन्दिर वाली मूर्ती कैसी लगती है मैने ज़वाब मे उतर दिया बाबा ये भी कोई पूछने की बात हुई।  ऐसी मनमोहक मूर्ती तो आज तक के किसी भी सांई मन्दिर की ना रही होगी। जब मै पहली बार १९९९ में शिरडी आया था तो आपकी इसी मूर्ती को देखने के पश्चात ही तो मैं आपका दीवाना बन गया था।  इस पर बाबा बोले सुनना चाहोगे मेरी इस मूर्ती के बनने की दास्तान। मै बोला बेशक बाबा बताओ ना।  इस पर बाबा ने मुझे यह कहानी सुनाई जिस पर अगर आप सब भी गौर करे तो यह हम सब पर बखूब लागू होती है।

    जानते हो जब यह समाधि मन्दिर भूटी महाशय बनवा रहे थे तो रोज की तरह जब रात को जब महलसपति महाराज मन्दिर का द्वार बंद करके घर चले जाते तों आधी रात को पत्थर आपस में बात किया करते थे। वह पत्थर जो फर्श पर थे, मेरी मूर्तिवाले पत्थर से अक्सर बोला करते थे,  'तुम्हारी भी क्या किस्मत है लोग हमें अपने पैरों से रौंदते हुए, जूते - चप्पलो से कुचलते हुए तुम्हारे पास आयेगें और तुम्हारे आगे श्रद्धा से हाँथ जोड़ खड़े होंगे। तुमको फूल-मालाये चढ़ायेंगे। काश हम भी तुम्हारी जगह होते, पर हम तों यंहा फर्श पर लेटे-लेटे दर्द से कराहते रहते है। वाह! किस्मत हो तों तुम्हारे जैसी।

    यह सुनकर मेरी मुर्तिवाला पत्थर बोला, 'भाई बात तों तुम ठीक कह रहे हो पर याद करो वो दिन जिस दिन मुझ पर छेनी और हथौड़ों से मुझे तराशा जा रहा था,  मैं उस चोट को बर्दाश्त करता रहता था,  तुम सब मुझपर हँस रहे होते थे, तरस खा रहे होते थे। अगर तुमने भी वैसी चोटे अगर अपने जिंदगी में खाई होती,  तों आज तुम भी यहाँ होते जहाँ मैं हूँ।

    अंत में बाबा ने कहा कि बच्चे ध्यान लायक बात यह है कि जिंदगी में कामयाबी बिना संघर्ष और बिना तकलीफों के किसी को नही मिलती, जो लोग इसे झेलते है सफलता उन्ही को मिलती है,  किस्मत पर कुछ भी नही छोडा जा सकता।

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
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    Offline tana

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #28 on: April 11, 2008, 09:04:17 PM »
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  • जय सांई राम।।।

    आज एक बार फिर मेरे मन के सांई ने मुझसे कहा - रूक जाओ

    बस रूक जाओ.  अभी. यहीं.  इसी वक्त.  एक क्षण आगे नहीं.  एक क्षण पीछे नहीं.  इसी घड़ी में इसी क्षण में रूक जाओ. अपने शरीर को स्थिर कर दो.  जड़वत.  शरीर का कोई हिस्सा हिलना नहीं चाहिए. तनिक भी नहीं.  हाथ जहां हैं रहने दो.  पैर जहां हैं वहीं रोक दो.  आंखें खुली हैं तो खुली ही रखना.  पुतलियों को रोक दो.  शरीर जिस हालत में है रहने दो. यह मत देखना कि यह टेढ़ा है तो थोड़ा सीधा कर दें. यह मत देखना कि थोड़ी रीढ़ की हड्डी सीधी कर लें. टेढ़े-मेढ़े आड़े-तिरछे जैसे हो वैसे ही स्थिर हो जाओ. थोड़ी देर उसी अवस्था में मन को अपने शरीर के साथ मिलाने की कोशिश करो. मन को अनुभव करो. सांस को अनुभव करो.

    तुम्हें अपूर्व शांति का अनुभव होगा. तुम्हारा मन स्थिर हो जाएगा. सांस लयबद्ध हो जाएगी. शरीर और मन में नयी ताजगी भर जाएगी. क्या अनुभव होगा यह तुम जानों लेकिन जो अनुभव होगा वह तुम्हारे जीवन में बहुत काम आयेगा. 

    ज्यादा नहीं. तीन-चार मिनट. ऐसे ही दिन में कई बार स्थिर होने का अभ्यास करो. जब याद आ जाए तो कर लेना. कोई नियम मत बनाना कि इतने बजे करना है. ऐसे करना है. बस जब याद आ जाए कर लेना. यात्रा करते हुए याद आ जाए तो कर लेना. बैठे-बैठे याद आ जाए तो कर लेना. चलते-चलते याद आ जाए तो कर लेना. कहीं किनारे खड़े हो जाना किसी अजनबी की भांति और बस वहीं थोड़ी देर के लिए स्थिर हो जाना. देखना दुनिया कैसे चल रही है और तुम कैसे स्थिर हो गये हो. धीरे-धीरे संसार का बहुत सारा रहस्य समझ में आने लगेगा.  अपने संकट और उनके समाधान भी समझ में आने लगेंगे.

    तुम इसका अभ्यास करना. धीरे-धीरे ध्यान की ओर बढ़ने लगोगे. मन को पकड़ना शुरू कर दोगे. क्योंकि अब मन समझ में आने लगेगा. उसकी गति समझ में आने लगेगी. और एक बार इसकी गति समझ में आने लगे तो सुख-दुख का भेद अपने आप मिटने लगता है. बहुत कुछ होने लगता है. बहुत कुछ…..
      
    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।


    ॐ सांई राम~~~

    आज मन का सांई बस यही चाह रहा है~~~~~~रूक जाऊं, थम जाऊं~~~~
    बाबा के प्यार में ऐसी रंगू की रंग कभी ना उतरे~~~~~~
    श्रद्धा का स्नान करके, सबुरी से तन मन रंग डालूं~~~

    जय सांई राम~~~

           
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    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

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    Offline Ramesh Ramnani

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      • Sai Baba
    Re: अपने मन का साई
    « Reply #29 on: April 21, 2008, 09:17:53 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    आज एक बार फिर मेरे मन के सांई ने मुझसे कहा - रूक जाओ

    बस रूक जाओ.  अभी. यहीं.  इसी वक्त.  एक क्षण आगे नहीं.  एक क्षण पीछे नहीं.  इसी घड़ी में इसी क्षण में रूक जाओ. अपने शरीर को स्थिर कर दो.  जड़वत.  शरीर का कोई हिस्सा हिलना नहीं चाहिए. तनिक भी नहीं.  हाथ जहां हैं रहने दो.  पैर जहां हैं वहीं रोक दो.  आंखें खुली हैं तो खुली ही रखना.  पुतलियों को रोक दो.  शरीर जिस हालत में है रहने दो. यह मत देखना कि यह टेढ़ा है तो थोड़ा सीधा कर दें. यह मत देखना कि थोड़ी रीढ़ की हड्डी सीधी कर लें. टेढ़े-मेढ़े आड़े-तिरछे जैसे हो वैसे ही स्थिर हो जाओ. थोड़ी देर उसी अवस्था में मन को अपने शरीर के साथ मिलाने की कोशिश करो. मन को अनुभव करो. सांस को अनुभव करो.

    तुम्हें अपूर्व शांति का अनुभव होगा. तुम्हारा मन स्थिर हो जाएगा. सांस लयबद्ध हो जाएगी. शरीर और मन में नयी ताजगी भर जाएगी. क्या अनुभव होगा यह तुम जानों लेकिन जो अनुभव होगा वह तुम्हारे जीवन में बहुत काम आयेगा. 

    ज्यादा नहीं. तीन-चार मिनट. ऐसे ही दिन में कई बार स्थिर होने का अभ्यास करो. जब याद आ जाए तो कर लेना. कोई नियम मत बनाना कि इतने बजे करना है. ऐसे करना है. बस जब याद आ जाए कर लेना. यात्रा करते हुए याद आ जाए तो कर लेना. बैठे-बैठे याद आ जाए तो कर लेना. चलते-चलते याद आ जाए तो कर लेना. कहीं किनारे खड़े हो जाना किसी अजनबी की भांति और बस वहीं थोड़ी देर के लिए स्थिर हो जाना. देखना दुनिया कैसे चल रही है और तुम कैसे स्थिर हो गये हो. धीरे-धीरे संसार का बहुत सारा रहस्य समझ में आने लगेगा.  अपने संकट और उनके समाधान भी समझ में आने लगेंगे.

    तुम इसका अभ्यास करना. धीरे-धीरे ध्यान की ओर बढ़ने लगोगे. मन को पकड़ना शुरू कर दोगे. क्योंकि अब मन समझ में आने लगेगा. उसकी गति समझ में आने लगेगी. और एक बार इसकी गति समझ में आने लगे तो सुख-दुख का भेद अपने आप मिटने लगता है. बहुत कुछ होने लगता है. बहुत कुछ…..
       
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    ॐ सांई राम~~~

    आज मन का सांई बस यही चाह रहा है~~~~~~रूक जाऊं, थम जाऊं~~~~
    बाबा के प्यार में ऐसी रंगू की रंग कभी ना उतरे~~~~~~
    श्रद्धा का स्नान करके, सबुरी से तन मन रंग डालूं~~~

    जय सांई राम~~~

           


    जय सांई राम।।।

    तेरा सफर ही मंजिल है तेरी...
    आ मुझसे गुजर तू...
    अपनी मंजिल को चला चल....

    आप सबको शायद कल के मेरे मन के सांई की कही बात में और आज के मेरे मन के सांई में विरोधाभास लगे लेकिन जब बात सांई की कही हो तो....

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

     


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