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Author Topic: अपने मन का साई  (Read 127503 times)

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Offline Ramesh Ramnani

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Re: अपने मन का साई
« Reply #45 on: June 06, 2008, 10:14:47 AM »
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  • जय सांई राम़।।।

    आज मेरे मन के सांई ने मुझसे कहा - Here is a top-10 list of positive emotions. I don't know whether you will find them in Sai Satcharitra or not because these were not needed in those days but now in present day context, they are needed more than anything else, you will find it's a pretty good list. See how many of these you can feel today.

    1. Joy/happiness
    2. Confidence/self-esteem
    3. Optimism/positive thinking
    4. Interest/curiosity
    5. Amusement/humor
    6. Contentment/serenity/tranquility
    7. Love/affection/warmth/caring
    8. Respect/positive regard
    9. Pride/satisfaction/achievement
    10. Gratitude/thankfulness

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline tana

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      • Sai Baba
    Re: अपने मन का साई
    « Reply #46 on: June 15, 2008, 04:33:25 AM »
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  • ॐ सांई राम~~~

    ओ,मेरे मन के सांई बस अब तूं सांई सांई बोल~~~

    सांई कृपा अनन्त है , सांई नाम अनमोल~~~
    जन्म सफल हो जाये गा, सांई सांई बोल~~~

    सांई सांई बोल~~~सांई सांई बोल~~~सांई सांई बोल~~~

    जय सांई राम~~~
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
    Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

    May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
    May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #47 on: July 21, 2008, 09:07:06 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    आज मेरे मन के सांई ने मुझसे कहा -

    अंधेर भरे जीवन में जलाने
    के लिए एक जोत लाया हू!
    मायूसी भरी आखो के लिए
    एक प्यारा -सा ख्वाब लाया हू!
    निराशा पूर्ण जीवन के लिए
    आशा के एक किरण लाया हू!|
    काली घनेरी अमावस्या की रात में
    पूनम का चाँद लाया हू!
    सूखे रेगिस्तान में आज
    पानी की फुहार लाया हू!
    आज मुसीबतों से भरे जीवन के लिए
    समाधानों का भंडार लाया हू!
    अशांत मन के लिए
    शान्ति भरा अहसास लाया हू!
    मै आज आपको आप मे
    जल रही आग से परिचित कराने आया हू!
    मै कोई और नही बल्कि आपके
    ही दिल की धड़कन हू जो आज
    आपके सामने आपका सांईसारथी बनकर आया हू!

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #48 on: August 02, 2008, 02:02:49 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    आज मेरे मन के सांई ने मुझसे कहा -

    जब दिल हो उदास
    बस आँखें बंद कर लेना
    और न हो कोई पास
    तो खुद से तुम कह देना
    बस आँखें बंद कर लेना
    देखो तुम यूँ न रोना
    अपनी प्यारी आँखें को
    आंसू में न डुबोना
    जब भी आये मेरी याद
    बस आँखें बंद कर लेना
    समझना मैं जानता हूँ तुम्हारा हाल
    मैं नज़र नहीं आता पर होता हूँ
    बिलकुल तेरे करीब तेरे ह्रदय में बसा सदा
    तुम मुझे अपना दर्द बता देना
    मत होना उदास
    बस आँखें बंद कर लेना

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline SaiServant

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #49 on: August 02, 2008, 03:58:41 PM »
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  • जय सांई राम।।।

    आज मेरे मन के सांई ने मुझसे कहा -

    जब दिल हो उदास
    बस आँखें बंद कर लेना
    और न हो कोई पास
    तो खुद से तुम कह देना
    बस आँखें बंद कर लेना
    देखो तुम यूँ न रोना
    अपनी प्यारी आँखें को
    आंसू में न डुबोना
    जब भी आये मेरी याद
    बस आँखें बंद कर लेना
    समझना मैं जानता हूँ तुम्हारा हाल
    मैं नज़र नहीं आता पर होता हूँ
    बिलकुल तेरे करीब तेरे ह्रदय में बसा सदा
    तुम मुझे अपना दर्द बता देना
    मत होना उदास
    बस आँखें बंद कर लेना

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।


    Dearest Ramesh Bhai, thanks for such heart touching words.
    May Baba bless our Bhai!

    Om Sai Ram!

    Offline tana

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #50 on: August 02, 2008, 09:13:47 PM »
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  • जय सांई राम।।।

    आज मेरे मन के सांई ने मुझसे कहा -

    जब दिल हो उदास
    बस आँखें बंद कर लेना
    और न हो कोई पास
    तो खुद से तुम कह देना
    बस आँखें बंद कर लेना
    देखो तुम यूँ न रोना
    अपनी प्यारी आँखें को
    आंसू में न डुबोना
    जब भी आये मेरी याद
    बस आँखें बंद कर लेना
    समझना मैं जानता हूँ तुम्हारा हाल
    मैं नज़र नहीं आता पर होता हूँ
    बिलकुल तेरे करीब तेरे ह्रदय में बसा सदा
    तुम मुझे अपना दर्द बता देना
    मत होना उदास
    बस आँखें बंद कर लेना

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।

    ॐ सांई राम~~~

    रमेश भाई,
    सांईराम

    ये बाबा ने आप से शायद मेरे लिए लिखवाया है..........हाँ बाबा है साथ मेरे करीब मेरे ह्रदय में~~~

    जय सांई राम~~~
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
    Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

    May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
    May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

    Offline tana

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #51 on: August 11, 2008, 12:38:57 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    आज मेरे मन के सांई ने मुझसे कहा -

    जब दिल हो उदास
    बस आँखें बंद कर लेना
    और न हो कोई पास
    तो खुद से तुम कह देना
    बस आँखें बंद कर लेना
    देखो तुम यूँ न रोना
    अपनी प्यारी आँखें को
    आंसू में न डुबोना
    जब भी आये मेरी याद
    बस आँखें बंद कर लेना
    समझना मैं जानता हूँ तुम्हारा हाल
    मैं नज़र नहीं आता पर होता हूँ
    बिलकुल तेरे करीब तेरे ह्रदय में बसा सदा
    तुम मुझे अपना दर्द बता देना
    मत होना उदास
    बस आँखें बंद कर लेना

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।

    ॐ सांई राम~~~

    ओ,मेरे मन के सांई बस अब तूं सांई सांई बोल~~~

    सांई कृपा अनन्त है , सांई नाम अनमोल~~~
    जन्म सफल हो जाये गा, सांई सांई बोल~~~

    सांई सांई बोल~~~सांई सांई बोल~~~सांई सांई बोल~~~

    जय सांई राम~~~
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
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    May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #52 on: August 13, 2008, 08:46:53 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    जाने क्या चाहे मन बावरा

    मन संसार की सबसे बड़ी पहेली, मन संसार का सबसे जटिल तत्व, मन विचारो कि झुरमुट में बसी एक छोटी सी झील, मन................बस मन!

    मन कब क्या चाहे कोई नही जानता, क्यो इतने सवाल पूछे यह भी कोई नही जानता, मन मनुष्य का सबसे सगा मित्र, मन ही आत्मन, मन ही ईश्वर।

    मन न जाने कब गुनगुनाये, कब छोटे बच्चो कि तरह न जाने क्या जिद्द कर जाए? मन कभी ज़मी पर कभी आसमां पर कभी तितली बन पेड़ों की शाखों पर, कभी मछली बन लहरों की हिलोरों पर, मन कभी मुस्कुराता हुआ, कभी बिन बात रोता हुआ, कभी हसता हुआ, कभी सुनाता हुआ, मन की महिमा मन ही जाने ।

    इस मन को समझने के लिए न जाने कितने ऋषि मुनियों ने युगों-युगों तक तपस्या की, न जाने कितने ग्रंथो का वाचन किया, न जाने कितने तीरथ धाम घूम लिए, इस मन के चक्कर में न जाने कितने गृहस्थ साधू हो गए, न जाने कितने आश्रम गुरुकुल खुल गए, पर ये मन और इसकी चाहत फ़िर भी कोई नही समझ पाया।

    कहते हैं मन पर काबू रखो, इसे नियंत्रण में रखो पर भाई ये तो हवा हैं, इसे कौन रोक पायेगा? तूफानी नदियां हैं बाँध भी टूट जाएगा, मन पंछी हैं, हर मौसम उड़ता जाएगा, मन लोकगीत हैं अनजाने ही स्फुटित हो जाएगा ।

    कौन समझ पाया हैं मन की माया? हम उसे पूर्व में ले जाना चाहते हैं और वह जाता हैं उत्तर में, हम उसे अपनी समझाते हैं वह हमे अपनी ही धुन पर नचवाता हैं।

    मन सबसे कुछ अलग हैं, वह अद्भुत हैं आलौकिक हैं, अनादी हैं, मन श्रृंगार हैं, वात्सल्य हैं,  मन एक बूंद हैं जीवनदाई जल सी, मन सागर हैं, मन प्रेम हैं, मन आनंद हैं।

    मन को पूरी तरह कोई न समझ सका न समझ पायेगा, मन पर कोई पहरे न बिठा सका न बिठा पायेगा, क्योकि मन स्वयम्भू हैं,  मन ही शिव हैं मन ही राम है वह हमारी आत्मा का हिस्सा हैं, मन त्रिगुनो त्रिलोकों तीर्थो से परे हैं, मन परे हैं चतुर्वेदो से, धर्मो से, दर्शनों से।

    मेरी नज़र में मन ही एकमात्र सच्चा मित्र हैं मानव का, इसलिए जब भी लगे जाने क्या चाहे मन बावरा... तो दिमाग चलाना बंद करे, खुदको एकदम चुप करो और सुनो मन की, उसकी कही करो, मन के नाम पर स्वछंदता का मैं हिमायती नही, पर सबसे प्रेम करो, सारी धरणी को मन से चाहो, फ़िर मन आपको कभी नही भटकायेगा, सच कहें तो वह कभी नही भटकाता, भटकते हम हैं और दोष देते हैं मन को, मन जैसा कोई संगी नही साथी नही सरल नही, अपने मन से पूछें और जिन्दगी की हर परेशानी को दूर करे, मन की माने, उसकी चाहतो को जाने अपने सच्चे मित्र की तरह।

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #53 on: August 17, 2008, 01:15:31 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    मन कचरा है!  ऐसा नहीं है कि आपके पास कचरा है और दूसरों के पास नहीं है। मन ही कचरा है। और अगर आप कचरा बाहर भी फेंकते रहें,  तो जितना चाहे फेंकते रह सकते हैं,  लेकिन यह कभी खत्म होने वाला नहीं है। यह खुद ही बढ़ने वाला कचरा है। यह मुर्दा नहीं है, यह सक्रिय है। यह बढ़ता रहता है और इसका अपना जीवन है,  तो अगर हम इसे काटें तो इसमें नई पत्तियां प्रस्फुटित होने लगती हैं।

    तो इसे बाहर निकालने का मतलब यह नहीं है कि हम खाली हो जाएंगे। इससे केवल इतना बोध होगा कि यह मन, जिसे हमने अपना होना समझ रखा था, जिससे हमने अब तक तक तादात्म्य बना रखा था, यह हम ही हैं। इस कचरे को बाहर निकालने से हम प्रथकता के प्रति सजग होंगे,  एक खाई के प्रति,  जो हमारे और इसके बीच है। कचरा रहेगा, लेकिन उसके साथ हमारा तादात्म्य नहीं रहेगा, बस। हम अलग हो जाएंगे, हम जानेंगे कि हम अलग हैं।

    तो हमें सिर्फ एक चीज करनी है - न तो कचरे से लड़ने की कोशिश करें और न उसे बदलने की कोशिश करें - सिर्फ देखें! और, स्मरण रखें, 'मैं यह नहीं हूं।'  इसे मंत्र बना लें - 'मैं यह नहीं हूं।'  इसका स्मरण रखें और सजग रहें और देखें कि क्या होता है।

    तत्क्षण एक बदलाहट होती है। कचरा अपनी जगह रहेगा, लेकिन अब वह हमारा हिस्सा नहीं रह जाता। यह स्मरण ही उसका छूटना हो जाता है।

    आईये आज़मायें इसे आज से....बहुत कारगर साबित होगा।

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।

    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline tana

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      • Sai Baba
    Re: अपने मन का साई
    « Reply #54 on: August 18, 2008, 12:33:51 AM »
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  • ॐ सांई राम~~~

    सदा मेरे मन के सांई की पुकार~~~

    ऐसी कृपा बाबा करो मेरो,
    नाम ना विसरू पल भी तेरो.....

    जय सांई राम~~~
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
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    Offline saisewika

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #55 on: September 05, 2008, 11:21:19 AM »
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  • ॐ साईं राम
    मेरे मन का साईं अक्सर चुप रहता है. कुछ बोलता नही......
    बस साक्षी बना सब देखता है.......
    लेकिन आज मेरे मन का साईं दुखी है.......बहुत दुखी ......
    हमारी इस प्यारी द्वारकामाई में बाबा जी के ही दिन जो कुछ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है...वह क्यों हुआ? कौन दोषी है ?.......किसने क्या किया ? क्यो किया ? इससे कोई फर्क नहीं पङता. फर्क पङता है तो इस बात से की हमारी द्वारकामाई की छवी पर तो इस विवाद का कोई असर नहीं पडेगा?.हम यहाँ आते हैं तो इस लिए की हम साईं भक्तों की संगती में होते हैं तो ख़ुद को सौभाग्यशाली समझते हैं...सारा जहाँ जैसे साईंमय हो जाता है. सब साईं भक्त हैं सबके दिल में साईं का वास है सब साईं की ही बात करते हैं तो लगता है की हम शिर्डी पहुँच गए ......लेकिन कल सारे विवाद में साईं कहीं नही थे.......भक्त भी नहीं थे........बस रस्साकशी थी.....कौन सही है कौन ग़लत यह साबित करने की कोशिशें थी.........
    मेरे मन के साईं ने कहा की क्यों ना सब कुछ बाबा पर ही छोड़ दें हम ख़ुद क्यों जज की कुर्सी पर बैठें ?
    जब सारा जीवन ही उन्हें सौंप दिया है तो सारे मसले भी उन्हें ही सुलझाने दें तो बेहतर होगा......

    जय साईं राम   

    Offline SaiServant

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #56 on: September 05, 2008, 11:20:22 PM »
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  • ॐ साईं राम
    मेरे मन का साईं अक्सर चुप रहता है. कुछ बोलता नही......
    बस साक्षी बना सब देखता है.......
    लेकिन आज मेरे मन का साईं दुखी है.......बहुत दुखी ......
    हमारी इस प्यारी द्वारकामाई में बाबा जी के ही दिन जो कुछ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है...वह क्यों हुआ? कौन दोषी है ?.......किसने क्या किया ? क्यो किया ? इससे कोई फर्क नहीं पङता. फर्क पङता है तो इस बात से की हमारी द्वारकामाई की छवी पर तो इस विवाद का कोई असर नहीं पडेगा?.हम यहाँ आते हैं तो इस लिए की हम साईं भक्तों की संगती में होते हैं तो ख़ुद को सौभाग्यशाली समझते हैं...सारा जहाँ जैसे साईंमय हो जाता है. सब साईं भक्त हैं सबके दिल में साईं का वास है सब साईं की ही बात करते हैं तो लगता है की हम शिर्डी पहुँच गए ......लेकिन कल सारे विवाद में साईं कहीं नही थे.......भक्त भी नहीं थे........बस रस्साकशी थी.....कौन सही है कौन ग़लत यह साबित करने की कोशिशें थी.........
    मेरे मन के साईं ने कहा की क्यों ना सब कुछ बाबा पर ही छोड़ दें हम ख़ुद क्यों जज की कुर्सी पर बैठें ?
    जब सारा जीवन ही उन्हें सौंप दिया है तो सारे मसले भी उन्हें ही सुलझाने दें तो बेहतर होगा......

    जय साईं राम  



    Om Sai Baba!

    Very sad indeed! I'm shocked and speechless that such a situation has arisen among Sai devotees. I visited this forum after many days, and read something that makes me ashamed before Baba.

    Baba, please forgive them, for they don't know what they are doing. Or, could it be your wish? only You know the answer, Baba Sai..

    Om Sai Ram!


    Offline tana

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #57 on: September 05, 2008, 11:58:48 PM »
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  • ॐ साईं राम
    मेरे मन का साईं अक्सर चुप रहता है. कुछ बोलता नही......
    बस साक्षी बना सब देखता है.......
    लेकिन आज मेरे मन का साईं दुखी है.......बहुत दुखी ......
    हमारी इस प्यारी द्वारकामाई में बाबा जी के ही दिन जो कुछ हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण है...वह क्यों हुआ? कौन दोषी है ?.......किसने क्या किया ? क्यो किया ? इससे कोई फर्क नहीं पङता. फर्क पङता है तो इस बात से की हमारी द्वारकामाई की छवी पर तो इस विवाद का कोई असर नहीं पडेगा?.हम यहाँ आते हैं तो इस लिए की हम साईं भक्तों की संगती में होते हैं तो ख़ुद को सौभाग्यशाली समझते हैं...सारा जहाँ जैसे साईंमय हो जाता है
    . सब साईं भक्त हैं सबके दिल में साईं का वास है सब साईं की ही बात करते हैं तो लगता है की हम शिर्डी पहुँच गए ......लेकिन कल सारे विवाद में साईं कहीं नही थे.......भक्त भी नहीं थे........बस रस्साकशी थी.....कौन सही है कौन ग़लत यह साबित करने की कोशिशें थी.........
    मेरे मन के साईं ने कहा की क्यों ना सब कुछ बाबा पर ही छोड़ दें हम ख़ुद क्यों जज की कुर्सी पर बैठें ?
    जब सारा जीवन ही उन्हें सौंप दिया है तो सारे मसले भी उन्हें ही सुलझाने दें तो बेहतर होगा......

    जय साईं राम   




    Om Sai Baba!

    Very sad indeed! I'm shocked and speechless that such a situation has arisen among Sai devotees. I visited this forum after many days, and read something that makes me ashamed before Baba.

    Baba, please forgive them, for they don't know what they are doing. Or, could it be your wish? only You know the answer, Baba Sai..

    Om Sai Ram!


    « Last Edit: September 06, 2008, 12:01:54 AM by tana »
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
    Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

    May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
    May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

    Offline Raz

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #58 on: September 07, 2008, 10:27:28 AM »
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  • ॐ साईं राम~~~

    आज मेरे मन का सांई....

    कुछ मौन पल चाहे~~

    खाली पन्नों पर
    अपने शब्दों से रंग भरना चाहे...
    उन शब्दों से सांई ही मूरत ही बन जाए...
    उन शब्दों के रंग भरते भरते सब कुछ सांईमय हो जाए,
    हम सब सांईमय हो जाए...
    हम सब सांईमय हो जाए...
    हम सब सांईमय हो जाए...

    जय सांई राम~~~



           

    जय सांई राम।।।

    आज एक बार फिर मेरे मन के सांई ने मुझसे कहा - रूक जाओ

    बस रूक जाओ.  अभी. यहीं.  इसी वक्त.  एक क्षण आगे नहीं.  एक क्षण पीछे नहीं.  इसी घड़ी में इसी क्षण में रूक जाओ. अपने शरीर को स्थिर कर दो.  जड़वत.  शरीर का कोई हिस्सा हिलना नहीं चाहिए. तनिक भी नहीं.  हाथ जहां हैं रहने दो.  पैर जहां हैं वहीं रोक दो.  आंखें खुली हैं तो खुली ही रखना.  पुतलियों को रोक दो.  शरीर जिस हालत में है रहने दो. यह मत देखना कि यह टेढ़ा है तो थोड़ा सीधा कर दें. यह मत देखना कि थोड़ी रीढ़ की हड्डी सीधी कर लें. टेढ़े-मेढ़े आड़े-तिरछे जैसे हो वैसे ही स्थिर हो जाओ. थोड़ी देर उसी अवस्था में मन को अपने शरीर के साथ मिलाने की कोशिश करो. मन को अनुभव करो. सांस को अनुभव करो.

    तुम्हें अपूर्व शांति का अनुभव होगा. तुम्हारा मन स्थिर हो जाएगा. सांस लयबद्ध हो जाएगी. शरीर और मन में नयी ताजगी भर जाएगी. क्या अनुभव होगा यह तुम जानों लेकिन जो अनुभव होगा वह तुम्हारे जीवन में बहुत काम आयेगा. 

    ज्यादा नहीं. तीन-चार मिनट. ऐसे ही दिन में कई बार स्थिर होने का अभ्यास करो. जब याद आ जाए तो कर लेना. कोई नियम मत बनाना कि इतने बजे करना है. ऐसे करना है. बस जब याद आ जाए कर लेना. यात्रा करते हुए याद आ जाए तो कर लेना. बैठे-बैठे याद आ जाए तो कर लेना. चलते-चलते याद आ जाए तो कर लेना. कहीं किनारे खड़े हो जाना किसी अजनबी की भांति और बस वहीं थोड़ी देर के लिए स्थिर हो जाना. देखना दुनिया कैसे चल रही है और तुम कैसे स्थिर हो गये हो. धीरे-धीरे संसार का बहुत सारा रहस्य समझ में आने लगेगा.  अपने संकट और उनके समाधान भी समझ में आने लगेंगे.

    तुम इसका अभ्यास करना. धीरे-धीरे ध्यान की ओर बढ़ने लगोगे. मन को पकड़ना शुरू कर दोगे. क्योंकि अब मन समझ में आने लगेगा. उसकी गति समझ में आने लगेगी. और एक बार इसकी गति समझ में आने लगे तो सुख-दुख का भेद अपने आप मिटने लगता है. बहुत कुछ होने लगता है. बहुत कुछ…..
      
    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।


    Offline Raz

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    Re: अपने मन का साई
    « Reply #59 on: September 08, 2008, 09:32:32 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    मेरे मन के सांई ने आज मुझसे कहा - सच बोलने मे थोड़ी सी परेशानी जरुर होती है पर बाद मे जब सब कुछ ठीक हो जाता है तो मज़ा आने लगता है . फिर तो ऐसी आदत हो जाती है कि चाहे सच कितना ही कड़वा क्यूं ना हो मुह से सच ही निकलता है. मेरा अपना अनुभव रहा है कि एक झूठ बोल दो फिर ये सिलसिला चलता ही चला जाता है.

    क्यूं सच है ना ????

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।


    ॐ सांई राम~~~

    हांजी रमेश भाई...

    बिल्कुल सही कहा आप ने एक झूठ बोल दो फिर ये सिलसिला चलता ही चला जाता है....

    और एक झूठ छिपाने के लिए सौ झूठ और बोलने पङते है....

    जय सांई राम~~~

           

     


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