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Author Topic: देखे जो साईंनाथ,दिल में बजी गिटार,छलका आँखों से प्यार,मन में बजी सितार  (Read 3029 times)

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Offline sai ji ka narad muni

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  • दाता एक साईं भिखारी सारी दुनिया
रस्ते में चलते या कही भी ठहरते
साईं नाम जो कानो में पड जाये
साईं बाबा जो कही दिख
जाये
तो बोलो क्या होता हैं!!!???

 उस भाव को तो बस वही जानता हैं जिसने साईं बाबा के प्रेम रुपी रस को पिया तो खूब परन्तु तृप्ति नही हुई ,
सायुज्य की प्यास इतनी अधिक हैं की आनंद का अर्थ ही अब साईं हैं
प्यार इतना दिया की निष्काम कर दिया अंतः करण
संसार की कामनाऐ अगर आपका प्रेम पाकर भी खत्म नही हो तो यह सबसे बड़ा दुर्भाग्य होता।।।

माना की आप संग हो मेरे प्रत्येक
क्षण
परन्तु फिर भी आपके दर्शन की ही आस लगी रहती हैं
हे
साईं
हे
आत्माराम
हे समर्थ
हे मेरे प्राण प्रियतम साईं     

गुरु साईं का रूप आँख रुपी पात्र के लिय अमृत हो गया हैं
कभी किसी क्षण गलती से भी जिनकी विस्मृति नही होती जिन्हें कभी मन भूलता नही ऐसे प्रेम और करुणा के सागर शिर्डी साईं कही मुस्कुराते देखलेते हैं तो जेसे सोये अरमान जाग ही जाते हैं
।यह रस तो भक्त ही पाते होंगे फिर क्या कारण हैं की मेरी ये स्थिती हो रही हैं?
 कृष्ण के निष्काम भक्त होते हुए भी श्री कृष्ण के रूप और प्रेम के अद्भुत रस का पान करते होंगे परन्तु उन भक्तो के आगे कहाँ हम नालायक घोर संसारी पापी कलियुगी नीच  योनिद्वार से जन्म लेने वाले
उत्तर एक ही हैं साईं आपकी कृपा
आप परम स्वतंत्र होते हुए भी अपने भक्तो के आधीन हो जाते हो, आपको सिर्फ आपकी कृपा से ही पाया जा सकता हैं।
 

जो पूर्ण हैं वही सुंदर हैं

हमपर केसी कृपा की बाबा ने
की अब चारो तरफ साईं ही साईं हैं
और हमारा मन उनमे स्थिर हो गया हैं। श्री हरी की करुणा
शिव जी का वैराग्य
माता पार्वती का वात्सल्य
परशुराम का पराक्रम
श्री कृष्ण का रूप (जी हां हमारे बाबा अत्यंत रूपवान हैं , अवर्णीय रूप माधूरी का उन्होंने मुझे दर्शन दिया था एक बार)
माँ लक्ष्मी का वैभव
श्री राम की पवित्रता
द्वारकाधीश भगवन का ऐश्वर्य
समाया हैं हमारे बाबा में ये कोई कल्पित बाते नही वरन सत्य हैं

« Last Edit: January 05, 2016, 03:22:19 AM by sai ji ka narad muni »
जिस कर्म से भगवद प्रेम और भक्ति बढ़े वही सार्थक उद्योग हैं।
ॐ साईं राम

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https://archive.org/details/SaiBabaPhotographyPdf

Offline sai ji ka narad muni

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  • दाता एक साईं भिखारी सारी दुनिया
WARNING---
SHRINGAAR RAS, SUFI PASSIONATE DEVOTION ETC MIGHT BE OFFENSIVE TO FEW DEVOTEES SO
I APOLOGIZE IF ANY OF POST  OFFENDS SOMEONE





Who is at my door?
He said, "Who is at my door?"
I said, "Your humble servant."
He said, "What business do you have?"
I said, "To greet you, 0 Lord."

He said, "How long will you journey on?"
I said, "Until you stop me."
He said, "How long will you boil in the fire?"
I said, "Until I am pure.

"This is my oath of love.
For the sake of love
I gave up wealth and position."

He said, "You have pleaded your case
but you have no witness."
I said, "My tears are my witness;
the pallor of my face is my proof.'
He said, "Your witness has no credibility;
your eyes are too wet to see."
I said, "By the splendor of your justice
my eyes are clear and faultless."

He said, "What do you seek?"
I said, "To have you as my constant friend."
He said, "What do you want from me?"
I said, "Your abundant grace."

He said, "Who was your companion on the 'ourney?
I said, "The thought of you, 0 King."
He said, "What called you here?"
I said, "The fragrance of your wine."

He said, "What brings you the most fulfillment?"
I said, "The company of the Emperor."
He said, "What do you find there?"
I said, "A hundred miracles."
He said, "Why is the palace deserted?"
I said, "They all fear the thief."
He said, "Who is the thief?"
I said, "The one who keeps me from -you.

He said, "Where is there safety?"
I said, "In service and renunciation."
He said, "What is there to renounce?"
I said, "The hope of salvation."

He said, "Where is there calamity?"
I said, "In the presence of your love."
He said, "How do you benefit from this life?"
I said, "By keeping true to myself

Now it is time for silence.
If I told you about His true essence
You would fly from your self and be gone,
and neither door nor roof could hold you back!

Rumi - In the Arms of the Beloved,
जिस कर्म से भगवद प्रेम और भक्ति बढ़े वही सार्थक उद्योग हैं।
ॐ साईं राम

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