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Author Topic: भक्ति के महाद्वार हैं हनुमान ~~~  (Read 2238 times)

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Offline tana

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  • ~सांई~~ੴ~~सांई~
    • Sai Baba
ॐ सांई राम~~~

भक्ति के महाद्वार हैं हनुमान ~~~
 
विश्व-साहित्य में हनुमान के सदृश पात्र कोई और नहीं है। हनुमान एक ऐसे चरित्र हैं जो सर्वगुण निधान हैं। अप्रतिम शारीरिक क्षमता ही नहीं, मानसिक दक्षता तथा सर्वविधचारित्रिक ऊंचाइयों के भी यह उत्तुंग शिखर हैं। इनके सदृश मित्र, सेवक ,सखा, कृपालु एवं भक्तिपरायणको ढूंढनाअसंभव है। हनुमान के प्रकाश से वाल्मीकि एवं तुलसीकृतरामायण जगमग हो गई। हनुमान के रहते कौन सा कार्य व्यक्ति के लिए कठिन हो सकता है?

दुर्गम काज जगत के जेते।

सुगम अनुग्रह तुम्हरेतेते॥


तो आप अगर किसी कष्ट से ग्रस्त हैं, किसी समस्या से पीडित हैं, कोई अभाव आपको सता रहा है तो देर किस बात की! हनुमान को पुकारिए, सुंदर कांड का पाठ कीजिए, वह कठिन लगे तो हनुमान-चालीसा का ही परायण कीजिए और आप्तकामहो जाइए। हनुमान की प्रमुख विशेषताओं को गोस्वामी ने इन चार पंक्तियों में समेटने का प्रयास किया है-

अतुलितबलधामंहेमशैलाभदेहं

दनुजवनकृशानुंज्ञानिनामग्रगण्यम्।

सकलगुणनिधानंवानरणामधीशं

रघुपतिप्रियभक्तंवातजातंनमामि।।


अतुलित बलशाली, सोने के पर्वत के सदृश विशाल कान्तिमान् शरीर, दैत्य (दुष्ट) रूपी वन के लिए अग्नि-समान, ज्ञानियोंमें अग्रगण्य, सम्पूर्ण गुणों के खान, वानराधिपति,राम के प्रिय भक्त पवनसुतहनुमान का मैं नमन करता हूं।

अब ढूंढिएऐसे चरित्र को जिसमें एक साथ इतनी विशेषताएं हों। जिसका शरीर भी कनक भूधराकारहो, जो सर्वगुणोंसे सम्पन्न भी हो, दुष्टों के लिए दावानल भी हो और राम का अनन्य भक्त भी हो। कनक भूधराकारकी बात कोई अतिशयोक्ति नहीं, हनुमान के संबंध में यह यत्र-तत्र-सर्वत्र आई है।

आंजनेयंअति पाटलाननम्

कांचनाद्रिकमनीयविग्रहम्।

पारिजाततरुमूलवासिनम्

भावयामिपवननन्दनम्॥


अंजना पुत्र,अत्यन्त गुलाबी मुख-कान्ति तथा स्वर्ण पर्वत के सदृश सुंदर शरीर, कल्प वृक्ष के नीचे वास करने वाले पवन पुत्र का मैं ध्यान करता हूं। पारिजात वृक्ष मनोवांछित फल प्रदान करता है। अत:उसके नीचे वास करने वाले हनुमान स्वत:भक्तों की सभी मनोकामनाओंकी पूर्ति के कारक बन जाते हैं। आदमी तो आदमी स्वयं परमेश्वरावतारपुरुषोत्तम राम के लिए हनुमान जी ऐसे महापुरुष सिद्ध हुए कि प्रथम रामकथा-गायक वाल्मीकि ने राम के मुख से कहलवा दिया कि तुम्हारे उपकारों का मैं इतना ऋणी हूं कि एक-एक उपकार के लिए मैं अपने प्राण दे सकता हूं, फिर भी तुम्हारे उपकारों से मैं उऋण कहां हो पाउंगा?

एकैकस्योपकारस्यप्राणान्दास्यामितेकपे।शेषस्येहोपकाराणांभवामऋणिनोवयम्।

उस समय तो राम के उद्गार सभी सीमाओं को पार कर गए जब हनुमान के लंका से लौटने पर उन्होंने कहा कि हनुमान ने ऐसा कठिन कार्य किया है कि भूतल पर ऐसा कार्य सम्पादित करना कठिन है, इस भूमंडल पर अन्य कोई तो ऐसा करने की बात मन में सोच भी नहीं सकता।

कृतंहनूमताकार्यसुमहद्भुविदुलर्भम्।मनसापियदन्येनन शक्यंधरणी तले॥

गोस्वामी जी हनुमान के सबसे बडे भक्त थे। वाल्मीकि के हनुमान की विशेषताओं को देखकर वह पूरी तरह उनके हो गए। हनुमान के माध्यम से उन्होंने राम की भक्ति ही नहीं प्राप्त की, राम के दर्शन भी कर लिए। हनुमान ने गोस्वामी की निष्ठा से प्रसन्न होकर उन्हें वाराणसी में दर्शन दिए और वर मांगने को कहा। तुलसी को अपने राम के दर्शन के अतिरिक्त और क्या मांगना था? हनुमान ने वचन दे दिया। राम और हनुमान घोडे पर सवार, तुलसी के सामने से निकल गए। हनुमान ने देखा उनका यह प्रयास व्यर्थ गया। तुलसी उन्हें पहचान ही नहीं पाए। हनुमान ने दूसरा प्रयास किया। चित्रकूट के घाट पर वह चंदन घिस रहे थे कि राम ने एक सुंदर बालक के रूप में उनके पास पहुंच कर तिलक लगाने को कहा। तुलसीदास फिर न चूक जाएं अत:हनुमान को तोते का रूप धारण कर ये प्रसिद्ध पंक्तियां कहनी पडी-

चित्रकूट के घाट पर भई संतनकी भीर।तुलसीदास चन्दन रगरैतिलक देतराम रघुबीर॥

हनुमान ने मात्र तुलसी को ही राम के समीप नहीं पहुंचाया। जिस किसी को भी राम की भक्ति करनी है, उसे प्रथम हनुमान की भक्ति करनी होगी। राम हनुमान से इतने उपकृत हैं कि जो उनको प्रसन्न किए बिना ही राम को पाना चाहते हैं उन्हें राम कभी नहीं अपनाते। गोस्वामी ने ठीक ही लिखा-

राम दुआरेतुम रखवारे।

होत न आज्ञा बिनुपैसारे॥


अत:हनुमान भक्ति के महाद्वारहैं। राम की ही नहीं कृष्ण की भी भक्ति करनी हो तो पहले हनुमान को अपनाना होगा। यह इसलिए कि भक्ति का मार्ग कठिन है। हनुमान इस कठिन मार्ग को आसान कर देते हैं, अत:सर्वप्रथम उनका शरणागत होना पडता है। भारत में कई ऐसे संत व साधक हुए हैं जिन्होंने हनुमान की कृपा से अमरत्व को प्राप्त कर लिया। रामायण में राम और सीता के पश्चात सर्वाधिक लोकप्रिय चरित्र हैं हनुमान जिनके मंदिर भारत ही नहीं भारत के बाहर भी अनगिनत संख्या में निर्मित हैं। धरती तो धरती तीनों लोकों में इनकी ख्याति है-

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।

जय कपीसतिहूंलोक उजागर॥


जय सांई राम~~~
 
"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

" Loka Samasta Sukino Bhavantu
Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

 


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