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Author Topic: देवा रक्षा करना  (Read 7234 times)

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Offline Pratap Nr.Mishra

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  • राम भी तू रहीम भी तू तू ही ईशु नानक भी तू

बाबा आपके चरणों में कोटि कोटि नमन | हे परमपिता आज इस अनजान देश में भी आपने मुझे अपनी सेवा का अवसर प्रदान कर कृत-कृत कर दिया | आजतक मुझे इस पावन दिन का अज्ञानतावश कभी भी ऐसा अनुभव नहीं प्राप्त हुआ था जो आज मुझे आपने प्रदान किया | बाबा आपको बहुत-बहुत धन्यवाद | हे त्रिलोकीनाथ ,हे त्रिकालदर्शी आपको तो भलिभांत सबकुछ ज्ञात है कि आपके बच्चे के जीवन का उदेश्य क्या है | हे देवा मुझे योग्यता,समर्थता एवंग सम्पन्नता प्रदान करो जिससे मै आपके ही दिये हुये इस जीवन के सभी कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाते हुये अपने उदेश्य को प्राप्त कर सकूँ | आपकी कृपा एवंग आशीर्वाद के बिना एक पग भी चल पाना बाबा असम्भव है | कर्ता, कारण और कारक स्वयं आप ही हो ,हमतो केवल निर्मित मात्र ही हैं |

कहने को तो पिता बहुत कुछ है पर आपकी स्तुति को शब्द ही नहीं रहें इस मूढ़बुद्धि में | 

बाबा प्रणाम

Offline Pratap Nr.Mishra

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  • राम भी तू रहीम भी तू तू ही ईशु नानक भी तू
Re: देवा रक्षा करना
« Reply #16 on: March 11, 2013, 01:03:21 PM »
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  • बाबा आपके चरणों में कोटि-कोटि नमन | बाबा आज फिर माया ने अपना भयंकर रूप धारण कर मेरे मन को पूरी तरह से क्षत विक्षित कर दिया है | जैसे ज्वालामुखी के मुंह में बैठा हुआ हूँ और किसी समय भी इस आग्नि में भस्म हो जाऊंगा | बाबा अब आप के कृपा का ही दास हूँ जैसा आपको समझ आता है वैसा ही करो |  आप ही कर्ता और हर कारणों के कारण भी हो | कर्मों को तो भोगना ही है इस बात का भी मुझे आपसे ही ज्ञान मिला है | बाबा बाईस साल की उम्र से पिता के देहांत के पस्चात हर परिवार के कर्तव्यों को जितनी आपने समर्थता प्रदान की पूरा करने का प्रयास करता रहा | अपनी स्वेक्षिक इच्छाओं का भी त्याग करता रहा पर पूर्व के अशुभ कर्मों को, जिनसे मै पूर्णता अनभिज्ञ हूँ , अभी तक मिटा नहीं पाया | कुछ शुभ कर्मों के फलस्वरूप आपका सनिग्ध्य मुझे प्राप्त हुआ और वो ज्ञान भी जिससे मै आगे के जीवन को अच्छा बना सकूँ | मुझे कोई गिला सिकवा नहीं है मेरे पिता आपसे और आपकी कार्यप्रणाली से क्योकि आप तो समता का भाव ही रखते हो | आपके लिए तो हर कोई सामान है और सभी को अपने कर्मों के अनिरूप ही फल भोगना पड़ता है | पर बाबा हम आपकी ही रची माया से कैसे और कबतक लड़ सकतें हैं जब आप ही रक्षा नहीं करोगे |

    बाबा आपके चरणों में बस यही अनुरोध है कि मेरा हाथ नहीं छोड़ना मेरे पिता अपना वरदहस्त सदा अपने बच्चे के सर पे रखना वरना  मै अपने जीवन के उदेश्य जिसे आपने ही मेरे ह्रदय में बीज रुप में बोया है अंकुरित नहीं हो पायेगा | बाबा जो मैंने आपके सनिग्ध्य से जाना है ,समझा है वो यह कि सब झूट है जो हमें सच की तरह इस संसार में दीखता है |  बाबा मेरे पूर्वाध के अशुभ कर्मों का नाश करके मुझे उन्मुक्त जीवन प्रदान करें | इस पिंजरे में मेरा अब दम घुटने लगा है |

    आज मै असहिनिये पीड़ा से पीड़ित हूँ इसी वजह से पिता को अपनी बातों को कहकर कुछ हल्का होना चाहता हूँ | आपके सिवा कोई नहीं है इस झूटी दुनियाँ में जिसके समक्ष मै अपने ह्रदय की बात कह सकूँ | मुझे ज्ञात है आप सर्वज्ञ हो,सर्वज्ञता हो पर पिता पुत्र के रिस्ते को  कैसे मै भूल जाऊ |

    बाबा क्षमा करियेगा अगर मानसिक असंतुलन और अविचारी भावनायों में बहकर मैंने आपके ह्रदय को दुःख पहुँचाया हो | अबोध बालक की ढीढाई को जैसे सांसारिक पिता माफ़ कर देता है वैसे ही मुझे माफ़ कर देना और मुझे मार्गदर्शन कराते रहना |

    आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम |

    Offline Pratap Nr.Mishra

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    Re: देवा रक्षा करना
    « Reply #17 on: March 18, 2013, 08:33:17 AM »
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  • बाबा आपके चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम | बाबा क्यों नहीं मुझे आपने वो विवेक दिया जिससे मै भी सब देखते हुये मौन रह सकता ? क्यों अपनों  को कोई कुछ असत्य कहने पर मै मौन नहीं धारण कर पता ? क्यों केवल धारा के विपरीत ही अकेले चलने का प्रयास करता रहता हूँ ? क्यों मुझे नहीं समझ आता की नजरंदाज करना ही समझदारी होती है चाहे वह गलत ही हो ? हर भावना क्या तर्कों के द्वारा ही तौली जाती है ? क्या धर्म यह नहीं कहता की आदर्श के मार्ग में चलो और उसको कायम रखो ? क्यों नहीं मै आज के समाज की व्यवहारिक सोच की समझ रखता हूँ ?

    बाबा क्या वो सब बेवकूफ थे जिन्होंने दिल्ली की घटना के लिए जबरदस्त प्रतिवाद किया था ? क्या सब मौन नहीं रह सकते थे क्योकि ना ही वो लड़की किसी की बहन थी ना ही बेटी, यह तो सम्पूर्ण उसका और उसके परिवार का मामला था  ? क्या चुपचाप मौन धारण करने वाला भी अप्रतक्षरूप से समर्थन नहीं दे रहे है ?

    बाबा ऐसे और भी कई प्रश्नों का जवाब मुझे नहीं मिल पा रहा है | आप मेरा मार्गदर्शन करिये | बाबा मेरी नासमझ और हठधर्मिता के लिए क्षमा करियेगा |

    आपके चरणों में सतसत नमस्कार |
     

    Offline Pratap Nr.Mishra

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    Re: देवा रक्षा करना
    « Reply #18 on: March 23, 2013, 06:25:20 AM »
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  • बाबा चरण स्पर्श | मै सदैव आपका आभारी हूँ जो आप सब समय किसी न किसी रूप में आके मुझे मेरी त्रुटियों से परिचित कराते रहते हो जिनसे शायद मै अंजान रहता हूँ या रहने का प्रयास करता हूँ | बाबा तुम्हारी इस त्रिगुणी माया से मै भी बंधा हूँ और तामसिकता का प्रभाव प्रबल होने एवंग अज्ञानता के कारण जाने-अनजाने अकर्म कर जाता हूँ पर बोध होने पे  पश्चाताप भी करता हूँ | मुझे सदा मेरे अवगुणों से अवगत करवाते रहना जिससे मै इसको दूर कर सकूँ और जीवन के उदेश्य को प्राप्त कर सकूँ |

    मुझे सदा मार्गदर्शन करते रहने के लिए मै अपना आभार प्रगट करता हूँ | मेरी अविवेकी बुद्धि और मन का सदैव मर्दन करते रहना जिससे विकाररहित हो सकूँ |

    आपके चरणों में कोटि कोटि प्रणाम |

     


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