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Author Topic: साहिब आये काल जगत में  (Read 2008 times)

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Offline JR

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ऊँ सांई राम

कर परनाम ज्ञानी चले, करन हंस के काज ।
जोपै काल न मानि है, तुम्ही पुरुष का लाज ।।

ऊँ सांई राम
सबका मालिक एक - Sabka Malik Ek

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Offline JR

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Re: साहिब आये काल जगत में
« Reply #1 on: March 11, 2008, 08:56:48 AM »
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  • ऊँ सांई राम

    तासो कहयो सुनो धर्मराई ।  जीव काज संसार सिधाई ।।
    तप्त शिला पर जीव जरावहु ।  जारि वारि निजस्वाद करावहु ।।
    तुम अस कष्ट जीव कह दीन्हा ।  तबहि पुरुष मोहि आज्ञा कीन्हा ।।
    जीव चिताय लोक लै जाऊँ ।  काल कष्ट से जीव बचाऊँ ।।

    अर्थ - साहिब ने कहा, हे निरंजन ।  तुमने बहुत छल-कपट से जीवों को बांधा हुआ है ।  तप्त शिला पर उन्हें अनेक कष्ट देकर आनन्द लूट रहे हो ।  परम पुरुष ने मुझे यहां भेजा है ।  मैं जीवों को यहां से छुड़ाकर अमर लोक ले जाऊंगा ।

    जय सांई राम
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    Re: साहिब आये काल जगत में
    « Reply #2 on: March 11, 2008, 09:14:26 AM »
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  • ऊँ सांई राम

    तबै निरंजन बोले बानी ।  सकल जीव बस हमरे ज्ञानी ।।
    तिनसौ साठ पैठ उरझेरा ।  कैसे हंसन लेव उबेरा ।।

    अर्थ - निरंजन ने कहा - कि तुम जीवों को कैसे छुड़ाओगे ।  सब जीवों को मैंने उलझाया हुआ है ।  360 ऐसे स्थान है, जहाँ पर निरंजन ने थोड़ी-2 शक्तियां रखी हुई है ।  इन्हीं को देख जीव उलझे हुए है ।  दुनिया में बड़ा बहम है परमात्मा के विषय में ।  कोई किसी स्थान को मान रहा है तो कोई किसी को ।  जो जिस चीज को मान रहा है, उससे आगे बढ़ने का प्रयास ही नहीं कर रहा ।

    जय सांई राम
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