Join Sai Baba Announcement List

DOWNLOAD SAMARPAN - APRIL 2016




Author Topic: उपदेश का अंग~~~  (Read 4866 times)

0 Members and 1 Guest are viewing this topic.

Offline tana

  • Member
  • Posts: 7074
  • Blessings 139
  • ~सांई~~ੴ~~सांई~
    • Sai Baba
उपदेश का अंग~~~
« on: July 07, 2008, 12:40:16 AM »
  • Publish
  • ॐ सांई राम~~~

    उपदेश का अंग~~~
     

    बैरागी बिरकत भला, गिरही चित्त उदार ।
    दुहुं चूका रीता पड़ैं , वाकूं वार न पार ॥1॥

    भावार्थ - बैरागी वही अच्छा, जिसमें सच्ची विरक्ति हो, और गृहस्थ वह अच्छा, जिसका हृदय उदार हो । यदि वैरागी के मन में विरक्ति नहीं, और गृहस्थ के मन में उदारता नहीं, तो दोनों का ऐसा पतन होगा कि जिसकी हद नहीं ।

    `कबीर' हरि के नाव सूं, प्रीति रहै इकतार ।
    तो मुख तैं मोती झड़ैं, हीरे अन्त न फार ॥2॥

    भावार्थ - कबीर कहते हैं -- यदि हरिनाम पर अविरल प्रीति बनी रहे, तो उसके मुख से मोती-ही मोती झड़ेंगे, और इतने हीरे कि जिनकी गिनती नहीं । [ हरि भक्त का व्यवहार - बर्ताव सबके प्रति मधुर ही होता है- मन मधुर, वचन मधुर और कर्म मधुर ।]


    ऐसी बाणी बोलिये, मन का आपा खोइ ।
    अपना तन सीतल करै, औरन को सुख होइ ॥3॥

    भावार्थ - अपना अहंकार छोड़कर ऐसी बाणी बोलनी चाहिए कि, जिससे बोलनेवाला स्वयं शीतलता और शान्ति का अनुभव करे, और सुननेवालों को भी सुख मिले ।


    कोइ एक राखै सावधां, चेतनि पहरै जागि ।
    बस्तर बासन सूं खिसै, चोर न सकई लागि ॥4॥

    भावार्थ - पहर-पहर पर जागता हुआ जो सचेत रहता है, उसके वस्त्र और बर्तन कैसे कोई ले जा सकता है ?चोर तो दूर ही रहेंगे, उसके पीछे नहीं लगेंगे ।

    जग में बैरी कोइ नहीं, जो मन सीतल होइ ।
    या आपा को डारिदे, दया करै सब कोइ ॥5॥

    भावार्थ - हमारे मन में यदि शीतलता है, क्रोध नहीं है और क्षमा है, तो संसार में हमसे किसीका बैर हो नहीं सकता । अथवा अहंकार को निकाल बाहर करदें, तो हम पर सब कृपा ही करेंगे ।

    आवत गारी एक है, उलटत होइ अनेक ।
    कह `कबीर' नहिं उलटिए, वही एक की एक ॥6॥

    भावार्थ - हमें कोई एक गाली दे और हम उलटकर उसे गालियाँ दें, तो वे गालियाँ अनेक हो जायेंगी। कबीर कहते हैं कि यदि गाली को पलटा न जाय, गाली का जवाब गाली से न दिया जाय, तो वह गाली एक ही रहेगी ।


    जय सांई राम~~~   
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
    Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

    May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
    May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

     


    Facebook Comments