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Author Topic: SMALL STORIES  (Read 109774 times)

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Offline Ramesh Ramnani

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Re: SMALL STORIES
« Reply #15 on: March 31, 2007, 10:52:35 PM »
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  • जय सांई राम।।।

    मोह और साधना
     
    पुराने जमाने की बात है। किसी गांव में एक संत रहते थे। वह सारा समय आत्मचिंतन और प्रभु के ध्यान में लगाते थे। उनकी पत्नी भी उनसे प्रभावित थी। वह भी अध्ययन और चिंतन-मनन में लगी रहती थी। हालांकि संत के मन में कहीं न कहीं संदेह था कि उनकी पत्नी त्यागमय जीवन की उस अवस्था तक नहीं पहुंच पाई है, जहां तक वह पहुंच चुके हैं।

    एक बार दोनों एक जंगल में चले जा रहे थे। चलते-चलते दोनों के बीच कुछ फासला बढ़ गया। संत थोड़ा आगे बढ़ गए, पत्नी पीछे रह गई। तभी संत ने देखा कि मार्ग पर एक कीमती चमकदार हीरा पड़ा हुआ है। उन्होंने सोचा कि अब तक उन्होंने जीवन में हीरा-मोती, सोना-चांदी को तुच्छ और प्रभु भक्ति के रास्ते से हटाने वाला ही समझा है। कहीं ऐसा न हो कि उनकी पत्नी का मन यह पत्थर देखकर डोल जाए। यह सोचकर वह उस कीमती पत्थर पर मिट्टी डालने लगे।

    तब तक उनकी पत्नी भी वहां पहुंच चुकी थी। उसने संत को उस चमकते पत्थर पर मिट्टी डालते देखा तो उसे हंसी आ गई। वह बोली, 'महात्मन्, आप व्यर्थ की मेहनत कर रहे हैं। मिट्टी पर मिट्टी डालने से क्या लाभ। चलिए आगे बढ़ें।' संत ने सोचा कि धन-कांचन, लोभ-मोह पर विजय की साधना में यह उनसे भी कहीं आगे है। उनका अभिमान जाता रहा।

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #16 on: April 01, 2007, 01:48:57 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    रस्सी

    यह कहानी एक ऐसे पर्वतारोही की है जो सबसे ऊँचे पर्वत पर विजय पाना चाहता था। कई सालों की कड़ी मेहनत के बाद उसने अपना साहसिक अभियान शुरु किया। पर वह यह उपलब्धि किसी के साथ साझा नहीं करना चाहता था, अत: उसने अकेले ही चढ़ाई करने का निश्चय किया। उसने पर्वत पर चढ़ना आरंभ किया, जल्दी ही शाम ढलने लगी। पर वह विश्राम के लिए तम्बू में ठहरने की जगह अंधेरा होने तक चढ़ाई करता रहा। घने अंधकार के कारण वह कुछ भी देख नहीं पा रहा था। हाथ को हाथ भी सुझाई नहीं दे रहा था। चंद्रमा और तारे सब बादलों की चादर से ढके हुए थे। वह निरंतर चढ़ता हुआ पर्वत की चोटी से कुछ ही फुट के फासले पर था कि तभी अचानक उसका पैर फिसला और वह तेजी से नीचे की तरफ गिरने लगा। गिरते हुए उसे अपने जीवन के सभी अच्छे और बुरे दौर चलचित्र की तरह दिखाई देने लगे। उसे अपनी मृत्यु बहुत नजदीक लग रही थी, तभी उसकी कमर से बंधी रस्सी ने झटके से उसे रोक दिया। उसका शरीर केवल उस रस्सी के सहारे हवा में झूल रहा था। उसी क्षण वह जोर से चिल्लाया:
    ‘बाबा सांई मेरी मदद करो!’ तभी अचानक एक गहरी आवाज आकाश में गूँजी:

    - तुम मुझ से क्या चाहते हो ?

    पर्वतारोही बोला - बाबा मेरी रक्षा कीजिए!

    - क्या तुम्हें सच में विश्वास है कि मैं तुम्हारी रक्षा कर सकता हूँ ?

    वह बोला - हाँ, बाबा मुझे आप पर पूरा विश्वास है ।

    - ठीक है, अगर तुम्हें मुझ पर विश्वास है तो अपनी कमर से बंधी रस्सी काट दो.....

    कुछ क्षण के लिए वहाँ एक चुप्पी सी छा गई और उस पर्वतारोही ने अपनी पूरी शक्ति से रस्सी को पकड़े रहने का निश्चय कर लिया।

    अगले दिन बचाव दल को एक रस्सी के सहारे लटका हुआ एक पर्वतारोही का ठंड से जमा हुआ शव मिला । उसके हाथ रस्सी को मजबूती से थामे थे... और वह धरती से केवल दस फुट की ऊँचाई पर था।

    और आप? आप अपनी रस्सी से कितने जुड़े हुए हैं । क्या आप अपनी रस्सी को छोड़ेंगे? बाबा सांई पर विश्वास रखिए। कभी भी यह नहीं सोचिए कि वह आपको भूल गया है या उसने आपका साथ छोड़ दिया है । याद रखिए कि वह हमेशा आपको अपने हाथों में थामे हुए है।

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #17 on: April 02, 2007, 02:17:29 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    भिखारी कौन
     
    वैशेषिक दर्शन के सूत्रधार ऋषि कणाद जंगल में रहते थे। वह कंद-मूल खाते या फिर अन्नकण चुनकर लाते और उससे अपनी क्षुधा शांत करते। अन्नकणों से जीवन निर्वाह करने के कारण ही उनका नाम कणाद पड़ गया था। एक बार किसी ने राजा से कहा, 'आपके राज्य में ऐसा भी एक भिखारी है जो खेतों से अन्न बीनकर अपनी उदरपूर्ति करता है।' यह सुनकर राजा चौंका। राजा ने तत्काल मंत्री को आदेश दिया,' भोजन लेकर जाओ और भरपेट खिलाकर उसे तृप्त करो।'

    मंत्री ऋषि कणाद के पास पहुंचा। उसने कणाद से भोजन करने का आग्रह किया, पर वह निष्फल गया। जब राजा को पता चला तो वह दुविधा में पड़ गया कि आखिर यह कैसा भिखारी है, जो अत्यंत आग्रह करने पर भी कुछ स्वीकार नहीं करता। रानी के कानों में भी यह बात पहुंची। किसी ने उन्हें बताया कि कणाद अलौकिक प्रभाव के सिद्ध पुरुष हैं और सोना बनाने की कला भी जानते हैं।

    स्वर्ण सिद्धि के प्रसंग ने राजा को व्याकुल बना दिया। वह उनके पास पहुंचा। कणाद को प्रणाम कर राजा ने कहा, 'ऋषिवर! मैंने मंत्री को आपकी सेवा में भेजा था। आपने भोजन अस्वीकार क्यों किया? कितना अच्छा होता, आप अपने इस दास पर अनुग्रह करते।' ऋषि कणाद मुस्कराते हुए खड़े रहे। कुछ क्षणों बाद राजा ने पुन: कहा, 'ऋषिवर! मैंने सुना है आपके पास स्वर्ण विद्या है। कितना अच्छा हो उसे प्रदान कर आप मुझे अनुग्रहीत करें। स्वर्ण की तो राज्य संचालन के लिए आवश्यकता होती है। फकीरों का उससे क्या प्रयोजन।'

    इस पर ऋषि कणाद बोले, 'राजन! बताओ हम दोनों में भिखारी कौन है? भीख मांगने मैं आपके पास गया या आप भीख मांगने मेरे पास आए। राजा यह सुनकर मौन हो गया। ऋषि कणाद ने फिर कहा, 'जिसके पास किसी चीज का अभाव होता है वह भिखारी नहीं होता। भिखारी वह होता है जो सब कुछ होने के बावजूद असंतुष्ट रहता है। इसलिए संतोष धारण करो। धन से आज तक किसी की तृप्ति नहीं हुई। धन सुख का नहीं, पापों और अनर्थों का मूल है।'

    राजा को अपनी भूल का अहसास हुआ। उसने ऋषि से क्षमा मांगी। 

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

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    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #18 on: April 02, 2007, 08:41:16 AM »
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  • जय सांई राम़।।।

    रेत और पत्थर

    एक बार दो दोस्त रेगिस्तान में से होकर कहीं जा रहे थे । रास्ते में उनमें किसी बात पर बहस हो गई और एक दोस्त ने दूसरे दोस्त को थप्पड़ मार दिया । जिस दोस्त को थप्पड़ मारा गया था वह बहुत दुखी हुआ पर उसने बिना कुछ बोले रेत पर लिखा, “आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझे थप्पड़ मारा” । थोड़ा और आगे चलने पर उन्हें एक झील दिखाई दी और उन दोनों ने पानी में नहाने का विचार बनाया । पहला दोस्त जिसे थप्पड़ लगा था, दलदल में फँस गया और डूबने लगा । तब दूसरे दोस्त ने उसकी जान बचाई । डूबने से बचने पर उसने एक पत्थर पर लिखा, “आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मेरी जान बचाई” । इस पर दूसरे दोस्त ने पूछा कि जब मैनें तुम्हें थप्पड़ मारा तब तुमने रेत पर लिखा पर जब मैंने तुम्हारी जान बचाई तब तुमने पत्थर पर लिखा, ऐसा तुमने क्यों किया ? इस पर पहले दोस्त ने उत्तर दिया, “जब कोई तुम्हें दुख पहुँचाता है तो उसे रेत पर लिखना चाहिए जिससे क्षमा की आँधी उसे मिटा सके। पर जब कोई तुम्हारे साथ भलाई करता है तो उसे पत्थर पर लिखना चाहिए जिससे समय की हवा भी उसे मिटा न सके।”

    अपने साथ किए गए बुरे बर्ताव को रेत पर और भलाई को पत्थर पर लिखना सीखिए।

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
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    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #19 on: April 02, 2007, 09:04:03 PM »
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  • जय सांई राम।।।

    गुरु की शिक्षा

    पुराने जमाने की बात है। एक राजा ने अपने राजकुमार को शिक्षा पाने के लिए गुरु के आश्रम में भेजा। राजकुमार ने आश्रम के नियम और कायदे का पालने करते हुए मेहनत से शिक्षा पूरी की। शिक्षा पूरी होने के बाद जब राजकुमार के घर जाने का समय आया, तो राजा अपने बेटे को लेने आश्रम पहुंचे। गुरु ने राजा का पूरा सम्मान किया और राजकुमार की खूब प्रशंसा की। आश्रम के सभी शिष्य उस समय वहां उपस्थित थे। राजकुमार ने गुरु के चरणों में प्रणाम करके विदा मांगी। गुरु बोले, 'बेटा, जाने से पहले मेरी छड़ी लाकर दे दो।'

    राजकुमार ने गुरु की छड़ी लाकर उन्हें दी। गुरु छड़ी लेकर खड़े हुए फिर सबके सामने उन्होंने राजकुमार को दो छड़ी कस कर जमाईं। गुरु के इस व्यवहार से आश्रम के सभी शिष्य आश्चर्य में पड़ गए, क्योंकि आज तक गुरु ने किसी शिष्य को छड़ी से मारने की बात तो दूर, किसी को डांटा तक नहीं था। वह सभी शिष्यों को बेटे की तरह मानते थे। मार खाकर भी राजकुमार निविर्कार भाव से खड़ा था, जैसे कुछ हुआ ही न हो, लेकिन राजा को क्रोध आ गया। वह बोले, 'आचार्यवर, आपने मेरे बेटे को किस अपराध के लिए दंडित किया है। मुझे तो कुछ दिखाई नहीं पड़ा।'

    गुरु मुस्करा कर बोले, 'राजन, आप इसे नहीं समझेंगे। राजकुमार सभी शिष्यों में सर्वोत्तम है। बहुत विनम्र है, आज्ञाकारी है, लेकिन उसकी शिक्षा का अंतिम पाठ अभी पूरा नहीं हुआ था। अब पूरा हो गया है। अब वह घर जा सकता है।'

    ' मैं कुछ समझा नहीं आचार्यवर।' राजा ने कहा। आचार्य बोले, 'महाराज, आप राज्य के शासक हैं। अपनी प्रजा को आप कठोर दंड देने में जरा भी संकोच नहीं करते। कल को आप का बेटा आपका उत्तराधिकारी होगा। आप की तरह इसे भी दूसरों को दंड देना पड़ेगा। उस समय इसको इतना अनुभव तो होना ही चाहिए कि किसी को दंड देते समय उसके मन की दशा क्या होती है। राजन, सफल शासक वही होता है जो दूसरों की वेदना की अनुभूति करने में सक्षम हो। मैंने राजकुमार को उसी का अनुभव कराया है।'

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

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    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #20 on: April 03, 2007, 08:08:21 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    ताबूत

    एक बार एक किसान बहुत बूढ़ा होने के कारण खेतों में काम नहीं कर सकता था।  वह सारा दिन खेत के किनारे पेड़ की छाँव में बैठा रहता था।  उसका बेटा खेत में काम करता रहता और रह-रह के सोचता कि  उसके पिता का जीवन व्यर्थ है क्योंकि वह अब कोई काम करने लायक नहीं रहा।  यह सोच-सोच कर उसका बेटा एक दिन इतना दुखी हो गया कि उसने लकड़ी का एक ताबूत बनाया और उसे घसीट कर पेड़ के पास ले गया।  उसने अपने पिता को उस ताबूत में लेटने के लिए कहा।  किसान एक शब्द भी बोले बिना उस ताबूत में लेट गया।  ताबूत का ढक्कन बंद करके बेटा ताबूत को घसीटता हुआ खेत के किनारे ले गया जहाँ एक गहरी खाई थी।  जैसे ही बेटा ताबूत को खाई में फैंकने लगा, ताबूत के अंदर से पिता ने उसे पुकारा।  बेटे ने ताबूत खोला तो अंदर लेटे उसके पिता ने शांत भाव से कहा कि मैं जानता हूँ कि तुम मुझे खाई में फैंकने वाले हो पर उससे पहले मैं तुम्हें कुछ कहना चाहता हूँ।  बेटे ने पूछा कि अब क्या है?  तब उसके पिता ने कहा कि तुम चाहो तो बेशक मुझे खाई में फैंक दो पर इस बढ़िया ताबूत को नहीं फैंको।  भविष्य में तुम्हारे बूढ़े होने पर तुम्हारे बच्चों को इसकी जरुरत पड़ेगी।

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #21 on: April 03, 2007, 11:54:22 AM »
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  • Thank you Baba. Thank you all. I am enjoying all the topics under section for kids. Sai bless you all.
    Om Sai Ram !

    -Anju

    "Abandon all varieties of religion and just surrender unto Me. I shall deliver you from all sinful reactions. Do not fear."

    Offline tana

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #22 on: April 04, 2007, 12:10:08 AM »
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  • om sai ram....

    LITTLE GIRL...

    Little girl and her father were crossing a bridge. The father was kind
    of scared so he asked his little daughter, "Sweetheart, please hold my
    hand so that you don't fall into the river."

    The little girl said, "No, Dad. You hold my hand."

    "What's the difference?" Asked the puzzled father.

    "There's a big difference," replied the little girl. "If I hold your hand
    and something happens to me, chances are that I may let your hand go.
    But if you hold my hand, I know for sure that no matter what happens, you
    will never let my hand go."

    In any relationship, the essence of trust is not in its bind, but in its
    bond. So hold the hand of the person whom you love rather than
    expecting them to hold yours...


    This post is too short..........but carries a lot of feeling ...isn't it !

    jai sai ram...
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
    Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

    May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
    May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #23 on: April 04, 2007, 01:00:29 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    चार सवाल
     
    एक बार एक राजा ने अपने मंत्री से कहा, 'मुझे इन चार प्रश्नों के जवाब दो। जो यहां हो वहां नहीं, दूसरा- वहां हो यहां नहीं, तीसरा- जो यहां भी नहीं हो और वहां भी न हो, चौथा- जो यहां भी हो और वहां भी।'

    मंत्री ने उत्तर देने के लिए दो दिन का समय मांगा। दो दिनों के बाद वह चार व्यक्तियों को लेकर राज दरबार में हाजिर हुआ और बोला, 'राजन! हमारे धर्मग्रंथों में अच्छे-बुरे कर्मों और उनके फलों के अनुसार स्वर्ग और नरक की अवधारणा प्रस्तुत की गई है। यह पहला व्यक्ति भ्रष्टाचारी है, यह गलत कार्य करके यद्यपि यहां तो सुखी और संपन्न दिखाई देता है, पर इसकी जगह वहां यानी स्वर्ग में नहीं होगी। दूसरा व्यक्ति सद्गृहस्थ है। यह यहां ईमानदारी से रहते हुए कष्ट जरूर भोग रहा है, पर इसकी जगह वहां जरूर होगी। तीसरा व्यक्ति भिखारी है, यह पराश्रित है। यह न तो यहां सुखी है और न वहां सुखी रहेगा। यह चौथा व्यक्ति एक दानवीर सेठ है, जो अपने धन का सदुपयोग करते हुए दूसरों की भलाई भी कर रहा है और सुखी संपन्न है। अपने उदार व्यवहार के कारण यह यहां भी सुखी है और अच्छे कर्म करने से इसका स्थान वहां भी सुरक्षित है।' 

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

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    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline tana

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #24 on: April 04, 2007, 07:08:31 AM »
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  • om sai ram...

    WHITE HAIRS...

    One day, a little girl was sitting and watching her mother do the dishes at the kitchen sink.

    She suddenly notices that her mother has several strands of white hair sticking out in contrast on her brunette head.

    She looked at her mother and inquisitively asked, "Why are some of your hairs white, Mom?"

    Her mother replied, "Well, every time that you do something wrong and make me cry or unhappy, one of my hairs turns white."

    The little girl thought about this revelation for a while, and then said,

    "Mom, how come all of grandma's hairs are white?"

    :)  :D  ;D  :)  :D  ;D


    jai sai ram...
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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #25 on: April 04, 2007, 07:52:39 AM »
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  • Jai Sai Ram. Very nice humorous short story dear Tana ji. keep it going. We need such smiles/laughs.
    Om Sai Ram !

    -Anju

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    Offline Sai ka Tej

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #26 on: April 04, 2007, 08:06:37 AM »
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  • जय सांई राम़।।।

    रेत और पत्थर

    एक बार दो दोस्त रेगिस्तान में से होकर कहीं जा रहे थे । रास्ते में उनमें किसी बात पर बहस हो गई और एक दोस्त ने दूसरे दोस्त को थप्पड़ मार दिया । जिस दोस्त को थप्पड़ मारा गया था वह बहुत दुखी हुआ पर उसने बिना कुछ बोले रेत पर लिखा, “आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझे थप्पड़ मारा” । थोड़ा और आगे चलने पर उन्हें एक झील दिखाई दी और उन दोनों ने पानी में नहाने का विचार बनाया । पहला दोस्त जिसे थप्पड़ लगा था, दलदल में फँस गया और डूबने लगा । तब दूसरे दोस्त ने उसकी जान बचाई । डूबने से बचने पर उसने एक पत्थर पर लिखा, “आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मेरी जान बचाई” । इस पर दूसरे दोस्त ने पूछा कि जब मैनें तुम्हें थप्पड़ मारा तब तुमने रेत पर लिखा पर जब मैंने तुम्हारी जान बचाई तब तुमने पत्थर पर लिखा, ऐसा तुमने क्यों किया ? इस पर पहले दोस्त ने उत्तर दिया, “जब कोई तुम्हें दुख पहुँचाता है तो उसे रेत पर लिखना चाहिए जिससे क्षमा की आँधी उसे मिटा सके। पर जब कोई तुम्हारे साथ भलाई करता है तो उसे पत्थर पर लिखना चाहिए जिससे समय की हवा भी उसे मिटा न सके।”

    अपने साथ किए गए बुरे बर्ताव को रेत पर और भलाई को पत्थर पर लिखना सीखिए।

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।


    JAI SAI RAM

    ramesh uncle

    ret pe likha hua mit jata hai par stone par likha hua kabhi nahi mitta :) :)

    sai ram
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    Offline Kavitaparna

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #27 on: April 04, 2007, 10:12:19 AM »
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  • om sri sai ram

    Dear Kids, This is another small story told by Ramesh uncle.

    The Story of a Donkey

    A washer man had 10 donkeys he used to take to the river with him to haul clothes on. While he was working or sleeping, he would tie them up so they wouldn't stray off. One day when he went to tie them up, he found he only had 9 ropes. He tied 9 donkeys and was holding the 10th by the ear wondering what he should do.

    A saint was passing by and asked him what he was doing. The washer man explained his dilemma and asked him for advice. The saint told him he only had to pretend he had a rope in his hands and perform the motions of tying the donkey up and that he would stay. So the washer man followed his advice and to his surprise, the donkey stayed all night while the washer man slept. In the morning when he was ready to leave the river, the washer man untied the donkeys and began his journey home. But the one donkey who had not really been tied refused to move.
     
    The washer man was puzzled by this and was tugging on the donkeys ear to move him along. The donkey that had been tied with only an imaginary rope would not move. The saint reappeared again and the washer man sought his advice.  The saint asked him if he had untied the donkey and the washer man said no and asked why he would need to since it was just an imaginary rope. The saint replied that donkeys are a lot like people in that they get caught up in an imaginary life and are under the illusion of bondage. So the washer man followed his directions and pretended to untie the donkey. The donkey then moved on along his way to the village with the others.

    We create bondages for ourselves with our imagination.
    The truth is that we are free. Untie yourself from
    the maya  and free yourself from your mind.

    JAI SAI RAM
    OM SAI NAMO NAMAHA SRI SAI NAMO NAMAHA
    JAI JAI SAI NAMO NAMAHA SADGURU SAI NAMO NAMAHA



    kavita

    Offline Kavitaparna

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #28 on: April 04, 2007, 10:16:01 AM »
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  • om sri sai ram

    Dear Kids, Sai Ram! and yet another short story for U from Subha Aunty ji.

    Precious Gift

    A wise woman who was traveling in the mountains found a precious stone in a stream.

    The next day she met another traveler who was hungry, and the wise woman opened her bag to share her food. The hungry traveler saw the precious stone and asked the woman to give it to him.

    She did so without hesitation.

    The traveler left rejoicing in his good fortune. He knew the stone was worth enough to give him security for a lifetime. But, a few days later, he came back to return the stone to the wise woman.

    "I've been thinking," he said.

    "I know how valuable this stone is, but I give it back in the hope that you can give me something even more precious. Give me what you have within you that enabled you to give me this stone."

    Sometimes it's not the wealth you have but what's inside you that others need.

    subhasrini
    OM SAI NAMO NAMAHA SRI SAI NAMO NAMAHA
    JAI JAI SAI NAMO NAMAHA SADGURU SAI NAMO NAMAHA



    kavita

    Offline Kavitaparna

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #29 on: April 04, 2007, 10:42:03 AM »
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  • OM SRI SAI RAM

    Dear Kids, Sai Ram!

    Now, I will tell U one small story that I read in Chandamama - children magazine when I was 7 or 8 year old.

    In one village, one person named Totaram used to irritate all the others by betting on idiotic questions thinking that he is very knowledgeable and the villagers had a tough time facing him.

    So they started to either avoid him or run away from his sight altogether or just be a victim to his actions.

    One day, Ramu, a 3rd standard student was walking on the way and found everyone running away or hiding in houses seeing  Totaram coming that way. Ramu thought of teaching him a lesson.

    As Ramu neared, Totaram asked him that he would pay him Rs.10 if he answered his question and if he could not, then he has to pay Rs.10 to Totaram. Then Ramu said "Ok uncle. But, I will also ask you one question. But, you have to pay me Rs.20 if you can not answer since I am younger than you".

    Totaram thought " How innocent this boy is, I can get Rs.30 since I am knowledgeable and can answer any stupid question while, my idiotic question can not be answered by this boy" and said Ok to Ramu.

    Totaram Asked Ramu "How long the beak of a green crow would be ?"

    This is definitely something no one can answer. Because, first of all, there will be no green crow. Then how to tell about the length of its beak ?

    Ramu gave Rs.10 to Totaram and by then a crowd gathered there. Now it was the turn of Ramu to ask. Now, he asked Totaram "How long the beak of a green crow would be". Now, Totaram could not answer and had to pay him Rs.20.

    From that day onwards, he did not bother anyone in the village.

    Thus, Ramu gave a Tit for Tat to Totaram.

    Jai Sai Ram

     
    « Last Edit: April 04, 2007, 11:41:30 AM by Kavitaparna »
    OM SAI NAMO NAMAHA SRI SAI NAMO NAMAHA
    JAI JAI SAI NAMO NAMAHA SADGURU SAI NAMO NAMAHA



    kavita

     


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