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Author Topic: SMALL STORIES  (Read 112529 times)

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Offline ShAivI

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  • बाबा मुझे अपने ह्र्दय से लगा लो, अपने पास बुला लो।
Re: SMALL STORIES
« Reply #375 on: May 29, 2015, 05:34:32 AM »
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  • ॐ साईं राम !!!

    गुणी बेटा

    गाँव के कुएँ से तीन महिलाऐ पानी भर रही थी
    एक महिला का पुत्र वहाँ से निकला तो
    उसे देख कर वह महिला बोली,
    देखो वह मेरा पुत्र है यहाँ का सबसे बड़ा पहलवान है।

    फिर दूसरी महिला का पुत्र वहाँ से गुजरा
    जिसे देख कर वो महिला बोली, देखो ये मेरा पुत्र बड़ा विद्वान है।

    तभी तीसरी महिला का पुत्र वहा से जा रहा था,
    माँ को देख कर माँ के पास आया,
    पानी का घड़ा उठा लिया और बोला, चलो माँ घर चले।

    उस माँ की ख़ुशी भरी आँखों के सामने
    उन दोनो महिलाओ की नज़रे झुक गयी,
    वो समझ चुकी थी कि सुपुत्र कौन है।

    Moral:- गुण बताये नही जाते अपने आप दिख जाते हैं।


    ॐ साईं राम, श्री साईं राम, जय जय साईं राम !!!

    If you are sad n in pain, Be as the ocean, and release. The ocean tides don't pause and hold in anything, they ebb...and then they flow. Only briefly holding on top of a wave for a moment. If something from your past bubbles up, simply take a deep breath, and let it go. More love!
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    भगवान का स्मरण
    « Reply #376 on: June 05, 2015, 06:20:39 AM »
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  • ॐ साईं राम !!!

    भगवान का स्मरण

    एक बार संत कबीर से किसी ने पूछा,
    'आप दिन भर कपड़ा बुनते रहते हैं तो भगवान का स्मरण कब करते हैं?'

    कबीर उस व्यक्ति को लेकर अपनी झोपड़ी से बाहर आ गए।
    बोले, 'यहां खड़े रहो।

    तुम्हारे सवाल का जवाब सीधे न देकर, मैं उसे दिखा सकता हूं।'
    कबीर ने दिखाया कि एक औरत पानी की गागर सिर पर रखकर लौट रही थी।

    उसके चेहरे पर प्रसन्नता और चाल में रफ्तार थी।

    उमंग से भरी हुई वह नाचती हुई-सी चली जा रही थी।

    गागर को उसने पकड़ नहीं रखा था, फिर भी वह पूरी तरह संभली हुई थी।

    कबीर ने कहा, 'उस औरत को देखो।
    वह जरूर कोई गीत गुनगुना रही है।
    शायद कोई प्रियजन घर आया होगा।
    वह प्यासा होगा, उसके लिए वह पानी लेकर जा रही है।
    मैं तुमसे जानना चाहता हूं कि उसे गागर की याद होगी या नहीं।'

    कबीर की बात सुनकर उस व्यक्ति ने जवाब दिया,
    'उसे गागर की याद नहीं होती तो अब तक तो गागर नीचे ही गिर चुकी होती।'

    कबीर बोले, 'यह साधारण सी औरत सिर पर गागर रखकर रास्ता पार करती है।
    मजे से गीत गाती है, फिर भी गागर का ख्याल उसके मन में बराबर बना हुआ है।
    और तुम मुझे इससे भी गया गुजरा समझते हो कि मैं कपड़ा बुनता हूं
    और परमात्मा का स्मरण करने के लिए मुझे अलग से वक्त की जरूरत है।
    मेरी आत्मा हमेशा उसी में लगी रहती है।

    कपड़ा बुनने के काम में शरीर लगा रहता है और
    आत्मा प्रभु के चरणों में लीन रहती है।
    आत्मा हर समय प्रभु के चिंतन में डूबी रहती है।
    इसलिए ये हाथ भी आनंदमय होकर कपड़ा बुनते रहते हैं।




    ॐ साईं राम, श्री साईं राम, जय जय साईं राम !!!
    « Last Edit: June 05, 2015, 06:27:48 AM by ShAivI »

    If you are sad n in pain, Be as the ocean, and release. The ocean tides don't pause and hold in anything, they ebb...and then they flow. Only briefly holding on top of a wave for a moment. If something from your past bubbles up, simply take a deep breath, and let it go. More love!
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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #377 on: June 18, 2015, 03:36:18 AM »
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  • ॐ साईं राम !!!

    तोता

    एक सन्त के आश्रम में एक शिष्य कहीं से एक तोता ले आया
    और उसे पिंजरे में रख लिया।

    सन्त ने कई बार शिष्य से कहा कि:-
    "इसे यों कैद न करो, परतन्त्रता संसार का सबसे बड़ा अभिशाप है।”

    किन्तु शिष्य अपने बालसुलभ कौतूहल को न रोक सका
    और उस तोते को पिंजरे में बन्द किये रहा।

    तब सन्त ने सोचा कि
    “तोते को ही स्वतंत्र होने का पाठ पढ़ाना चाहिए”...

    उन्होंने पिंजरा अपनी कुटी में मँगवा लिया
    और तोते को नित्य ही सिखाने लगे:- ‘पिंजरा छोड़ दो, उड़ जाओ।’

    कुछ दिन में तोते को वाक्य भली भाँति रट गया।

    एक दिन पिंजरे की सफाई करते समय शिष्य से भूल से पिंजरा खुला रह गया।

    सन्त कुटी में आये तो देखा कि तोता बाहर निकल आया है
    और बड़े आराम से घूम रहा है साथ ही ऊँचे स्वर में कह भी रहा है:-
    “पिंजरा छोड़ दो, उड़ जाओ।”

    सन्त को आता देख वह पुनः पिंजरे के अन्दर चला गया
    और अपना पाठ बड़े जोर-जोर से दुहराने लगा।

    सन्त को यह देखकर बहुत ही आश्चर्य हुआ, साथ ही दुःख भी।

    वे सोचते रहे “इसने केवल शब्द को ही याद किया यदि यह इसका अर्थ भी
    जानता होता- तो यह इस समय इस पिंजरे से स्वतंत्र हो गया होता....

    ठीक इसी तरह हम सब भी ज्ञान की बड़ी-बड़ी बातें सीखते और करते तो हैं
    किन्तु उनका मर्म नहीं समझ पाते और उचित समय तथा अवसर प्राप्त होने
    पर भी उसका लाभ नहीं उठा पाते और जहाँ के तहाँ रह जाते हैं...।


    ॐ साईं राम, श्री साईं राम, जय जय साईं राम !!!

    If you are sad n in pain, Be as the ocean, and release. The ocean tides don't pause and hold in anything, they ebb...and then they flow. Only briefly holding on top of a wave for a moment. If something from your past bubbles up, simply take a deep breath, and let it go. More love!
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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #378 on: June 23, 2015, 05:59:43 AM »
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  • ॐ साईं राम !!!



    ॐ साईं राम, श्री साईं राम, जय जय साईं राम !!!

    If you are sad n in pain, Be as the ocean, and release. The ocean tides don't pause and hold in anything, they ebb...and then they flow. Only briefly holding on top of a wave for a moment. If something from your past bubbles up, simply take a deep breath, and let it go. More love!
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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #379 on: July 22, 2015, 03:12:35 AM »
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  • ॐ साईं राम !!!

    सोच बदलो , देश बदलेगा...

    एक माँ 6 साल के बच्चे को पीटते हुए बोली,
    "नालायक, तूने नीची जात के घर की रोटी खायी,
    तू नीची जात का हो गया
    तूने अपना धर्म भ्रष्ट कर लिया।
    अब क्या होगा?

    बच्चे का मासूम सवाल :
    माँ, मैने तो एक बार ही उनके घर की रोटी खाई,
    तो मैं नीची जात का हो गया..!!
    लेकिन वो लोग तो हमारे घर की रात
    की बची रोटी बर्षो से खा रहे हैं,
    तो वो लोग ऊंची जात के क्यों नही हो पाए ?

    सोच बदलो , देश बदलेगा...


    ॐ साईं राम, श्री साईं राम, जय जय साईं राम !!!

    If you are sad n in pain, Be as the ocean, and release. The ocean tides don't pause and hold in anything, they ebb...and then they flow. Only briefly holding on top of a wave for a moment. If something from your past bubbles up, simply take a deep breath, and let it go. More love!
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    • बाबा मुझे अपने ह्र्दय से लगा लो, अपने पास बुला लो।
    Re: SMALL STORIES
    « Reply #380 on: October 23, 2015, 03:57:05 AM »
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  • ॐ साईं राम !!!

    सौ ऊंट ...

    किसी शहर में, एक आदमी अपनी ज़िन्दगी से खुश नहीं था ,
    हर समय वो किसी न किसी समस्या से परेशान रहता था .

    एक बार शहर से कुछ दूरी पर एक महात्मा का काफिला रुका .
    शहर में चारों और उन्ही की चर्चा थी.

    बहुत से लोग अपनी समस्याएं लेकर उनके पास पहुँचने लगे ,
    उस आदमी ने भी महात्मा के दर्शन करने का निश्चय किया .

    छुट्टी के दिन सुबह -सुबह ही उनके काफिले तक पहुंचा .
    बहुत इंतज़ार के बाद उसका का नंबर आया .

    वह बाबा से बोला ,” बाबा , मैं अपने जीवन से बहुत दुखी हूँ ,
    हर समय समस्याएं मुझे घेरी रहती हैं , कभी घर पर अनबन हो जाती है ,
    और कभी अपने सेहत को लेकर परेशान रहता हूँ ….

    बाबा कोई ऐसा उपाय बताइये कि मेरे जीवन से सभी समस्याएं ख़त्म हो जाएं
    और मैं चैन से जी सकूँ ?

    बाबा मुस्कुराये और बोले ,
    “ पुत्र , आज बहुत देर हो गयी है मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर कल सुबह दूंगा …
    लेकिन क्या तुम मेरा एक छोटा सा काम करोगे …?”

    “हमारे काफिले में सौ ऊंट  हैं ,
    मैं चाहता हूँ कि आज रात तुम इनका खयाल रखो …
    जब सौ के सौ ऊंट बैठ जाएं तो तुम भी सो जाना …”,



    ऐसा कहते हुए महात्मा अपने तम्बू में चले गए ..

    अगली सुबह महात्मा उस आदमी से मिले और पुछा ,
    “ कहो बेटा , नींद अच्छी आई .”

    वो दुखी होते हुए बोला :
    “कहाँ बाबा , मैं तो एक पल भी नहीं सो पाया.
    मैंने बहुत कोशिश की पर मैं सभी ऊंटों को नहीं बैठा पाया ,
    कोई न कोई ऊंट  खड़ा हो ही जाता …!!!

    बाबा बोले , “ बेटा , कल रात तुमने अनुभव किया कि चाहे कितनी भी कोशिश कर लो
    सारे ऊंट  एक साथ नहीं बैठ सकते …

    तुम एक को बैठाओगे तो कहीं और कोई दूसरा खड़ा हो जाएगा.

    इसी तरह तुम एक समस्या का समाधान करोगे तो किसी
    कारणवश दूसरी खड़ी हो जाएगी ..

    पुत्र जब तक जीवन है ये समस्याएं तो बनी ही रहती हैं …
    कभी कम तो कभी ज्यादा ….”

    “तो हमें क्या करना चाहिए ?” , आदमी ने जिज्ञासावश पुछा .

    “इन समस्याओं के बावजूद जीवन का आनंद लेना सीखो …

    कल रात क्या हुआ ?
    1) कई ऊंट रात होते -होते खुद ही बैठ गए ,
    2) कई तुमने अपने प्रयास से बैठा दिए ,
    3) बहुत से ऊंट  तुम्हारे प्रयास के बाद भी नहीं बैठे …
        और बाद में तुमने पाया कि उनमे से कुछ खुद ही बैठ गए ….

    कुछ समझे ….??
    समस्याएं भी ऐसी ही होती हैं..

    1) कुछ तो अपने आप ही ख़त्म हो जाती हैं ,
    2) कुछ को तुम अपने प्रयास से हल कर लेते हो …
    3) कुछ तुम्हारे बहुत कोशिश करने पर भी हल नहीं होतीं ,

    ऐसी समस्याओं को समय पर छोड़ दो …
    उचित समय पर वे खुद ही ख़त्म हो जाती हैं.!!

    जीवन है, तो कुछ समस्याएं रहेंगी ही रहेंगी ….
    पर इसका ये मतलब नहीं की तुम दिन रात उन्ही के बारे में सोचते रहो …

    समस्याओं को एक तरफ रखो
    और जीवन का आनंद लो…

    चैन की नींद सो …

    जब उनका समय आएगा वो खुद ही हल हो जाएँगी"...

    बिंदास मुस्कुराओ क्या ग़म हे,..
    ज़िन्दगी में टेंशन किसको कम हे..

    अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम हे..
    जिन्दगी का नाम ही
    कभी ख़ुशी कभी ग़म हे..!!

    ॐ साईं राम, श्री साईं राम, जय जय साईं राम !!!

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    • बाबा मुझे अपने ह्र्दय से लगा लो, अपने पास बुला लो।
    Re: SMALL STORIES
    « Reply #381 on: November 01, 2015, 10:38:38 AM »
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  • ॐ साईं राम !!!

    हम कहा थे??

    एक बार दो दोस्त घुमाते हुए एक महल के पास पहुच गए
    तो पहले दोस्त ने उस शानदार महल को देखकर कहा की 
    जब इनमे रहने वालो की किस्मत लिखी जा रही थी तब हम कहा थे??

    दुसरे दोस्त ने पहले का हाथ पकड़ कर अस्पताल ले गया
    और मरीजो को दिखाते हुए कहा की जब इनकी किस्मत लिखी
    जा रही थी तब हम कहा थे??

    भगवान ने हमें जो भी दिया उसमे हमेशा खुश रहिये
    किसी संत ने क्या खूब कहा है की---

    तुम अपने जूतों को देखकर क्यों परेशान होते हो
    दुनिया में तो कई लोगो ऐसे है जिनके तो पैर ही नहीं है
    जितना दिया है बहुत कुछ दिया है पल पल दाता तेरा शुक्रिया है

    ॐ साईं राम, श्री साईं राम, जय जय साईं राम !!!

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #382 on: November 14, 2015, 07:09:10 AM »
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  • ॐ साईं राम !!!

    मेरी हैसीयत से ज्यादा मेरी थाली मे तूने परोसा है.

    एक डलिया में संतरे बेचती बूढ़ी औरत से एक युवा अक्सर संतरे खरीदता ।
    अक्सर, खरीदे संतरों से एक संतरा निकाल उसकी एक फाँक चखता और कहता,
    "ये कम मीठा लग रहा है, देखो !"
    बूढ़ी औरत संतरे को चखती और प्रतिवाद करती
    "ना बाबू मीठा तो है!"
    वो उस संतरे को वही छोड़, बाकी संतरे ले गर्दन झटकते आगे बढ़ जाता।

    युवा अक्सर अपनी पत्नी के साथ होता था,
    एक दिन पत्नी नें पूछा "ये संतरे हमेशा मीठे ही होते हैं,
    पर यह नौटंकी तुम हमेशा क्यों करते हो ?

    "युवा ने पत्नी को एक मधुर मुस्कान के साथ बताया -
    "वो बूढ़ी माँ संतरे बहुत मीठे बेचती है, पर खुद कभी नहीं खाती,
    इस तरह मै उसे संतरा खिला देता हूँ ।

    एक दिन, बूढ़ी माँ से, उसके पड़ोस में सब्जी बेचनें वाली
    औरत ने सवाल किया,
    - ये झक्की लड़का संतरे लेते इतनी चख चख करता है, पर संतरे तौलते
    हुए मै तेरे पलड़े को देखती हूँ, तुम हमेशा उसकी चख चख में, उसे
    ज्यादा संतरे तौल देती है ।

    बूढ़ी माँ नें साथ सब्जी बेचने वाली से कहा -
    "उसकी चख चख संतरे के लिए नहीं,
    मुझे संतरा खिलानें को लेकर होती है,
    वो समझता है में उसकी बात समझती नही,
    मै बस उसका प्रेम देखती हूँ, पलड़ो पर संतरे अपनें आप बढ़ जाते हैं ।

    मेरी हैसीयत से ज्यादा मेरी थाली मे तूने परोसा है.
    तू लाख मुश्किलें भी दे दे मालिक, मुझे तुझपे भरोसा है.
    एक बात तो पक्की है की...
    छीन कर खानेवालों का कभी पेट नहीं भरता
    और बाँट कर खानेवाला कभी भूखा नहीं मरता...!!!



    ॐ साईं राम, श्री साईं राम, जय जय साईं राम !!!

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #383 on: November 22, 2015, 01:05:58 AM »
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  • ॐ साईं राम !!!


    एक युवा हो रहे किशोर ने एक धनी व्यक्ति का ठाठ-बाट देखा ?
    उसने सोचा धनवान बनना चाहिए।
    कई दिन तक उसी की तरह कमाई में लगने का प्रयास किया भी
    और कुछ पैसे कमा भी लिए। इसी बीच उसकी भेंट एक विद्वान से हुई।
    उसने विद्वान की विद्वता-वाक्पटुता से प्रभावित होकर
    कमाई करना छोड़ दिया और पढ़ने में लग गया।

    अभी थोड़ा बहुत सीख ही पाया था कि उसकी भेंट
    एक संगीतज्ञ से हो गई। उसे संगीत में अधिक आकर्षण लगा।
    उस दिन से पढ़ाई बंद कर उसने संगीत सीखना आरंभ कर दिया।
    काफी उम्र बीतने पर भी न वह पैसे वाला बना,
    न विद्वान, न संगीतज्ञ, न समाजसेवी या नेता।

    एक दिन अपने दुख के कारण उसने एक महात्मा को बताया।
    उनने कहा-“बेटा! सारी दुनिया में आकर्षण भरा पड़ा है।
    एक निश्चय करो और फिर जीते जी उसी पर अमल करो,
    तुम्हारी उन्नति अवश्य होगी। कई जगह गड्ढे खोदोगे
    तो न पानी मिलेगा, न कुआँ खोद पाओगे।”

    युवक संकेत समझ गया और एक निष्ठ भाव से लग गया।

    ॐ साईं राम, श्री साईं राम, जय जय साईं राम !!!

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #384 on: January 14, 2016, 02:47:47 AM »
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  • ॐ साईं राम !!!

    परमात्मा को पाना है तो मैं मैं के बंधनों को छोड़ एक तेरा में समा जाओ।
    एक आदमी रात को झोपड़ी में बैठकर
    एक छोटे से दीये को जलाकर कोई शास्त्र पढ़ रहा था ।
    आधी रात बीत गई जब वह थक गया तो
    फूंक मार कर उसने दीया बुझा दिया ।
    लेकिन वह यह देख कर हैरान हो गया कि
    जब तक दीया जल रहा था ।
    पूर्णिमा का चांद बाहर खड़ा रहा ।
    लेकिन जैसे ही दीया बुझ गया
    उसकी टिमटिमाहट अँधेरे में कहीं खो गई ।
    तो चांद की किरणें उस कमरे में फैल गई ।
    वह आदमी बहुत हैरान हुआ यह देख कर कि
    एक छोटा सा दीया इतने बड़े चांद को बाहर रोके रहा ।
    इसी तरह हमने भी अपने जीवन में अहंकार के बहुत छोटे-छोटे दीए जला रखे हैं
    जिसके कारण परमात्मा का चांद बाहर ही खड़ा रह जाता है ।
    आज मनुष्य ने स्वयं को मैं-मैं के अनेक प्रकार के
    बंधनों और अहंकार की बेड़ियोंमें बांध रखा है ।
    यह सब अज्ञान अंधकार और अहंकार ही
    उसे परमात्मा के समीप नहीं जाने देता
    इसलिए परमात्मा को पाना है तो इस अंधकार से बाहर आना पड़ेगा ।
    इसलिए अब हमें यही पुरुषार्थ करना है कि
    हमारे अंदर जितने भी प्रकार के मैं मैं के दीये जल रहे हैं ,
    जो परमात्मा के प्रकाश की किरणों को भीतर आने से रोक रहे हैं उन्हें बुझाएं ।
    और अपने जीवन को परमात्मा के प्रकाश से भर दें
    ताकि जीवन में फैला अज्ञान अंधकार समाप्त हो जाएं
    और जीवन खुशियों से भरपूर हो जाएं ।

    ॐ साईं राम, श्री साईं राम, जय जय साईं राम !!!

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #385 on: January 20, 2016, 01:14:02 AM »
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  • ॐ साईं राम !!!

    एक दिन किसी निर्माण के दौरान
    भवनकी छटी मंजिल से सुपर वाईजर ने
    नीचेकार्य करने वाले मजदूर को आवाज दी.
    निर्माण कार्य की तेज आवाज के
    कारण नीचे काम करने वाला मजदूर कुछ समझ
    नहीं सका की उसका सुपरवाईजर उसे
    आवाज दे रहा है.

    फिर सुपरवाईजर ने उसका ध्यान आकर्षित
    करने के लिए एक १० रु का नोट नीचे
    फैंका, जो ठीक मजदूर के सामने जा कर गिरा
    मजदूर ने नोट उठाया और अपनी जेब मे
    रख लिया, और फिर अपने काम मे लग गया .

    अब उसका ध्यान खींचने के लिए सुपर
    वाईजर ने पुन: एक ५०० रु का नोट
    नीचे फैंका . उस मजदूर ने फिर वही किया और नोट
    जेब मे रख कर अपने काम मे लग गया .

    ये देख अब सुपर वाईजर ने एक
    छोटा सा पत्थर का टुकड़ा लिया और
    मजदूर के उपर फैंका जो सीधा मजदूर के सिर
    पर लगा. अब मजदूर ने ऊपर देखा और
    उसकी सुपर वाईजर से बात चालू हो गयी.

    ये वैसा ही है जो हमारी जिन्दगी मे
    होता है..... भगवान् हमसे संपर्क करना ,
    मिलना चाहता है, लेकिन हम दुनियादारी के
    कामो मे व्यस्त रहते है, अत: भगवान् को याद नहीं करते.

    भगवान् हमें छोटी छोटी खुशियों के
    रूप मे उपहार देता रहता है, लेकिन हम उसे
    याद नहीं करते, और वो खुशियां और उपहार
    कहाँ से आये ये ना देखते हुए,उनका उपयोग
    कर लेते है, और भगवान् को याद नहीं करते.
    भगवान् हमें और भी खुशियों रूपी उपहार
    भेजता है, लेकिन उसे भी हम हमारा भाग्य
    समझ कर रख लेते है, भगवान्का  धन्यवाद
    नहीं करते , उसे भूल जाते है.

    तब भगवान् हम पर एक छोटा सा पत्थर
    फैंकते है , जिसे हम कठिनाई कहते है,
    और तुरंत उसके निराकरण के लिए भगवान्
    की और देखते है,याद करते है.

    यही जिन्दगी मे हो रहा है. यदि हम हमारी छोटी से
    छोटी ख़ुशी भी भगवान् के साथ उसका धन्यवाद देते हुए बाँटें,
    तो हमें भगवान्के  द्वारा फैंके हुए पत्थर का इन्तजार ही नहीं करना पड़ेगा...!!!


    ॐ साईं राम, श्री साईं राम, जय जय साईं राम !!!

    If you are sad n in pain, Be as the ocean, and release. The ocean tides don't pause and hold in anything, they ebb...and then they flow. Only briefly holding on top of a wave for a moment. If something from your past bubbles up, simply take a deep breath, and let it go. More love!
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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #386 on: February 09, 2016, 12:06:22 AM »
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  • ॐ साईं राम !!!

    एक सन्यासी घूमते-फिरते एक दुकान पर आये,
    दुकान मे अनेक छोटे-बड़े डिब्बे थे,
    एक डिब्बे की ओर इशारा करते हुए सन्यासी ने
    दुकानदार से पूछा, इसमे क्या है ?
    दुकानदारने कहा - इसमे नमक है !
    सन्यासी ने फिर पूछा, इसके पास वाले मे क्या है ?
    दुकानदार ने कहा, इसमे हल्दी है !
    इसी प्रकार सन्यासी पूछ्ते गए और दुकानदार बतलाता रहा,
    अंत मे पीछे रखे डिब्बे का नंबर आया, सन्यासी ने पूछा
    उस अंतिम डिब्बे मे क्या है?दुकानदार बोला, उसमे राम-राम है !
    सन्यासी ने पूछा, यह राम-राम किस वस्तु का नाम है !
    दुकानदार ने कहा - महात्मन !
    और डिब्बों मे तो भिन्न-भिन्न वस्तुएं हैं,
    पर यह डिब्बा खाली है,
    हम खाली को खाली नही कहकर राम-राम कहते हैं !
    संन्यासी की आंखें खुली की खुली रह गई !
    ओह, तो खाली मे राम रहता है !
    भरे हुए में राम को स्थान कहाँ ?
    लोभ, लालच, ईर्ष्या, द्वेष और भली-बुरी बातों से
    जब दिल-दिमाग भरा रहेगा तो उसमें ईश्वर का वास कैसे होगा ?
    राम यानी ईश्वर तो खाली याने साफ-सुथरे मन मे ही निवास करता है !
    एक छोटी सी दुकान वाले ने सन्यासी को बहुत बड़ी बात समझा दी!

    ॐ साईं राम, श्री साईं राम, जय जय साईं राम !!!

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #387 on: February 29, 2016, 01:29:20 AM »
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  • ॐ साईं राम !!!

    एक छोटी सी घटना, और मैं अपनी बात पूरी करूं।
    बुद्ध के पास एक राजकुमार संन्यस्त हुआ।
    उसका नाम था श्रोण।
    वह बहुत भोगी आदमी था।
    भोग में जिंदगी बिताई।
    फिर त्यागी हो गया, फिर संन्यस्त हो गया।
    और जब भोगी त्यागी होता है तो अति पर चला जाता है।
    वह भी चला गया।
    अगर भिक्षु ठीक रास्ते पर चलते, तो वह आड़े-टेढ़े रास्ते पर चलता।
    अगर भिक्षु जूता पहनते, तो वह कांटों में चलता।
    भिक्षु कपड़ा पहनते, तो वह नग्न रहता।
    भिक्षु एक बार खाना खाते, तो वह दो दिन में एक बार खाना खाता।
    सूख कर हड्डी हो गया, चमड़ी काली पड़ गई।
    बड़ा सुंदर युवक था, स्वर्ण जैसी उसकी काया थी।
    दूर-दूर तक उसके सौंदर्य की ख्याति थी। पहचानना मुश्किल हो गया।
    पैर में घाव पड़ गये।

    बुद्ध छः महीने बाद उसके द्वार पर गये।
    उसके झोपड़े पर उन्होंने जाकर कहा, ‘श्रोण, एक बात पूछने आया हूं।
    मैंने सुना है कि जब तू राजकुमार था तब तुझे सितार बजाने का बड़ा शौक था, बड़ा प्रेम था।
    मैं तुझसे यह पूछने आया हूं कि सितार के तार अगर बहुत ढीले हों तो संगीत पैदा होता है?’

    श्रोण ने कहा, ‘कैसे पैदा होगा? सितार के तार ढीले हों तो संगीत पैदा होगा ही नहीं।’

    बुद्ध ने कहा, ‘और अगर तार बहुत कसे हों तो संगीत पैदा होता है?’

    श्रोण ने कहा, ‘आप भी कैसी बात पूछते हैं! अगर बहुत कसे हों तो टूट ही जायेंगे।’

    तो बुद्ध ने कहा, ‘तू मुझे बता, कैसी स्थिति में संगीत श्रेष्ठतम पैदा होगा?’

    श्रोण ने कहा, ‘एक ऐसी स्थिति है तारों की, जब न तो हम कह सकते हैं कि वे बहुत ढीले हैं
    और न कह सकते हैं कि बहुत कसे हैं; वही समस्थिति है। वहीं संगीत पैदा होता है।’

    बुद्ध उठ खड़े हुए।
    उन्होंने कहा, ‘यही मैं तुझसे कहने आया था, कि जीवन भी एक वीणा की भांति है।
    तारों को न तो बहुत कस लेना, नहीं तो संगीत टूट जायेगा। न बहुत ढीला छोड़ देना,
    नहीं तो संगीत पैदा ही न होगा।

    और दोनों के मध्य एक स्थिति है, जहां न तो त्याग है और न भोग; जहां न तो पक्ष है न विपक्ष;
    जहां न तो कुआं है न खाई; जहां हम ठीक मध्य में हैं। वहां जीवन का परम-संगीत पैदा होता है।’
    यह सूफी कथा भी उसी परम संगीत के लिए है।

    न तो नियमों को तोड़ कर उच्छृंखल हो जाना और न नियमों को मान कर गुलाम हो जाना।
    दोनों के मध्य नाजुक है रास्ता।

    इसलिए फकीरों ने कहा है: खड्ग की धार है।
    इतना बारीक है, जैसे तलवार की धार हो।
    मगर अगर समझ हो, तो वह पतला सा रास्ता राजपथ हो जाता है।

    ॐ साईं राम, श्री साईं राम, जय जय साईं राम !!!

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #388 on: April 04, 2016, 11:52:54 AM »
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  • ॐ साईं राम !!!

    बहुत समय पहले की बात है, किसी नगर में एक बेहद प्रभावशाली महंत रहते थे ।
    उन के पास शिक्षा लेने हेतु कई शिष्य आते थे। एक दिन एक शिष्य ने महंत से
    सवाल किया, स्वामीजी आपके गुरु कौन है? आपने किस गुरु से शिक्षा प्राप्त की है?”
    महंत शिष्य का सवाल सुन मुस्कुराए और बोले, मेरे हजारो गुरु हैं! यदि मै उनके
    नाम गिनाने बैठ जाऊ तो शायद महीनो लग जाए। लेकिन फिर भी मै अपने
    तीन गुरुओ के बारे मे तुम्हे जरुर बताऊंगा।

    एक था चोर।

    एक बार में रास्ता भटक गया था और जब दूर किसी गाव में पंहुचा तो बहुत देर हो गयी थी।
    सब दुकाने और घर बंद हो चुके थे। लेकिन आख़िरकार मुझे एक आदमी मिला जो एक दीवार
     में सेंध लगाने की कोशिश कर रहा था। मैने उससे पूछा कि मै कहा ठहर सकता हूं, तो वह
    बोला की आधी रात गए इस समय आपको कहीं आसरा मिलना बहुत मुश्किल होंगा,
    लेकिन आप चाहे तो मेरे साथ ठहर सकते हो। मै एक चोर हु और अगर एक चोर के साथ
    रहने में आपको कोई परेशानी नहीं होंगी तो आप मेरे साथ रह सकते है।

    वह इतना प्यारा आदमी था कि मै उसके साथ एक महीने तक रह गया! वह हर रात
    मुझे कहता कि मै अपने काम पर जाता हूं, आप आराम करो, प्रार्थना करो। जब वह
    काम से आता तो मै उससे पूछता की कुछ मिला तुम्हे? तो वह कहता की आज तो
    कुछ नहीं मिला पर अगर भगवान ने चाहा तो जल्द ही जरुर कुछ मिलेगा। वह
    कभी निराश और उदास नहीं होता था, हमेशा मस्त रहता था।

    जब मुझे ध्यान करते हुए सालों-साल बीत गए थे और कुछ भी हो नहीं रहा था तो
    कई बार ऐसे क्षण आते थे कि मैं बिलकुल हताश और निराश होकर साधना-वाधना
    छोड़ लेने की ठान लेता था। और तब अचानक मुझे उस चोर की याद आती जो
    रोज कहता था कि भगवान ने चाहा तो जल्द ही कुछ जरुर मिलेगा।

    और मेरा दूसरा गुरु एक कुत्ता था।

    एक बहुत गर्मी वाले दिन मै बहुत प्यासा था और पानी के तलाश में घूम रहा था कि
    एक कुत्ता दौड़ता हुआ आया। वह भी प्यासा था। पास ही एक नदी थी। उस कुत्ते ने आगे
    जाकर नदी में झांका तो उसे एक और कुत्ता पानी में नजर आया जो की उसकी अपनी
    परछाई थी। कुत्ता उसे देख बहुत डर गया। वह परछाई को देखकर भौकता और पीछे
    हट जाता, लेकिन बहुत प्यास लगने के कारण वह वापस पानी के पास लौट आता।
    अंततः, अपने डर के बावजूद वह नदी में कूद पड़ा और उसके कूदते ही वह परछाई भी
    गायब हो गई। उस कुत्ते के इस साहस को देख मुझे एक बहुत बड़ी सिख मिल गई।
    अपने डर के बावजूद व्यक्ति को छलांग लगा लेनी होती है। सफलता उसे ही मिलती है
    जो व्यक्ति डर का साहस से मुकाबला करता है।

    और मेरा तीसरा गुरु एक छोटा बच्चा है।


    मै एक गांव से गुजर रहा था कि मैंने देखा एक छोटा बच्चा एक जलती हुई मोमबत्ती
    ले जा रहा था। वह पास के किसी गिरजाघर में मोमबत्ती रखने जा रहा था। मजाक में ही
    मैंने उससे पूछा की क्या यह मोमबत्ती तुमने जलाई है ? वह बोला, जी मैंने ही जलाई है।
    तो मैंने उससे कहा की एक क्षण था जब यह मोमबत्ती बुझी हुई थी और फिर एक क्षण
    आया जब यह मोमबत्ती जल गई। क्या तुम मुझे वह स्त्रोत दिखा सकते हो जहा से
    वह ज्योति आई ?

    वह बच्चा हँसा और मोमबत्ती को फूंख मारकर बुझाते हुए बोला, अब आपने ज्योति को
    जाते हुए देखा है। कहा गई वह ? आप ही मुझे बताइए।

    मेरा अहंकार चकनाचूर हो गया, मेरा ज्ञान जाता रहा। और उस क्षण मुझे अपनी ही
    मूढ़ता का एहसास हुआ। तब से मैंने कोरे ज्ञान से हाथ धो लिए।

    मित्रो, शिष्य होने का अर्थ क्या है? शिष्य होने का अर्थ है पुरे अस्तित्व के प्रति खुले होना।
    हर समय हर ओर से सीखने को तैयार रहना।जीवन का हर क्षण, हमें कुछ न कुछ सीखने
    का मौका देता है। हमें जीवन में हमेशा एक शिष्य बनकर अच्छी बातो को सीखते रहना चाहिए।
    यह जीवन हमें आये दिन किसी न किसी रूप में किसी गुरु से मिलाता रहता है, यह हम पर
    निर्भर करता है कि क्या हम उस महंत की तरह एक शिष्य बनकर उस गुरु से मिलने वाली
    शिक्षा को ग्रहण कर पा रहे हैं की नहीं!



    ॐ साईं राम, श्री साईं राम, जय जय साईं राम !!!

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    Re: SMALL STORIES
    « Reply #389 on: April 13, 2016, 05:41:48 AM »
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  • ॐ साईं राम !!!

    समय का मूल्य

    एक आदमी का अंत समय नज़दीक आ गया था।
    वह रेगिस्तान के रस्ते पर जा रहा था,
    तभी उसके पास यमदूत आ गया,
    वह आदमी यमदूत को पहचान नहीं सका।
    उसे अपना पानी पिलाया ।
    फिर पूछा की आप कौन हैं और इधर कहा से आए ?
    तब उसने बताया की मैं यमदूत हूँ ।
    और तुम्हारे प्राण लेने आया हूँ ।
    यमदूत ने कहा की तुम भले आदमी हो
    तुमने मुझे पानी पिलाया,
    अतः मैं तुम्हे भाग्य की पुस्तक देता हूँ ।
    तुम इसे खोलकर अपना भाग्य बदल सकते हो ।
    पर याद रखना की तुम्हे सिर्फ 5 मिनट का समय मिलेगा ।
    यमदूत ने वह पुस्तक उसे दे दी ।
    पर इंसान तो इंसान है
    आदमी ने जैसे ही पुस्तक खोली तो
    सबसे पहले उसके पडोसी का पन्ना खुला ।
    उसका खुशहाल जीवन देखकर वह ईर्ष्या से जल गया ।
    उसने तुरंत अपनी कलम से उनके भाग्य को
    जितना बिगाड़ सकता था बिगाड़ दिया ।
    इसी तरह उसने अपने अन्य पडोसी रिश्तेदारों के भाग्य बिगड़ दिए ।
    अंत मैं उसने अपना पन्ना खोला ।
    उसमें अगले ही पल उसे अपनी मौत आती दिखी
    इससे पहले की वह अपने भाग्य मैं फेर बदल कर पाता,
    मौत ने उसे अपने आगोश मैं ले लिया ।
    क्योंकि यमदूत ने उसे सिर्फ 5 मिनट ही दिए थे ।

    कथा मर्म - दूसरों का अहित करने मैं हम अपना बहुमूल्य समय गवां देते हैं ।
    बेहतर होगा की इस समय को अपने हित मैं लगाएं.....

    ॐ साईं राम, श्री साईं राम, जय जय साईं राम !!!

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