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Author Topic: माँ दुर्गा की आरती,चालीसा सहित  (Read 6432 times)

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Offline MANAV_NEHA

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श्री दुर्गा चालीसा   

नमो नमो दुर्गे सुख करनी । नमो नमो अम्बे दुःख हरनी ।।

निराकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूं लोक फैली उजियारी ।।

शशि ललाट मुख महा विशाला । नेत्र लाल भृकुटी विकराला ।।

रुप मातु को अधिक सुहावे । दरश करत जन अति सुख पावे ।।

तुम संसार शक्ति लय कीना । पालन हेतु अन्न धन दीना ।।

अन्नपूर्णा हुई जग पाला । तुम ही आदि सुन्दरी बाला ।।

प्रलयकाल सब नाशन हारी । तुम गौरी शिव शंकर प्यारी ।।

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें । ब्रहृ विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ।।

रुप सरस्वती को तुम धारा । दे सुबुद्घि ऋषि मुनिन उबारा ।।

धरा रुप नरसिंह को अम्बा । प्रगट भई फाड़कर खम्बा ।।

रक्षा कर प्रहलाद बचायो । हिरणाकुश को स्वर्ग पठायो ।।

लक्ष्मी रुप धरो जग माही । श्री नारायण अंग समाही ।।

क्षीरसिन्धु में करत विलासा । दयासिन्धु दीजै मन आसा ।।

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी । महिमा अमित न जात बखानी ।।

मातंगी धूमावति माता । भुवनेश्वरि बगला सुखदाता ।।

श्री भैरव तारा जग तारिणि । छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ।।

केहरि वाहन सोह भवानी । लांगुर वीर चलत अगवानी ।।

कर में खप्पर खड्ग विराजे । जाको देख काल डर भाजे ।।

सोहे अस्त्र और तिरशूला । जाते उठत शत्रु हिय शूला ।।

नगर कोटि में तुम्ही विराजत । तिहूं लोक में डंका बाजत ।।

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे । रक्तबीज शंखन संहारे ।।

महिषासुर नृप अति अभिमानी । जेहि अघ भार मही अकुलानी ।।

रुप कराल कालिका धारा । सेन सहित तुम तिहि संहारा ।।

परी गाढ़ सन्तन पर जब जब । भई सहाय मातु तुम तब तब ।।

अमरपुरी अरु बासव लोका । तब महिमा सब रहें अशोका ।।

ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी । तुम्हें सदा पूजें नर नारी ।।

प्रेम भक्ति से जो यश गावै । दुःख दारिद्र निकट नहिं आवे ।।

ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई । जन्म-मरण ताको छुटि जाई ।।

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी । योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ।।

शंकर आचारज तप कीनो । काम अरु क्रोध जीति सब लीनो ।।

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को । काहू काल नहिं सुमिरो तुमको ।।

शक्ति रुप को मरम न पायो । शक्ति गई तब मन पछतायो ।।

शरणागत हुई कीर्ति बखानी । जय जय जय जगदम्ब भवानी ।।

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा । दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा ।।

मोको मातु कष्ट अति घेरो । तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ।।

आशा तृष्णा निपट सतवे । मोह मदादिक सब विनशावै ।।

शत्रु नाश कीजै महारानी । सुमिरों इकचित तुम्हें भवानी ।।

करौ कृपा हे मातु दयाला । ऋद्घि सिद्घि दे करहु निहाला ।।

जब लगि जियौं दया फल पाऊँ । तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ ।।

दुर्गा चालीसा जो नित गावै । सब सुख भोग परम पद पावै ।।

देवीदास शरण निज जानी । करहु कृपा जगदम्ब भवानी ।।


जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी जय माता दी

माँ दुर्गा की आरती.......

ॐ जय अम्बे  गौरी  मैया,
जय श्यामा  गौरी
निशादिना  तुमको  ध्यावता,
हरी  ब्रम्हा शिवजी
ॐ जय अम्बे गौरी..........

मांग  सिंदूर  विराजत,
टिको  मृगा  मदको
उज्ज्वालासे दुऊ नैना,
चंद्रवना  नीको
ॐ जय अम्बे गौरी..........

कनक  समाना कलेवर,
रक्ताम्बरा  राजे
रक्तापुश्पा गलमाला,
कन्थाहारा  साजे
ॐ जय अम्बे गौरी.........

केहरी  वाहन  राजता,
खादागा खप्पर  धारी
सुर नर मुनिजन  सेवता,
तिनके दुख हारी
ॐ जय अम्बे गौरी......

कानना कुनदाला शोभिता,
नासाग्रे  मोती
कोतिका चंद्र दिवाकर,
सम  राजत ज्योती
ॐ जय अम्बे गौरी......

शुम्भा निशुम्भा बिदारे,
महिषासुर घाती
धूम्र विलोचन नैना,
निशादिना मदमाती
ॐ जय अम्बे गौरी......

चौसठ योगिनी गावत,
नृत्य करत भैरों
बाजत ताल मृदंगा,
और बाजत डमरू
ॐ जय अम्बे गौरी......

भुजा चारा अति शोभिता,
वार मुद्रा धारी
मनावान्चिता फल पावता ,
सेवत नर नारी
ॐ जय अम्बे गौरी.......

कंचना थाल विराजत,
अगरू  कपूर बाती
भालाकेतु  में राजत,
कोतिरताना ज्योती
ॐ जय अम्बे गौरी........

तुम हो जग की माता ,
तुम ही हो भरता
भक्ताना की दुख हरता ,
सुख सम्पति करता
ॐ जय अम्बे गौरी......

ब्रह्माणी रुद्रानी ,
तुम कमला रानी
आगम -निगम  बखानी ,
तुम शिव पटरानी
ॐ जय अम्बे गौरी......

शंकर जन तेरा चेला,
निसदिन गुन गाता
सुंदर श्यामा गौरी,
त्रीलोकी की माता
ॐ जय अम्बे गौरी.......

श्री अम्बे जी की आरती,
जो कोई जन गाता,
कहत शिवानन्द स्वामी मंवांचित फल पता
ॐ जय अम्बे गौरी........

ॐ जय अम्बे  गौरी  मैया,
जय श्यामा  गौरी
निशादिना  तुमको  ध्यावता,
हरी  ब्रम्हा शिवजी
ॐ जय अम्बे गौरी..........
« Last Edit: April 06, 2008, 08:19:14 AM by MANAV_NEHA »
गुरूर्ब्रह्मा,गुरूर्विष्णुः,गुरूर्देवो महेश्वरः
गुरूर्साक्षात् परब्रह्म् तस्मै श्री गुरवे नमः॥
अखण्डमण्डलाकांरं व्याप्तं येन चराचरम्
तत्विदं दर्शितं येन,तस्मै श्री गुरवे नमः॥


सबका मालिक एक

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JAI MATA DI
JAI MATA DI
JAI MATA DI
JAI MATA DI
JAI MATA DI

SAB MIL BOLO JAI MATA KIIIII

Offline MANAV_NEHA

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माँ दुर्गा की मंगल आरती

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा,हाथ जोड़े तेरे द्वार खड़े!
पान सुपारी ध्वजा नारियल, ले ज्वाला तेरी भेट करे!!

सुन जगदम्बे कर न विलमबे,संतान का भंडार भरे!
सन्तन प्रतिपाली,सदा खुशाली,सब जग का कल्याण करे!!

बुधि विदाता,तू जग माता,मेरा कारज सिद्ध करे!
चरण कमल का लिया आसरा,शरण तुम्हारी आन परे!!

जब जब भीर पड़ी भकतन पर,तब तब आए सहाए करे!
सन्तन प्रतिपाली,सदा खुशाली,सब जग का कल्याण करे!!

बार-बार तू सब जग मोहे,तरुणीरूप अनूप धरे!
माता होकर पुत्र खिलावे,भार्या हो कर भोग करे!!
संतान सुखदायी सदा सहाई,संत खड़े जय-जयकार करे !
सन्तन प्रतिपाली,सदा खुशाली,सब जग का कल्याण करे!!

बहमा ,विष्णु,महेश शास्फान,भेट के लिए तेरे द्वार खड़े!
अटल शिगासन बहठी मेरी माता,सिर सोने का CHATRA फिरे!!
जो कोई नाम ले अम्बे का पाप छिनक में भस्म करे!
सन्तन प्रतिपाली,सदा खुशाली,सब जग का कल्याण करे!!

वार सनिशचर कुम-कुम वर्णी,जब लकुड पर हुकम करे!
खप्पर खडग त्रिशूल हाथ ले,रक्तबीज  को भस्म करे!!
शुम्भ निशुम्भ पचाडे माता,महिसासुर को पकड़ दले!!
सन्तन प्रतिपाली,सदा खुशाली,सब जग का कल्याण करे!!

बहमा वेद पड़े तेरे द्वारे,शिवशंकर हरी ध्यान करे!
इन्द्र कृषण तेरी करे आरती,चवर कुबेर दुलाये रहे!!
जय जन्ननी जय मातुभावानी,अटल भवन में राज़ करे!
सन्तन प्रतिपाली,सदा खुशाली,सब जग का कल्याण करे!!

मंगल की सेवा सुन मेरी देवा,हाथ जोड़े तेरे द्वार खड़े!
पान सुपारी ध्वजा नारियल , ले ज्वाला तेरी भेट करे!!
 
« Last Edit: April 07, 2008, 09:19:46 AM by MANAV_NEHA »
गुरूर्ब्रह्मा,गुरूर्विष्णुः,गुरूर्देवो महेश्वरः
गुरूर्साक्षात् परब्रह्म् तस्मै श्री गुरवे नमः॥
अखण्डमण्डलाकांरं व्याप्तं येन चराचरम्
तत्विदं दर्शितं येन,तस्मै श्री गुरवे नमः॥


सबका मालिक एक

Offline JR

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माता वैष्णों के दरबार में दोनों समय होने वाली आरती

हे मात मेरी...........हे मात मेरी
कैसे ये देर लगाई है दुर्गे, हे मात मेरी हे मात मेरी ।
भवसागर में गिरा पड़ाहूँ, काम आदि गह में घिरा पड़ा हूँ
मोह आदि जाल में जकड़ा हँ
हे मात मेरी, हे मात मेरी................

न मुझमें बल है न मुझमें विघा
न मुझमें भक्ति न मुझमें शक्ति
शरण तुम्हारी गिरा पड़ा हूँ । । हे मात मेरी ।। 2 ।।

न कोई मेरा कुटुम्बी साथी, ना ही मेरा शरीर साथी
चरण कमल की नौका बनाकर,
मैं पार हूँगा खुशी मनाकर
यमदूतों को मार भगाकर ।। 2 ।।

सदा ही तेरे गुणो को गाऊँ, सदा ही तेरे स्वरुप को ध्याऊँ
नित्य प्रति तेरे गुणों को गाऊँ ।। हे मात मेरी ।। 2।।

न मैं किसी का न कोई मेरा, छाया है चारों तरफ अँधेरा
पकड़ के ज्योति दिखा दो रास्ता हे मात मेरी ।।
शरण में पड़े है हम तुम्हारी, करो ये नैया पार हमारी
कैसे से देर लगाई है दुर्गे हे मात मेरी..........
सबका मालिक एक - Sabka Malik Ek

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Offline tana

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    • Sai Baba
Om Sai Ram~~~

Durga Chalisa in English With Meaning~~~


Namo Namo Durge Sukh Karani
Namo Namo Ambe Dukh Harani


I bow to you O Goddess Durga, the bestower of all happiness! I bow to you O Goddess Amba! Who ends all miseries.

Nirakar Hai Jyoti Tumhari
Tihun Lok Phaili Ujayari


The radiance of your light is limitless and pervading and all the three realms (Earth, Heaven and the Nether World) are enlightened by thee.

Shashi Lalat Mukh Maha Vishala
Netra Lal Bhrikutee Vikarala


Your Visage is like the moon and mouth very huge. Your eyes are bedight with a red glow with the frightening frown.

Roop Matu Ko Adhika Suhava
Daras Karat Jan Ati Sukh Pave


O Mother! Your view is enchanting, the very sight of which ensures welfare of the devout.

Tum Sansar Shakti Laya Kina
Palan Hetu Anna Dhan Dina


All the powers of the world repose in thee and it is you who provide food and money for the world’s survival.

Annapurna Hui Jag Pala
Tumhi Adi Sundari Bala


Like the feeding mother Annapurna you nurture the whole universe and you are the one who appear like the timeless Bala Sundari (young girl of extreme beauty).

Pralaya Kala Sab Nashan Hari
Tum Gauri Shiv-Shankar Pyari


At the time of Dissolution it is you, O Mother, who destroys everything. You are the beloved consort of Lord Shiva, Gauri (Parvathi)

Shiv Yogi Tumhre Guna Gaven
Brahma Vishnu Tumhen Nit Dhyaye


Lord Shiva and all yogis always chant your praise, Brahma, Vishnu and all other Gods ever meditate on you.

Roop Saraswati Ko Tum Dhara
De Subuddhi Rishi Munina Ubara


You also appear in the form of Goddess Saraswati to grant wisdom to the sages and thus ensure their welfare.

Dharyo Roop Narsimha Ko Amba
Pragat Bhayin Phar Kar Khamba


O Mother Amba, it was you who appeared in the form of Narismha, sundering the pillar.

Raksha Kari Prahlaad Bachayo
Hiranakush Ko Swarga Pathayo


Thus, you saved Prahlaad and Hiranyakashyap also went to Heaven as he was killed by your hands.

Lakshmi Roop Dharo Jag Mahin
Shree Narayan Anga Samhahin


In the form of Goddess Lakshmi, O Mother, you appear in this world and repose by the side of Shree-Narayan.

Ksheer Sindhu Main Karat Vilasa
Daya Sindhu Deeje Man Asa


Dwelling on the Sea of milk, O Goddess,with Lord Vishnu, please fulfil my desires.

Hingalaja Main Tumhin Bhavani
Mahima Amit Na Jat Bakhani


O Bhavani, the famous goddess of Hingalaja is no one else but you yourself. Illimitable is your glory, defying description.

Matangi Dhoomavati Mata
Bhuvneshwari Bagala Sukhdata


You are yourself Matangi and Dhoomavati Mata. It is you who appear as Bhuvenshwari and Bagalamukhi Devi to bestow happiness to all.

Shree Bhairav Tara Jag Tarani
Chhinna Bhala Bhav Dukh Nivarani


It is you, who redeem the world, appearing in the form of Shree Bhairavi, Tradevi and Chhinamasta Devi, and end its sorrows.

Kehari Vahan Soh Bhavani
Langur Veer Chalat Agavani


Reposing Gracefully upon your vehicle of Lion. O Goddess Bhavani, you are welcomed by the brave Langur (Lord Hanuman).

Kar Main Khappar Khadag Viraje
Jako Dekh Kal Dar Bhaje


When you appear in the form of Goddess Kali with sword in one hand and a cupel in the other, even time flees in panic.

Sohe Astra Aur Trishoola
Jase Uthata Shatru Hiya Shoola


Beholding you well-armed, with a Trident in your hand, the enemy’s heart aches with the sting of fear.


Nagarkot Main Tumhi Virajat
Tihun Lok Main Danka Bajat


You also repose in the form of the Devi at Nagarkot in Kangara. Thus all the three realms shudder in the might of your glory.

Shumbhu Nishumbhu Danuja Tum Mare
Rakta-Beeja Shankhan Samhare


You slayed the demons like Shumbhu and Nishumbhu and masacred the thousand forms of the dreaded demon Raktabeeja.

Mahishasur Nripa Ati Abhimani
Jehi Agha Bhar Mahi Akulani


When the earth was severtly distressed bearing the load of the sins of the arrogant Mahishasur.

Roop Karal Kalika Dhara
Sen Sahita Tum Tin Samhara


You assumed the dreadful form of Goddess Kali and massacred him along with his army.

Pari Garha Santan Par Jab Jab
Bhayi SahayaMatu Tum Tab Tab


Thus whenever the noble saints were distressed, it is you O Mother, who came to their rescue.

Amarpuri Aru Basava Loka
Tava Mahima Sab Rahen Asoka


All the realms including the Amarpuri (divine realm) remain sorrowless and happy by your grace, O Goddess!

Jwala Main Hai Jyoti Tumhari
Tumhen Sada Poojan Nar Nari


It is the symbol of your glory that is burning brightly at Shree Jwala ji. All men and women ever worship you, O Mother!

Prem Bhakti Se Jo Yah Gave
Dukh-daridra Nikat Nahin Ave


He who sings your glory with devotion of love and sincerity remains beyond the reach of grief and poverty.

Dhyava Tumhen Jo Nar Man Lai
Janam-maran Tako Chuti Jai


He who meditates upon your form with concentration goes beyond the cycle of births and deaths.

Jogi Sur-muni Kahat Pukari
Jog Na Ho- Bin Shakti Tumhari


All the Yogis, Gods and Sages openly declare that without your favour one can’t establish communication with God.

Shankar Aacharaj Tap Keenhon
Kam Krodha Jeet Sab Leenhon


Shankaracharya had performed once a special penance called Aacharaj and by the virtue of which he had subdued his anger and desire.

Nisidin Dhyan Dharo Shankar Ko
Kahu Kal Nahin Sumiro Tum Ko


He ever worshipped Lord Shankar and never for a moment concentrated his mind on you.

Shakti Roop Ka Maram Na aayo
Shakti Gae Tab Mann Pachtayo


Since he did not realise your immense glory, his all powers waned and the repented hitherto.

Sharnagat Hui Keerti Bakhani
Jai Jai Jai Jagdamb Bhavani


Then, he sought refuge in you, chanted your glory and sang ‘victory, victory, victory’ to Thee O Jagdamba Bhavani.

Bhayi Prasanna Aadi Jagdamba
Dayi Shakti Nahin Keen Vilamba


Then, O Primal Goddesses Jagdamba ji, you were propitiated and in no time you bestowed him with his lost powers.

Mokon Matu Kashta Ati Ghero
Tum Bin Kaun Hare Dukh Mero


O Mother! Severe affictions distress me and no one except Your Honoured Self can provide relief. Please end my afflictions.

Aasha Trishna Nipat Sataven
Moh Madadik Sab Binsaven


Hopes and longings ever torture me. All sort of passions and lust torment my beart ever.

Shatru Nash Keeje Maharani
Sumiron Ekachita Tumhen Bhavani


O Goddess Bhavani! I meditate only upon you Please kill my enemies O Queen!


Karo Kripa Hey Matu Dayala
Riddhi-Siddhi De Karahu Nihala


O Merciful Mother! Show me your favour and make me feel happy by bestowing me with all sorts of riches and powers.

Jab Lagi Jiyon Daya Phal Paoon
Tumhro Yash Mai Sada Sunaoon


O Mother! May I be the receptacle of your grace as long as I live, ever recounting the feats of your glory to all.

Durga Chalisa Jo Gave
Sab Sukh Bhog Parampad Pave


This, way he who ever sings this Durga Chalisa shall ever enjoy all sorts of pleasures and shall attain the highest state in the end.

‘Devidas’ Sharan Nij Jani
Karahu Kripa Jagdamb Bhavani


Deeming ‘Devidas’ to have sought your shelter, O Bhavani grant me your favour~~~

Jai Sai Ram~~~



"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

" Loka Samasta Sukino Bhavantu
Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

Offline MANAV_NEHA

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भगवती माँ काली का शक्तिशाली मंत्र-

ॐ जयंती मंगला काली ब्रद्काली क्रिपाली दुर्गा शमा शिवा दात्री सु हा हा !

भगवती माँ दुर्गा का शक्तिशाली मंत्र-

सर्व मंगल मान्गलिये शिवे सर्वथ साधिके,
शर्नाये त्रयाम्बके गौरी नारायणी नामोस्तुअते !
गुरूर्ब्रह्मा,गुरूर्विष्णुः,गुरूर्देवो महेश्वरः
गुरूर्साक्षात् परब्रह्म् तस्मै श्री गुरवे नमः॥
अखण्डमण्डलाकांरं व्याप्तं येन चराचरम्
तत्विदं दर्शितं येन,तस्मै श्री गुरवे नमः॥


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Offline tana

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ॐ सांई राम~~~


सप्‍तश्र्लोकी दुर्गा~~~  

 
देवि त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनी।
कलौ हि कार्यसिद्धयर्थमुपायं ब्रूहि यत्रतः॥

देव्युवाच~~

श्रृणु देव प्रवक्ष्यामि कलौ सर्वेष्टसाधनम्‌।
मया तवैव स्नेहेनाप्यम्बास्तुतिः प्रकाश्यते॥

विनियोग~~

ॐ अस्य श्रीदुर्गासप्तश्लोकीस्तोत्रमन्त्रस्य नारायण ऋषिः अनुष्टप्‌ छन्दः,
श्रीमह्मकाली महालक्ष्मी महासरस्वत्यो देवताः,
श्रीदुर्गाप्रीत्यर्थं सप्तश्लोकीदुर्गापाठे विनियोगः।

ॐ ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती हिसा।
बलादाकृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति॥

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः
स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।

दारिद्र्‌यदुःखभयहारिणि त्वदन्या
सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता॥

सर्वमंगलमंगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते॥

शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।
सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तुते॥

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तुते॥

रोगानशोषानपहंसि तुष्टा रूष्टा तु कामान्‌ सकलानभीष्टान्‌।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्माश्रयतां प्रयान्ति॥

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्र्वरि।
एवमेव त्वया कार्यमस्यद्वैरिविनाशनम्‌॥

॥ इति श्रीसप्तश्लोकी दुर्गा संपूर्णम्‌ ॥

जय सांई राम~~~
 

"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

" Loka Samasta Sukino Bhavantu
Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

Offline MANAV_NEHA

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    • SAI BABA
Aarti Maa Vaishno Devi Ki

He maat meri, He maat meri, kaisi yeh der lagai he durge || he maat...

Bhavsaagar mein gira pada hoon, kaam aadi grah mein ghira pada hoon,
moh aadi jaal mein jakda pada hoon || he maat...

Na mujhmein bal hai na mujhmein vidya, Na mujhmein bhakti, Na mujhmein Shakti,
Sharan tumhari gira pada hoon || he maat...

Na koi mera kutumb saathi, na hi mera sharir saathi,
Aap hi ubaaro pakad ke baahin || he maat...

Charan kamal ko nauka banakar, main paar hoonga khooshi manakar,
Yamdooton ko maar bhagakar || he maat...

Sada hi tere gunon ko gaaoon, sada hi tere swaroop ko dhyaaoon,
Nit prati tere gunon ko gaaoon || he maat...

Na main kisika, na koi mera, chhaya hai chaaron taraf andhera,
Pakad ke jyoti dikha do rasta || he maat...

Sharan pade hain ham tumhari, karo yah naiya paar hamari,
Kaisi yeh deri lagai hai durge || he maat...

 
JAI SAI RAM
« Last Edit: August 03, 2008, 01:17:10 PM by MANAV_NEHA »
गुरूर्ब्रह्मा,गुरूर्विष्णुः,गुरूर्देवो महेश्वरः
गुरूर्साक्षात् परब्रह्म् तस्मै श्री गुरवे नमः॥
अखण्डमण्डलाकांरं व्याप्तं येन चराचरम्
तत्विदं दर्शितं येन,तस्मै श्री गुरवे नमः॥


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