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Author Topic: Spiritual Blossoms  (Read 51906 times)

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Offline Ramesh Ramnani

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Re: Spiritual Blossoms
« Reply #105 on: March 18, 2007, 02:16:32 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    जहरीले फल
    **-**


    एक गांव के किनारे, रास्ते पर ज़हरीले फलों का एक वृक्ष लगा हुआ था. मुसाफिर उस पेड़ की छांव में विश्राम करते और ज़हरीले फलों की ओर लालच भरी नजर से देखते. फल रसीले और सुस्वादु थे, मगर ज़हरीले थे. यदा कदा कोई मुसाफिर अज्ञानता वश उन जहरीले फलों को खा कर मर जाता था तो कुछ लुटेरे जो वहीं घात लगाकर इंतजार करते रहते थे उसका माल असबाब ले उड़ते थे.

    एक दिन एक मुसाफिरों का एक बड़ा काफ़िला उस पेड़ के नीचे विश्राम के लिए रुका. कुछ लोग उस पेड़ के रसीले फलों को तोड़ने लगे. इतने में काफिले के सरदार की नजर उन पर पड़ी. सरदार ने उन्हें रोका और कहा इन फलों को मत खाओ. ये ज़हरीले हैं. लोगों ने उससे पूछा कि कैसे?

    सरदार ने बताया – यह पेड़ गांव के किनारे है, परंतु फिर भी फलों से लदा है. इसका अर्थ है कि यह जरूर अनुपयोगी और जहरीला होगा. इसे मुसाफिर अज्ञानता वश खाकर मर भी जाते होंगे.

    ऐसा कह कर उसने उस पेड़ को काटने का आदेश दे दिया ताकि भूल-वश कोई अन्य मुसाफिर उन फलों को खाकर मुसीबत में न आ जाए.


    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।

    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: Spiritual Blossoms
    « Reply #106 on: March 19, 2007, 02:48:26 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    बादशाह नसीरुद्दीन अवकाश के समय टोपियां बनाकर और कुरान की हस्तलिखित प्रतियां तैयार कर अपना जीवनयापन करते थे। यहां तक कि वह अपनी बेगम द्वारा बनाया गया भोजन ही करते थे। संयोगवश एक बार भोजन बनाते हुए बेगम साहिबा का हाथ जल गया। बेगम सोचने लगीं, 'मैं भी कैसी अभागिन हूं कि एक बादशाह की पत्नी होने के बावजूद एक नौकर नहीं मिल सकता, जो कि मेरा हाथ बंटाता।' बेगम ने अपने मन की बात बादशाह से कही, तो नसीरुद्दीन ने बड़े प्यार से समझाया, 'बेगम, आपके लिए एक नहीं, कई नौकर रखे जा सकते हैं बशर्ते हम अपने सिद्धांतों से गिर जाएं। यह राज्य, वैभव, धन, संपत्ति सब कुछ प्रजा का है, हम तो उसके संरक्षक मात्र हैं, इसमें से लेशमात्र भी उपयोग में लाना बेईमानी होगी।'  बादशाह की सैद्धांतिक निष्ठा के सामने बेगम को झुकना पड़ा।

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline tana

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    • ~सांई~~ੴ~~सांई~
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    Re: Spiritual Blossoms
    « Reply #107 on: March 19, 2007, 05:02:00 AM »
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  • OM SAI RAM...

    GOD help me to be patient
    and make those who love me patient.
    Forgiv & help them to forgive me
    if i am unreasonable & demanding
    or when i lose my temper over little things.
    When i am wrong
    Give me the grace to admit it wholly
    Neither offering excuses nor teying to shift the blame.
    Make me more honest in my thinking ,
    more charitable in my opinions...


    JAI SAI RAM...
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
    Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

    May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
    May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

    Offline OmSaiRamNowOn

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    Re: Spiritual Blossoms
    « Reply #108 on: March 19, 2007, 07:21:38 AM »
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  • HAPPINESS

    Promise yourself to be so strong that nothing can disturb your peace of mind.

    To speak of health, happiness, and prosperity to every person that you meet.

    To make all your friends aware of the special qualities within them.

    To look at the sunny side of every thing and let your optimism work to make your dreams come true.

    To think, work for, and expect only the best.

    To be just as enthusiastic about the success of others, as you are about your own.

    To forget past mistakes and press on towards a greater future.

    To wear a cheerful countenance at all times, as a smile radiates warmth and love.

    To give so much time to the improvement of yourself that you have no time left to criticize others.

    To be too wise for worry, too tolerant for anger,
    and too courageous for fear.

    To Be Happy.

    JAI SAI RAM.


    Om Sai Ram !

    -Anju

    "Abandon all varieties of religion and just surrender unto Me. I shall deliver you from all sinful reactions. Do not fear."

    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: Spiritual Blossoms
    « Reply #109 on: March 19, 2007, 08:24:57 PM »
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  • जय सांई राम।।।

    अनमोल रत्न
     
    किसी शहर में एक गरीब विधवा रहती थी। उसके चार बेटे थे। वह छोटा-मोटा काम करके अपना और बच्चों का पेट पालती थी। उस समय राजा भेस बदलकर प्रजा की दशा जानने के लिए घर-घर घूमते थे। जब राजा को विधवा की निर्धनता का पता चला, तो वह उसके घर पहुंचे। उस समय घर पर वह अकेली थी, बच्चे गुरु के यहां पढ़ने गए थे। राजा ने उसे धन देना चाहा तो उसने कहा, 'मैं इतनी गरीब नहीं हूं। मेहनत-मजदूरी करके गुजारा कर ही लेती हूं, फिर मेरे पास तो चार अनमोल रत्न हैं।'

    राजा ने आग्रह किया कि वह रत्न दिखाओ। उसने कहा, 'कुछ समय प्रतीक्षा करें, मैं आपको चारों अनमोल रत्न दिखा दूंगी।' कुछ देर बाद चारों बालक हंसते हुए घर आए और मां के चरणों पर मस्तक रखकर प्रणाम किया। मां ने उन्हें रूखा-सूखा कुछ खाने को दिया। उन्हें दिखाकर उसने कहा, 'यही वे चारों अनमोल रत्न हैं।' यह कहते हुए विधवा के चेहरे पर मुस्कान खिल गई। राजा ने उसके स्वाभिमान की मुक्त कंठ से सराहना की और मस्तक झुकाकर उसके प्रति सम्मान प्रदर्शित किया।
     
    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

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    Re: Spiritual Blossoms
    « Reply #110 on: March 20, 2007, 06:33:35 AM »
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  • Jai Sai Ram. Blessed is the poor old lady for She could relate what is real wealth for her, not material but the values with which she raised her 4 children. May Sai bless us so we may develop this Chetna.
    Om Sai Ram !

    -Anju

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    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: Spiritual Blossoms
    « Reply #111 on: March 20, 2007, 07:21:49 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    शुक की परीक्षा  

    व्यास मुनि ने अपने बेटे शुक को अच्छी शिक्षा-दीक्षा और सत्य ज्ञान देकर अंतिम दीक्षा के लिए राजा जनक के पास भेजा। राजा जनक को पहले ही मालूम हो गया था कि व्यास पुत्र शुक उनके पास अंतिम ज्ञान लेने आ रहे हैं। शुक आकर राजभवन के द्वार पर खड़े हो गए। राजभवन के प्रहरियों ने शुक की ओर जरा भी ध्यान नहीं दिया। काफी देर खड़े रहने के बाद उनके लिए द्वार के बाहर एक आसन डाल दिया गया। उस पर वह बैठ गए। किसी ने नहीं पूछा कि वह कहां से आए हैं, कहां जाना है, क्या काम है। लेकिन शुक पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। उन्हें न क्रोध आया और न ही प्रसन्नता हुई। वे निर्विकार भाव से वहां बैठे रहे।

    तीन दिनों के बाद एक मंत्री आया और शुक को राजभवन के भीतर ले गया। आठ दिनों तक उन्हें राजमहल की सभी सुख-सुविधाएं मिलीं, लेकिन शुक में तब भी कोई बदलाव नहीं आया। इसके बाद उन्हें राजा जनक के दरबार में लाया गया। उनके सम्मान में संगीत कार्यक्रम का आयोजन किया गया, फिर राजा जनक ने शुक को दूध से लबालब एक कटोरा दिया और कहा कि वे बिना एक बूंद छलकाए सभाभवन की सात बार परिक्रमा करें। शुक ने दूध भरा कटोरा ले लिया और सात बार परिक्रमा कर आए, लेकिन एक बूंद भी नहीं छलका। दूध का कटोरा लेकर शुक सम्राट के पास आए। राजा जनक ने कहा, 'वत्स तुम्हारी शिक्षा पूरी हो चुकी है। तुम परीक्षा में सफल हुए। तुम्हें जो शिक्षा तुम्हारे पिता मुनि व्यास ने दी है और जो तुमने स्वयं सीखा है, वह पर्याप्त है। तुमने अपनी इंद्रियों, मोह, क्रोध, अहंकार सभी विकारों को जीत लिया है। एकचित्त होकर तुमने अनुकूल और प्रतिकूल सभी परिस्थितियों में रहना सीख लिया है। वास्तव में कोई गुरु किसी को सिखाता नहीं है, हम सबको अपने-आप सीखना पड़ता है। गुरु तो केवल संकेत देता है। वत्स, अब तुम घर जाओ। तुमने अपने मन को वश में करने की शक्ति पा ली है, यही सत्य ज्ञान है।'

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

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    Re: Spiritual Blossoms
    « Reply #112 on: March 21, 2007, 04:18:38 AM »
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  • SaiRam

    Under this topic "Spiritual Blossoms  I would appreciate if  devotees would contribute the same in english.

    Thanks.

    Jaisairam.

    A Person, who has controlled his mind, can achieve any success in his life. How far you are trying to control your mind?
    The mind that judges not others ever remains tension-free.
    http://lh5.ggpht.com/_lOgd1uS-wX0/TCOlFNMxIBI/AAAAAAAAE88/GpxUgxnwioE/why_fear_when_i_am_here.jpg

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    Re: Spiritual Blossoms
    « Reply #113 on: March 28, 2007, 09:25:22 AM »
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  • Jai Sai Ram.

    Devotion, direct experience of the Supreme Lord, and detachment from other things — these three occur simultaneously for one who has taken shelter of the Lord,  in the same way that pleasure, nourishment and relief from hunger come simultaneously and increasingly, with each bite, for a person engaged in eating.
    Om Sai Ram !

    -Anju

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      • Sai Baba
    Re: Spiritual Blossoms
    « Reply #114 on: April 04, 2007, 08:18:39 AM »
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  • JAI SAI RAM.

    In the journey of life, if you want to travel without fear you must have the ticket of a good conscience.
    Om Sai Ram !

    -Anju

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    Re: Spiritual Blossoms
    « Reply #115 on: April 12, 2007, 09:52:19 AM »
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  • Jai Sai Ram.

    When you are depressed by what appears to be loss or calamity, engage yourselves in Naamasmarana, the recitation and recollection of the Names of the Lord; that will give you consolation, courage and true perspective. Remember the distress and calamity that the saints underwent with enthusiastic welcome and be calm during every storm. People laughed at them and called them mad; but they knew that they were in the Grace Hospital of God, not the mental hospital of man. They had full faith in their destiny and so they had full faith in God; they laughed when calamities tried to cow their eagerness, for they knew their latent strength of the Atma (spirit) within.
    Om Sai Ram !

    -Anju

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    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: Spiritual Blossoms
    « Reply #116 on: May 15, 2007, 08:52:40 PM »
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  • JAI SAI RAM!!!

    Where we love is home, home that our feet may leave, but not our hearts.

    OM SAI RAM!!!
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline shambi_me

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    Re: Spiritual Blossoms
    « Reply #117 on: May 16, 2007, 06:54:37 AM »
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  • Om Sri Sai Ram.

    It is not the world that we live in, but it is the world that lives within us.

    Om Sai Sri Sai Jai Jai Sai
    shambhavi.
    Om Sai Sri Sai Jai Jai Sai
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      • Sai Baba
    Re: Spiritual Blossoms
    « Reply #118 on: May 22, 2007, 10:51:46 AM »
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  • HAre Krsna ! Jai Sai Ram.

    A screw that is connected with a machine is valuable because it is working with the whole machine. And if the screw is taken away from the machine, or if it is faulty, it is worthless. My finger is worth millions of dollars as long it is attached to this body and is serving the body. And if it is cut off from this body, then what is it's worth ? Nothing. Similarly, our relationship is that we are very small particles of God; therefore our duty is to dovetail our energies with Him and cooperate with Him. That is our relationship. Otherwise we are worthless. We are cut off. When the finger becomes useless the doctor says, "Oh, amputate this finger. Otherwise the body will be poisoned." Similarly, when we become godless we are cut off from our relationship with God and suffer in this material world. If we try to join again with the Supreme Lord, then our relationship is revived.
    Om Sai Ram !

    -Anju

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    Re: Spiritual Blossoms
    « Reply #119 on: May 24, 2007, 11:08:27 AM »
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  • Hare Krsna ! Jai Sai Ram !

    The soul in its materially conditioned state perpetually travels through time and space. By the cosmic law of karma, it takes up residence in different bodies on different planets within the material universes. But wherever the soul journeys, it encounters the same conditions. As Lord Krsna says in Bhagavad-gita (8.16): "From the highest planet in the material world down to the lowest, all are places of misery wherein repeated birth and death take place. But one who attains to My abode .. never takes birth again." The Gita and other Vedic literatures are instruction manuals that teach us the real goal of life's journey. By understanding the science of reincarnation, we free ourselves from the forces of karma and return to the spiritual abode of knowledge, bliss, and eternity.
    Om Sai Ram !

    -Anju

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