tana
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~सांई~~ੴ~~सांई~
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« on: May 02, 2008, 07:08:25 AM » |
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ॐ सांई राम~~~
अक्षय तृतीया पर विशेष~~~8th may 2008~~~
वैशाक मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथी अक्षय तृतीया के नाम से लोक विख्यात है। इस तिथी को आखातीज के नाम से भी पुकारा जाता है। इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है. इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि आज के दिन मनुष्य अपने या स्वजनों द्वारा किये गये जाने-अनजाने अपराधों की सच्चे मन से ईश्वर से क्षमा प्रार्थना करे तो भगवान उसके अपराधों को क्षमा कर देते हैं और उसे सदगुण प्रदान करते हैं, अतः आज के दिन अपने दुर्गुणों को भगवान के चरणों में सदा के लिये अर्पित कर उनसे सदगुणों का वरदान मांगना चाहिए। इस तिथी का सर्वसिद्ध मुहुर्त के रूप में विशेश महत्त्व है। कहा जाता है कि इस दिन बिना कोई पंचांग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे कि विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों की खरीददारी या घर, भूखंड, वाहन आदि की खरीददारी से संबंधित कार्य किये जा सकते हैं। इस दिन सत्तू अवश्य खान चाहिए। नवीन वस्त्र, आभूषण आदि पहनने चाहिए। आज ही के दिन किसी भी नई संस्था, समाज आदि की स्थापना या उदघाटन का कार्य श्रेष्ट माना जाता है। पुराणों में उल्लेख मिलता है कि इसी दिन से त्रेता युग का आरंभ हुआ था। नर-नारयण ने भी इसी दिन अवतार लिया था। भगवान परशुराम जी का अवतरण भी इसी तिथी को हुआ था। प्रसिद्ध तीर्थ स्थल बद्रीनारयण के कपाट भी इसी तिथी से ही पुनः खुलते हैं। व्रंदावन स्थित श्री बांके बिहारी जी के मन्दिर में भी केवल इसी दिन श्री विग्रह के चरण दर्शन होते हैं, अन्यथा वे पूरे वर्ष वस्त्रों से ढके रहते हैं। अक्षय तृतीया को व्रत रखने और अधिकाधिक दान देने का बडा ही महात्म्य है।
कैसे करें व्रत~~
इस दिन ब्र्ह्म मुहूर्त में उठें। अपने नित्य कर्म व घर की साफ-सफाई से निर्वत्त होकर स्नान करें। वैसे इस दिन समुन्द्र या गंगा में स्नान करना चाहिए। इस दिन उपवास रखें और घर में ही किसी पवित्र स्थान पर विष्णु भगवान की मूर्ति या चित्र स्थापित कर पूजन का संकल्प करें। संकल्प के बाद भगवान विष्णु को पंचाम्रत से स्नान कराएं, तत्प्श्चात उन्हें सुंगंधित चंदन, पुष्पमाला अर्पण करें। नैवेद में जौ या जौ का सत्तू, ककडी और चने की दाल अर्पण करें। भगवान विष्णु को तुलसी अधिक प्रिय है, अतः नैवेध के साथ तुलसी अवश्य च्ढाएं जहाँ तक हो सके तो ‘विष्णु सस्त्रनाम’ क पाठ भी करें। अंत में भक्ति पूर्वक आरती करें।
जय सांई राम~~~
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« Last Edit: May 07, 2008, 08:30:11 PM by tana »
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"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"
" Loka Samasta Sukino Bhavantu Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~
May all the worlds be happy. May all the beings be happy. May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~
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v2birit
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जय जय रघुवीर समर्थ
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« Reply #1 on: May 04, 2008, 06:14:05 AM » |
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Akshyaya Tritiya is 1 of the shubh muhurats out of the 3.5 shubh muhurats that come in a year. This day gives turning point to the life.
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tana
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« Reply #2 on: May 06, 2008, 09:53:01 PM » |
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Om Sai Ram~~~
Akshaya Tritiya ~ the most auspicious day for wearing Gold~~~ The word Akshaya means that which never diminishes - hence beginnings made or valuables bought on this day are considered certain to bring luck and success. This day is specially important as on this day any thing you donate is shaya or never ending.
Akshaya Tritiya marks the beginning of the Treta Yug. The birthday of Parashurama, the sixth incarnation of Vishnu falls on this day. This is one of the most auspicious days according to the Hindu calendar. So this day is considered auspicious for starting new ventures and making new purchases.
Jai Sai Ram~~~
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"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"
" Loka Samasta Sukino Bhavantu Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~
May all the worlds be happy. May all the beings be happy. May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~
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tana
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« Reply #3 on: May 07, 2008, 01:59:54 AM » |
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ॐ सांई राम~~~
अक्षय तृतीया की व्रत कथा~~~ प्राचीनकाल में सदाचारी तथा देव-ब्राह्मणों में श्रद्धा रखने वाला धर्मदास नामक एक वैश्य था। उसका परिवार बहुत बड़ा था। इसलिए वह सदैव व्याकुल रहता था। उसने किसी से इस व्रत के माहात्म्य को सुना। कालांतर में जब यह पर्व आया तो उसने गंगा स्नान किया।
विधिपूर्वक देवी-देवताओं की पूजा की। गोले के लड्डू, पंखा, जल से भरे घड़े, जौ, गेहूँ, नमक, सत्तू, दही, चावल, गुड़, सोना तथा वस्त्र आदि दिव्य वस्तुएँ ब्राह्मणों को दान कीं। स्त्री के बार-बार मना करने, कुटुम्बजनों से चिंतित रहने तथा बुढ़ापे के कारण अनेक रोगों से पीड़ित होने पर भी वह अपने धर्म-कर्म और दान-पुण्य से विमुख न हुआ। यही वैश्य दूसरे जन्म में कुशावती का राजा बना।
अक्षय तृतीया के दान के प्रभाव से ही वह बहुत धनी तथा प्रतापी बना। वैभव संपन्न होने पर भी उसकी बुद्धि कभी धर्म से विचलित नहीं हुई। जय सांई राम~~~
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v2birit
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जय जय रघुवीर समर्थ
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« Reply #4 on: May 07, 2008, 02:28:28 AM » |
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It is very meritorious to engage in god & relegious activities today on Akshaya Tritiya. but for devotees of the Lord, Good things happen from them, even if they do not resolve to do them of thier own accord. This is a special characteristic of being a devotee of the Lord.
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tana
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« Reply #5 on: May 07, 2008, 08:37:51 PM » |
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Om Sai Ram~~~
शास्त्रों में अक्षय तृतीया~~~
1~ इस दिन से सतयुग और त्रेतायुग का आरंभ माना जाता है। 2~ इसी दिन श्री बद्रीनारायण के पट खुलते हैं। 3~ नर-नारायण ने भी इसी दिन अवतार लिया था। 3~ श्री परशुरामजी का अवतरण भी इसी दिन हुआ था। 4~ हयग्रीव का अवतार भी इसी दिन हुआ था। 5~ वृंदावन के श्री बाँकेबिहारीजी के मंदिर में केवल इसी दिन श्रीविग्रह के चरण-दर्शन होते हैं अन्यथा पूरे वर्ष वस्त्रों से ढँके रहते हैं।
Jai Sai Ram~~~
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