saisewika
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« Reply #45 on: December 22, 2007, 01:16:16 PM » |
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ओम साईं राम मन को रंग ले साईं देवा तू अपने ही रंग में जैसे रखना है तू रखना पर रखना तू संग में मन मगन हो तेरे पीछे लगन लगे बस तेरी मन को खुद में लगा के रखना यही अरज़ है मेरी मन में तेरी मूरत हो नैनों में तेरा नूर इस काया के रक्त कणों में बसिये साईं हुज़ूर जय साईं राम http://www.shirdi-sai-baba.com/sai/कविताये/मन-को-रंग-ले-साईं-देवा-t117.0.html
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« Last Edit: December 25, 2007, 09:01:08 AM by Jyoti Ravi Verma »
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tana
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« Reply #46 on: December 31, 2007, 10:16:46 PM » |
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ॐ सांई राम~~~
आशा के दीप अब मैं जलाना चाहती हूँ, शब्द से मंदिर गूँजाना चाहता हूँ। सांई तेरे चरणों की धूल लेकर, मस्तक पर अपने लगाना चाहती हूँ।
अर्चना के पुष्प अर्पित कर तुम्हें, वन्दना के गीत गाना चाहती हूँ। ज्ञान का उद्गम तुम्हीं से है सांई वही बस एक बूँद पाना चाहती हूँ।।
मधुर वीणा के स्वरों झंकार में, गीत पुष्पों के सजाना चाहती हूँ । दो मुझे आशीष इतना नाम जपूँ, कि अब मैं स्वयं को भूल जाना चाहती हूँ।।
हैं निरर्थक चमकते जग के प्रलोभन, बस तुम्हारी भक्ति पाना चाहती हूँ। अब देदो सांई मुझे साधना की शक्ति, बस तुम्हारी ही अब शरण में आना चाहती हूँ~~~
जय सांई राम~~~http://www.shirdi-sai-baba.com/sai/कविताये/आशा-के-दीप-अब-मैं-जलाना-चाहती-हूँ-t181.0.html
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« Last Edit: January 04, 2008, 09:23:09 AM by Jyoti Ravi Verma »
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"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"
" Loka Samasta Sukino Bhavantu Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~
May all the worlds be happy. May all the beings be happy. May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~
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saisewika
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« Reply #47 on: January 03, 2008, 12:00:15 PM » |
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ओम साईं राम मेरा जी चाहता है साईं तेरी करती रहूं बढाई अलंकरण जितने दुनिया में सजाऊं तेरे चरण कमल में तेरा ही गुणगान करूं तेरा ही मैं ध्यान धरूं तुझसे ही मैं प्रीत लगाऊं तुझसे ही अपनापन पाऊं हर सांस जो आवे जावे संग संग तेरी महिमा गावे रोम रोम से साईं ध्याऊं सपनों में तुझको ही पाऊं सुबह दोपहर शाम और रात करती जाऊं तेरी बात चौबिस घंटे सातों दिन जी ना पाऊं तेरे बिन पल पल क्षण क्षण आठों याम मुझको दीखो साईं राम सोवूं जागूं खाऊं पीऊं तुझको बस तुझको ही जीऊं थकूं ना लेती तेरा नाम यूं ही हो जीवन की शाम जय साईं राम http://www.shirdi-sai-baba.com/sai/कविताये/मेरा-जी-चाहता-है-साईं-t182.0.html
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« Last Edit: January 04, 2008, 09:24:11 AM by Jyoti Ravi Verma »
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tana
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« Reply #48 on: January 03, 2008, 10:42:04 PM » |
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ॐ सांई राम~~~
ओ जादूगर मेरे,ए केङा जादू चलाया ई, जदों दिल वस इच न आवे,अंखा विच समुद्रं वगाया ई, किथो आवे एना पानी,मैनूं समझ न आया ई, दिल दी आवाज़ निकलदी छम छम अखां दी जबानी जी~~~
सांई आ जाओ~~~~इन अखां दी प्यास बुझा जावो~~~
जय सांई राम~~~http://www.shirdi-sai-baba.com/sai/कविताये/ओ-जादूगर-मेरेए-केङा-जादू-चलाया-ई-t183.0.html
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« Last Edit: January 04, 2008, 09:25:22 AM by Jyoti Ravi Verma »
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"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"
" Loka Samasta Sukino Bhavantu Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~
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tana
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« Reply #49 on: January 05, 2008, 04:06:31 AM » |
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ॐ सांई राम~~~
किथो एने अथरूं आन,रोका ते रोके न जान, दुनिया वास्ते जदो ए वगदे,ता ए मेरे दिल नूं डसदे, तेरे वास्ते जदों ए वसदे,आत्मा मेरी शांत ए करदे, सिर्फ इक करिश्मा कर दे,अखां विच इक मंत्र भर दे, हर अथरूं तेरी याद इच वगे,लोकां दी हवा न लगे, याद करां ते छम छम वगन,दुनिया दी परवाह न रखन~~~
जय सांई राम~~~http://www.shirdi-sai-baba.com/sai/कविताये/किथो-एने-अथरूं-आनरोका-ते-रोके-न-जान-t253.0.html
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« Last Edit: January 11, 2008, 08:06:55 AM by Jyoti Ravi Verma »
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"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"
" Loka Samasta Sukino Bhavantu Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~
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« Reply #50 on: January 06, 2008, 12:41:01 AM » |
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ॐ सांई राम~~~
हे सांई!मुझे कुछ ऐसा बना दे, इक सच्चे भक्त जैसा बना दे, हर पल ध्यान रहे तेरा ही, हर पल तुझे रिझाऊं सांई जी, किसी की ना परवाह करूं मैं, केवल सांई ही सांई कहूँ मैं, जीवन के सभी कर्तव्य निभाऊं मैं, पर इनमें डूब न जाऊं मैं, सभी कर्म निभाऊं मैं, इक पल न तुम्हे भुलाऊं मैं~~
मेरी ये है प्रार्थना प्रभु आप के चरणों में, दासी की ये है अरदास पभु आप के चरणों में,
क्या प्रभु ये संभव नहीं? पर आप के लिए कुछ भी असंभव नहीं~~~
जय सांई राम~~~http://www.shirdi-sai-baba.com/sai/कविताये/हे-सांईमुझे-कुछ-ऐसा-बना-दे-t254.0.html
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« Last Edit: January 11, 2008, 08:07:46 AM by Jyoti Ravi Verma »
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"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"
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saisewika
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« Reply #51 on: January 07, 2008, 07:31:09 AM » |
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ओम साईं राम कैसी भक्ति होती थोथी इतराए जो पढ के पोथी कौन सी भक्ति समझो उथली नाम जाप करके जो उछली कौन भक्ति को जाने संकर मोह माया के जिसमें कंकर किसका कम भक्ति का भाव जिसमें श्रद्धा का हो अभाव क्षण भंगुर है कैसी भक्ति जिसमें सबूरी की ना शक्ति कैसी भक्ति माने झूठी मन चीता ना पा के रूठी जय साईं राम http://www.shirdi-sai-baba.com/sai/कविताये/कैसी-भक्ति-होती-थोथी-t255.0.html
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« Last Edit: January 11, 2008, 08:08:32 AM by Jyoti Ravi Verma »
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tana
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« Reply #52 on: January 09, 2008, 04:57:45 AM » |
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ॐ सांई राम~~~
जहाँ जहाँ सांई का स्थल है, वहाँ वहाँ मैं जाऊँ, सांई का सतसंग मैं करूँ, सब को भजन सुनाऊं, सांई राम जय जय सांई राम, रोम रोम में सांई बसाऊं, अंग अंग में सांई नाम, सभी भक्तों के मन से, मिट जाए सब तृष्णा, सब चाहे और मैं भी चाहूं, जीवन सफल बनाऊं~~~
जय सांई राम~~~http://www.shirdi-sai-baba.com/sai/कविताये/जहाँ-जहाँ-सांई-का-स्थल-है-t256.0.html
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« Last Edit: January 11, 2008, 08:09:23 AM by Jyoti Ravi Verma »
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"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"
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saisewika
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« Reply #53 on: January 09, 2008, 03:04:16 PM » |
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ओम साईं राम वो लोग खुश नसीब होते हैं जो साईं बाबा के करीब होते हैं बाबा का प्रेम दिल में हिलोरें लेता है दुनियावी ग़म उनके रकीब होते हैं साईं नाम की सजी हो कहीं भी महफिल ये दिवाने उसमें शरीक होते हैं जय साईं राम http://www.shirdi-sai-baba.com/sai/कविताये/वो-लोग-खुश-नसीब-होते-हैं-t257.0.html
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« Last Edit: January 11, 2008, 08:10:08 AM by Jyoti Ravi Verma »
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saisewika
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« Reply #54 on: January 11, 2008, 01:07:09 PM » |
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ओम साईं राम खुदी से खुद हमने वादा किया है जीवन ये सारा तुझे दे दिया है बाबा की मूरत है दिल में बैठाई करूणा के सागर से प्रीत लगाई साईं समर्थ से जोडा है नाता सदा संग रहना हमारे विधाता जीवन की राहों में यूं चलते चलते भटक जाते हम जो तुमसे ना मिलते तुम्हींने जीने के काबिल बनाया श्रद्धा सबूरी का पाठ पढाया मालिक है एक ये नारा तुम्हारा हमको भी लगता मधुर प्यारा प्यारा धूनी से उपजा ये ऊदी प्रसाद भक्तों को देता है खुशियां अगाध हर तरफ है फैला तेरा नज़ारा भक्तों का साईं हो तुम ही सहारा जय साईं राम http://www.shirdi-sai-baba.com/sai/कविताये/खुदी-से-खुद-हमने-वादा-किया-है-t269.0.html
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« Last Edit: January 13, 2008, 11:25:04 PM by Jyoti Ravi Verma »
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tana
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« Reply #55 on: January 12, 2008, 03:42:36 AM » |
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ॐ साईं राम~~~
हाय वे रब्बा किनी दूर वे तेरे डेरे पौङिया चढ़ चढ़ के मैं थक गई, चौरासी लख पौङिया चढ़ के हुन ते रब्बा में वी अक गई, ए आखिरी पौङी मेरी ए फिसलन भरी घनेरी ए सामने तेरा डेरा ए,पर अगे घोर अंधेरा ए, सामने आन नू दौङना चांवा पर डिगन खनों डर जांवा पौङिया चढ़ चढ़ औखी होई आखिरी पौङी ते हिम्मत खोई, हुन फङ लै हथ ते खिच लै उत्ते कर कृपा हुन अपनी दासी ते, देखी जे पैर फिसल गया मेरा ते थल्ले जा पवांगी,फिर दुबारा कीवें आवांगी कर कृपा अंधेरा हटा,अपने चरणा विच लगा!!!
जय सांई राम~~~http://www.shirdi-sai-baba.com/sai/कविताये/हाय-वे-रब्बा-किनी-दूर-वे-तेरे-डेरे-t270.0.html
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« Last Edit: January 13, 2008, 11:25:44 PM by Jyoti Ravi Verma »
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"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"
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saisewika
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« Reply #56 on: January 17, 2008, 10:47:17 AM » |
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ओम साईं राम रूक जाना नहीं तू कहीं हार के चाहे उबड खाबड हैं रस्ते साईं द्वार के वो परवरदिगार साईं पिता बडा ही दयालु है सागर जैसा उसका दिल है वो तो परम कृपालु है थामेगा गिरने नहीं देगा पूर्ण विशवास है मेरा आप ही राह दिखाएगा भला करेगा तेरा जय साईं राम http://www.shirdi-sai-baba.com/sai/कविताये/रूक-जाना-नहीं-t312.0.html
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« Last Edit: January 18, 2008, 10:23:11 AM by Jyoti Ravi Verma »
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tana
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« Reply #57 on: January 17, 2008, 08:49:17 PM » |
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ॐ साईं राम~~~
हे परम कृपालु,हे दयामयी, हे क्षमामयी,हे करूणामयी, हे ममतामयी,हे मेरे साईं, सागर से भी गहरे है आप, धरती सम बङे है आप, कितना विशाल ह्रदय आप का, जो आप ने थामी मेरी बाह, अब मैं क्या चाहूँ इसके सिवा, सब कुछ दिया आपने, ना रूकने दिया ,न थमने दिया, बस अपने द्वार पर मस्तक रखने दिया, अब मैं और नहीं कुछ चाहती बस अपनी शरणी लगा लीजिए~~~
जय साईं राम~~~ http://www.shirdi-sai-baba.com/sai/कविताये/हे-परम-कृपालुहे-दयामयी-t313.0.html
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« Last Edit: January 18, 2008, 10:24:09 AM by Jyoti Ravi Verma »
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"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"
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tana
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« Reply #58 on: January 21, 2008, 12:03:48 AM » |
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ॐ साईं राम~~~
लोग कहेगें पागल हूँ मैं तो हो गई हूँ दीवानी पर मेरे दिल की प्यास किसी ने न जानी लोग क्या जाने दीदार की तङप जिसे हो वही जाने ये दर्द हर किसी में तुझे ढूढ़ती फिरूं तेरी एक झलक को तरसती फिरूं साईं,एक कर्म कीजिए,रोज़ का झंझट खत्म कीजिए मेरे नैनों में बस जाइऐ,या फिर मुझे खाक बना दीजिए अपने चरणों के नीचे बिछा लीजिए,इस जीने से अलग कीजिए यह तङप अब सही न जाए,कीजिए दया अब ये दर्द बढता ही जाए~~~
जय साईं राम~~~
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"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"
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saisewika
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« Reply #59 on: January 22, 2008, 09:56:06 AM » |
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ओम साईं राम
बढने दो इस तडप को दीवानगी की हद तक टूट के चाहो उसे सांसों में सांस जब तक
क्योंकि वो खुद भी इसी दीवानगी को चाहता है ऎसा ही पागलपन तो मेरे साईं को भाता है
फिर खुद ही तेरे नैनो में बस जाएगा वो आकर पुलकित सी हो जाओगी अपने साईं को तुम पाकर
जय साईं राम
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