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Author Topic: My dream kaash agar kaheen aisa hota  (Read 23928 times)

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Offline tana

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Re: My dream kaash agar kaheen aisa hota
« Reply #15 on: October 07, 2007, 01:08:47 AM »
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  • ॐ सांई राम~~~

    भगवन बङा खिलाङी तू,
    जान के अंजान बनता तू,
    जब मैं आना चाहती तुझ तक,
    कही भी फसा देता तू,
    कभी रिश्ते कभी बच्चों में,
    फिर ममता में डाल देता तू,
    दूर बैठा सब देखे तमाशा,
    कितना मज़ा है लेता तू,
    तू कहता तू हर पल साथ है,
    फिर कैसे रोते देखता तू,
    जब मैं छटपटाती तो सामने क्यों नहीं आता है,
    तभी तो कहती हूँ तू बङा खिलाङी,
    क्या क्या नाच नचवाता है~~~

    आ जाओं सांई आ जाओं प्रेम सुधा बरसा जाओं~~~

    जय सांई राम~~~
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
    Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

    May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
    May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

    Offline tana

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      • Sai Baba
    Re: My dream kaash agar kaheen aisa hota
    « Reply #16 on: October 11, 2007, 12:08:46 AM »
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  • ॐ सांई राम~~~

    ओ मेरे सांई ~~~ओ मेरे बाबा~~~
    कोई रास्ता दिखा तू,
    मेरी आँखे बंद कर,
    और अपना बना तू,
    फिर उसके बाद तो चाहे मौत दे दे,
    पर एक बार तो अपने पास बुला तू~~~

    जय सांई राम~~~

    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
    Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

    May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
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    Offline Ramesh Ramnani

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      • Sai Baba
    Re: My dream kaash agar kaheen aisa hota
    « Reply #17 on: October 11, 2007, 11:23:40 AM »
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  • JAI SAI RAM!!!

    The Rose Within...
     
    A certain woman planted a rose
    and watered it faithfully,
    and before it blossomed,
    she examined it.
    She saw the bud that would soon
    blossom and also the thorns.
     
    And she thought,
    "How can any beautiful flower
    come from a plant burdened with
    so many sharp thorns?"
    Saddened by this thought,
    she neglected to water the rose,
    and before it was ready to
    bloom, it died.
     
    So it is with many people.
    Within every soul there is a rose.
    The BABA-like qualities planted in us
    at birth grow amid the thorns of our faults.
    Many of us look at ourselves and
    see only the thorns, the defects.
     
    We despair, thinking that nothing
    good can possibly come from us.
    We neglect to water the good within us,
    and eventually it dies.
    We never realize our potential.
     
    Some people do not see
    the rose within themselves;
    someone else must show it to them.
    One of the greatest gifts a person
    can possess is to be able to
    reach past the thorns
    and find the rose within others.
     
    This is the characteristic of love,
    to look at a person, and knowing his faults,
    recognize the nobility in his soul,
    and help him realize that he can
    overcome his faults.
     
    If we show him the rose,
    he will conquer the thorns.
    Then will he blossom,
    blooming forth thirty, sixty,
    a hundred-fold as it is given to him.
     
    Our duty in this world is to help each others
    by showing them their roses
    and not their thorns.
    Only then can we achieve
    the love we should feel for each other;
    only then can we bloom in our own garden...

    OM SAI RAM!!!
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline tana

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      • Sai Baba
    Re: My dream kaash agar kaheen aisa hota
    « Reply #18 on: October 27, 2007, 07:41:39 AM »
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  • ॐ सांई राम~~~

    आराम की जरूरत है तो प्यारे एक काम कर ,
    बैठ शरण श्री सांई की और सांईराम,सांईराम कर~~~

    जय सांई राम~~~
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
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    Offline tana

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      • Sai Baba
    Re: My dream kaash agar kaheen aisa hota
    « Reply #19 on: November 11, 2007, 06:55:16 AM »
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  • ॐ सांई राम~~~

    हे मेरे सांई मेरे सर्वाधार,
    मेरा जीवन तेरा प्यार ,
    सब कुछ मेरा तुम हो सांई ,
    मैं हूँ बेटी तेरी सांई ,
    हर पल तुझे बुलाती हूँ ,
    दिल का हाल सुनाती हूँ ,
    दुखी रहूं या सुखी रहूं ,
    कोई फ़र्क नहीं पङता है ,
    क्योंकि , तू मेरी ढाल है ,
    तू ही मेरी निडरता है ,
    डरूँ किसी से कभी ना मैं ,
    क्योंकि सांई मेरे साथ है ,
    तू ही मेरा सब कुछ हैं
    तू ही मेरा आधार हैं~~~

    जय सांई राम~~~

    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
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    Offline saisewika

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    Re: My dream kaash agar kaheen aisa hota
    « Reply #20 on: November 14, 2007, 09:49:09 AM »
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  • ऒम सांई राम

    ये जो नश्वर काया है
    इसकी अद्भुत माया है
    मानों तो ये सब कुछ है
    जान लो तो छाया है

    चाहो तो जगत मिथ्या में
    तुम राग रंग में मस्त रहो
    या फिर खुद को पहचानो
    श्री चरणों में अलमस्त रहो

    चाहो तो इस पर मान करो
    इस रूप पर अभिमान करो
    पर इसने तो ढल जाना है
    इस सच पर थोडा ध्यान धरो

    वात्त, पित्त और कफ़ से दूषित
    ऐसी नश्वर काया को
    साईं नाम से निर्मल करके
    जानो ठगिनी माया को

    तो चलो क्षणभंगुर काया को
    साईं नाम कर देते हैं
    अंग अंग में साईं नाम की
    भक्ती को भर लेते हैं

    पांच इन्द्रियां केन्द्रित हो जायें
    बाबा जी के ध्यान में
    पांचों प्राण बाबा जी को
    मन्जिल अपनी मान लें

    ह्रदय को सुह्रदय कर लो
    मन को करो सुमन
    फिर बाबा को अर्पण करके
    पावो नाम का धन

    बुद्दि को सद बुद्दि कर लो
    चित्त को सत्चिदानन्द
    धृत्ति धारणा धार के
    पावो परमानन्द

    पलक उठे जब जब भी अपने
    बाबा जी का दर्शन पाये
    पलक झुके तो मन मन्दिर में
    बाबाजी को बैठा पाये

    मुख से जब कुछ बोलें तो
    साईं नाम ही दोहरायें
    कानों से कुछ सुनना हो तो
    साईं नाद ही सुन पायें

    हाथ उठें तो जुड जायें
    श्री चरणों में भक्ती से
    कारज करते साईं ध्यायें
    बाबा जी की शक्ती से

    पांव चलें तो मन्ज़िल उनकी
    बाबा जी का द्वारा हो
    पांव रुकें तो ठीक सामने
    मेरा साईं प्यारा हो

    रसना का रस ऐसा हो जाये
    साईं नाम में रस आये
    बैठे, उठते, सोते, जगते 
    साईं जी का जस गायें

    सांस सांस जब आवे जावे,
    साईं का अनहद नाद हो
    अंत समय जब सांस रुके तो
    साईं जी की याद हो

    ऐसे काया पावन होगी
    मन मन्दिर हो जावेगा
    साईं याद में डूबा प्राणी
    साईं में मिल जावेगा


    जय साईं राम

    साईं सेविका

    Offline nimmi_sai

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      • Sai Baba
    Re: My dream kaash agar kaheen aisa hota
    « Reply #21 on: November 14, 2007, 11:34:10 AM »
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  • dear saisewika  ji....welldone .....
    thanksss for posting this prayer ........i really enjoyed reading it ..
      may baba richly bless u ....
    om sai shri sai jai jai sai
    Surrender your problem entirely to God.
    Be humble.
     Forgive all your enemies.
    Have faith. Do not doubt.
    Thank God in advance and praise Him.
    Pray from the heart.
    om sai shri sai jai jai sai
    Nimmi

    Offline saisewika

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    Re: My dream kaash agar kaheen aisa hota
    « Reply #22 on: November 15, 2007, 08:33:52 AM »
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  • ओम साईं राम

    आज साईंजी आये थे
    हमसे यह लिखवाये थे
    शुक्रिया उनका चले आते हैं वो
    जो जी चाहे हमसे लिखवाते हैं वो

    जय साईं राम

    साईं सेविका


    Offline saisewika

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    Re: My dream kaash agar kaheen aisa hota
    « Reply #23 on: November 19, 2007, 10:15:22 AM »
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  • ओम साईं राम

    ये जो नश्वर काया है...........


    चंचल मन इक मंदिर हो जाये
    साईं का जिसमें डेरा हो
    मोह माया ना होवे जिसमें
    ना अग्यान अंधेरा हो

    मन की डोर थमी हो मेरे
    बाबा जी के हाथ में
    जब जी चाहे ले जायें वो
    इसको अपने साथ में

    जय साईं राम


    Offline tana

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      • Sai Baba
    Re: My dream kaash agar kaheen aisa hota
    « Reply #24 on: November 19, 2007, 09:11:16 PM »
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  • ॐ सांई राम~~~

    ये पत्तियां ये घास प्यारी,
    हर कली हर डाली प्यारी,
    कितने शांत मुस्कुरा रहे है,
    वो कौन सा सुख है जो ये पा रहे है।
    न जलन न कुढ़न,
    न वैर न क्लेश है।
    बस प्यार ही बरसा रहे है,
    लगता है जैसे सांई गुण गा रहे है,
    यूं मौन खिलखिला रहे है,
    रचयिता को रिझा रहे है,
    हम प्यासे है जिस प्यार के लिए,
    लगता है वही प्यार ये पा रहे है~~~

    जय सांई राम~~~
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
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    Offline saisewika

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    Re: My dream kaash agar kaheen aisa hota
    « Reply #25 on: November 21, 2007, 09:44:47 AM »
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  • ओम साईं राम

    धन्य धन्य हे शिरडी धाम 
    जहां पधारे साईं राम

    धन्य धन्य गोदावरी के तट
    जहां लगा भक्तों का जमघट

    धन्य धन्य हे नाथ खंडोबा
    नाम पडा जहां साईं बाबा

    धन्य धन्य शिरडी के वासी 
    साईं दरशन के अभिलाषी

    धन्य धन्य हे द्वारका माई
    जिसकी महिमा दस दिश छाई

    धन्य धन्य हे चावडी धाम
    बाबा करते थे विश्राम 

    धन्य धन्य  हे नीम महान
    बाबा जी का गुरु स्थान

    धन्य धन्य  हे समाधी मंदिर
    भाग्य उदय हो जिसके अन्दर

    धन्य शिरडी के घर द्वार
    नाथ खडे थे हाथ पसार

    धन्य शिरडी के पत्ते फ़ूल
    पाई श्री चरणों की धूल

    जय साईं राम

    साईं सेविका






    Offline tana

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      • Sai Baba
    Re: My dream kaash agar kaheen aisa hota
    « Reply #26 on: November 21, 2007, 10:55:26 PM »
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  • ॐ सांई राम~~~

    हे सांई क्या कभी ऐसा होगा ??
    सिर्फ़ आप हो और मैं होऊं...
    आप सामने हो मैं कुछ ना कहूं...
    बस जी भर कर दर्शन करूं...
    कुछ कहूं ना और सब कह जाऊं...
    सारी बातें दिल की मैं आंसूओं मैं कह जाऊं...
    मन का हाल सुना डालूं , कुछ भी ना छुपाऊं...
    कोई ना रोके मुझको , मैं जी भर कर आंसू बहाऊं...

    देख कर इन आंसूओं को , जब आप मुझे समझाएं ,
    आप की उस प्यार के अम्रत में , मैं जी भर डुबकी लगाऊं...
    मैं जो ऐसा हो तो उस पल पर , मैं अपना सब कुछ वार जाऊं...

    पर वारूं भी क्या , सब कुछ तो है उधार ...
    ये तन उधार , ये मन उधार...
    यदि है कुछ  मेरा अपना , तेरे लिए बस मेरा प्यार~~~मेरा प्यार~~~मेरा प्यार~~~

    जय सांई राम~~~
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
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    May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
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    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: My dream kaash agar kaheen aisa hota
    « Reply #27 on: November 24, 2007, 04:49:39 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    आज गुरूपुरब के शुभ अवसर पर मेरे सभी भाई बहनों को मेरी शुभकामनायें।

    अपने लिए कहीं आसरा
    ढूढने से अच्छा है
    हम ही लोगों के सहारा बन जाएं
    किसी से प्यार मांगे
    इससे अच्छा है कि
    हम लोगों को अपना प्यार लुटाएं
    किसी से कुछ पाने की ख्वाहिश
    पालने से अच्छा है कि
    हम लोगों के हमदर्द बन जाएं
    जिन्दगी में सभी हसरतें पूरी नहीं होती
    कुछ अपने ही हिस्से का सुख काम करते जाएं
    आकाश की लंबाई से अधिक है
    चाहतों के आकाश का पैमाना
    सोचें दायरों से बाहर हमेशा
    पर अपनी जरूरतें
    दायरों में ही रखते जाएं

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline saisewika

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    Re: My dream kaash agar kaheen aisa hota
    « Reply #28 on: November 29, 2007, 01:35:17 PM »
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  • ओम साईं राम

    अगर साईं का प्यार एक समन्दर है
    तो मैं इसमें डूब जाना चाहती हूं
    किनारे की कोई ललक नहीं मुझको
    मैं तो लहर बनके इसमें समाना चाहती हूं

    अगर साईं का प्यार एक तपता सूरज है
    तो मैं इसमें झुलस जाना चाहती हूं
    मैं वो शै नहीं जो आग से डरूं
    मैं खुद को इसमें तपाना चाहती हूं

    अगर साईं का प्यार एक रास्ता है
    तो मैं इस पर चलते जाना चाहती हूं
    कंकडों पत्थरों की परवाह नहीं है मुझे
    मैं तो रास्ते की धूल बन जाना चाहती हूं

    अगर साईं का प्यार एक मन्ज़िल है
    तो मैं उस मन्ज़िल को पाना चाहती हूं
    साईं मैं तेरे कदमों में आ पडी हूं
    यहीं अपना आखिरी ठिकाना चाहती हूं

    जय साईं राम

    साईं सेविका

    Offline Ramesh Ramnani

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      • Sai Baba
    Re: My dream kaash agar kaheen aisa hota
    « Reply #29 on: November 29, 2007, 10:38:13 PM »
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  • जय सांई राम।।।

    तुम्हारी कविताओं के लिये मेरे पास वाह के अलावा शब्द नही होते।  मैं तो सिर्फ यह कह सकता हूँ कि मेरे बाबा सांई तुम्हारे जैसे भक्तों को अपने हृदय में बसा के रखते है। एक बार फिर शुक्रिया तुम्हारी नायाब कविता के लिये।  ऐसे ही अपने प्यार के फूल बाबा के चरणों मे सर्मपित करते रहना।

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

     


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