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Author Topic: बाबा की यह व्यथा  (Read 158049 times)

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Offline saisewika

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Re: बाबा की यह व्यथा
« Reply #105 on: September 25, 2008, 11:02:50 AM »
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  • OM SAI RAM

    Thank You etgirlji.

    Its all Baba's inspiration.

    JAI SAI RAM

    Offline saisewika

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #106 on: September 29, 2008, 09:09:08 AM »
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  • ॐ साईं राम

    साईं नाम की माला फेरूँ
    साईं के गुण गाऊं
    यहाँ वहाँ या जहाँ रहूँ
    साईं साईं ध्याऊं

    आँख उठाऊँ साईं दिखता
    आँख झुकाऊँ साईं
    मन मन्दिर में आन विराजा
    मेरा सर्व सहाई

    दीवानी सी हुई बावरी
    साईं तेरी दासी
    निरख निरख सुख पातीं
    फिर भी अखियाँ रहती प्यासी

    साँस साँस जो आती जाती
    साईं साईं ध्याती
    गुण गान करती ये जिव्हा
    कभी ना थकने पाती

    बस ऐसे ही साईं मेरे
    तुझको ध्याती जाऊं
    सिमर सिमर कर स्वास स्वास में
    साईं तुझको पाऊँ

    कभी ना भूलूं देवा तुझको
    मुझको ऐसा कर दो
    तुझको भूलूँ तो जग छूटे
    साईं ऐसा वर दो

    जय साईं राम     

    Offline saisewika

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #107 on: February 23, 2009, 07:40:16 AM »
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  • HAPPY MAHASHIVRATRI TO ALL


    ॐ साईं राम

    साईं अपरम्पार तुम
    शिवजी के अवतार तुम

    भक्त जनों का करने तारण
    मानव चोला कर लिया धारण

    धरती पर उतरे कैलासी
    बन कर देवा शिरडी वासी

    विरक्ति वही विराग वही था
    नवजीवन पर त्याग वही था

    त्रिशूल छोड कर सटका थामा
    जटाधारी ने पटका बांधा

    व्याघ्र चर्म को छोड़ के दाता
    कफनी धारण करी विधाता

    त्याग कमंडल पकडा टमरैल
    सबके दिल का धोते मैल

    शिव साईं ने मांगी भिक्शा
    मालिक एक की देते शिक्शा

    जटा की गंगा चरण में लाए
    भक्त जनों का मन हरषाए

    तन की भस्म की करी विभूति
    स्वंय हाथ से देते ऊदि

    मृगछाला का छोड बिछोना
    शुरु किया तख्ते पर सोना

    उसके भी टुकड़े कर डाले
    शिव साईं के रंग निराले

    वीतरागी थे महा अघोरी
    सबके दिल की करते चोरी

    अमृत छोड के विष पी जाते
    भक्तों का हर दुख अपनाते

    शिवशंकर साईं भगवान
    कोटि कोटि है तुम्हें प्रणाम


     जय साईं राम
    « Last Edit: February 23, 2009, 09:50:18 AM by saisewika »

    Offline saisewika

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #108 on: March 11, 2009, 11:37:53 AM »
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  • HAPPY HOLI TO ALL SAI BANDHUS


    ॐ साईं राम

    आओ हिलमिल होली खेलें
    साईंनाथ के संग
    भक्ति भाव में रंग ले खुद को
    रंगे साईं के रंग

    श्रद्धा की पिचकारी थामें
    सबुरी का हो गुलाल
    तज के सब दुर्भावना
    रंगे साईं के लाल

    तन को रंग ले मन को रंग लें
    रंग लें दिल और जान
    साईं नाम की भंग चढा लें
    भूलें सकल जहान

    प्रेमगंग में सरोबार हो
    झूमें तेरी तरंग में
    होली आए होली जाए
    रंगे रहें तेरे रंग में

    जय साईं राम

    Offline saisewika

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    Re: द्वारकामाई
    « Reply #109 on: April 24, 2009, 09:53:49 AM »
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  • ॐ साईं राम

    अति पुनीत है,पावन है,
    है परम सुखदायी
    शिरडी धाम में बाबाजी का
    स्थल है द्वारकामाई

    साठ बरस तक यही बनी थी
    बाबा जी का द्वारा
    भक्ति रस की बहती रहती
    यहां निरंतर धारा

    हिंदु मुस्लिम सबको आश्रय
    देती मस्जिद माई
    राम रहीम को जोड दिया था
    साईं सर्वसहाई

    कभी नमाज़ की अजान गुंजाकर
    मस्जिद इसे बनाया
    दीपों से कभी जगमग करके
    मंदिर यहीं बनाया

    रामलला का यहीं पडा था
    पलना सजा सजाया
    चन्दन उत्सव भकतजनों ने
    हिलमिल यहीं मनाया

    यहीं बैठकर बाबाजी ने
    जल से दीप जलाए
    लीलाधर की लीला के
    सबने सुख थे पाए

    यहीं साईं नाथ जी ने
    श्री चरणों से गंग बहाई
    धन्य किया भक्तों को,
    तीरथ बन गई द्वारकामाई

    चक्की पीसी, शिरडी की
    सीमा पर आटा डाला
    द्वारकामाई में बैठा फकीर वो
    सबका है रखवाला

    कर कमलों से बाबाजी ने
    धूनि अलख जलाई
    इसी से उपजी ऊदि की
    महिमा दस दिश छाई

    भक्तजनों की काशी है ये
    मस्जिद माई महान
    यहां पे आकर मिट जाते हैं
    झंझावत तूफान

    इसकी महत्ता का बाबा ने
    स्वयं किया गुणगान
    श्री मुख से साईं जी ने
    आप दिया फरमान--

    "द्वारकामाई की गोदी में
    जो बैठेगा आकर
    दुख दर्द सब मिट जावेंगे
    होगा जीव उजागर"

    "द्वारकामाई की सीढी पर
    जो रख देता पांव
    उसके जीवन में फिर दुख का
    नहीं रहे कोई ठांव"

    इसके कण कण में बसते हैं
    सबके प्यारे साईं
    जिसको दर्शन पाने हो
    आ जाए द्वारकामाई

    जय साईं

    Offline shalabh

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    • Om Shree Sai Nathay
    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #110 on: April 24, 2009, 09:52:57 PM »
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  • जय साईं राम
    SHALABH     BHARADWAJ

    Offline saikripa.dimple

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    • Om Sai Ram
    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #111 on: April 29, 2009, 12:19:26 AM »
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  • JAI SAI RAM
    @@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@@

    sach, bilkul sach hi likha hai aapne
    kaise hum log bina baba ke baare me soche
    kahte jaate hai unse
    kitne swarthi ho jate hai hum log

    Aapne apni feelings  ko is kadar shabdo me utara hai kii
    kuch kahne ko shabd nh hai
    aur aankhein aansuon se bhari hai;;

    baba too dekh hi rahe honge
    ise padkar baba ko bahut khushi hogi
    qkii yahi toh asli bhakti
    baaki sab toh kuch na kuch maangne hi jaate hai unke paas
    magar aapne unhe samjha
    yeh jankar bahut khush honge hamare baba ji

    Jai sai Ram
    Jai Sai Ram
    Sai teri "Kami" bhi hai, tera "Ehsaas" bhi hai....

    Sai tu "Door" bhi hai mujhse par "Paas" bhi hai......

    Khuda ne yun nwaza hai teri "Bhakti" se mujhko.....

    Kii.............

    Khuda ka "Shukr" bhi hai aur khud pe "Naaz" bhi hai..

    Offline saikripa.dimple

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    • Om Sai Ram
    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #112 on: April 29, 2009, 12:31:45 AM »
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  • Aao aaj hum sab milkar ye Vaada kare khudse
    Kii

     
    Jis haal me rakhe Sai , Us haal me khushi se rahenge Hum
    Sukh ho ya Dukh , Naam unka japenge har pal
    Chahe bhatkaye ye zamana
    Chahe maare jag taana
    Magar Sai Sai kahte kahte
    Jeevan gujarenge Hum

    Kuch kahna hoga gar Sai se
    Toh Shukriya hi karenge Hum

    mila hai ye jeevan toh den hai usi ki
    Usi ke liye jeevan nyochhavar karenge Hum

    Nahi hume haq rulane ka kissi ko
    Nahi hume haq satane ka kissi ko
    Gar nh kar paaye kisi ki madad toh
    Rasta use Sai Dar ka dikhlayenge Hum

    Joh bhatak gaye hai zindagi se apni
    Joh naraz hai har khushi se apni
    Joh anjaan hai Sai ki shakti se
    Unhe jeevan jeena sikhayenge Hum

    Nahi phir Sai ka dil kabhi dukhayenge Hum
    Kabhi na karenge shikwa unse
    Sada musakuraayenge Hum

    Hai yakeen mera musakurata hume dekh kar
    Sai ki Vyadha ko kam kar paynge hum

    Do Sai Aashirwaad prann ko hamare
    Saari duniyaa ko Sai se milana Chahate hai Hum

    Diya hai Jeevan Ye aapne
    Aapko hi samarpit ye jeevan karte hai hum

    Karo aisi kripa apne bachcho par
    Aa kar paas tumhare
    tumhare hi ho le Hum

    Na bhule kabhi dil Sai ko apne
    Sote Jagte Sai Japte rahe Hum


    OM SAI RAM
    Jai Sai Ram
    Sai teri "Kami" bhi hai, tera "Ehsaas" bhi hai....

    Sai tu "Door" bhi hai mujhse par "Paas" bhi hai......

    Khuda ne yun nwaza hai teri "Bhakti" se mujhko.....

    Kii.............

    Khuda ka "Shukr" bhi hai aur khud pe "Naaz" bhi hai..

    Offline saisewika

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    Re: साईं प्यार तुम्हारा
    « Reply #113 on: May 10, 2009, 06:52:33 PM »
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  • ॐ साईं राम
     
    साईं प्यार तुम्हारा
     
    साईं प्यार तुम्हारा मुझको
    कर देता है मतवाला
    अपने प्रेम के रंग में साईं
    तन मन तुमने रंग डाला
     
     
    कभी कभी शब्दों में ढलकर
    ये प्यार गीत बन जाता है
    कभी कभी मरहम बन जाता
    मुझे आन दुलराता है
     
     
    कभी सपनों की नगरी में ये
    हाथ थाम ले जाता है
    साईं प्यार तुम्हारा मुझको
    शिरडी तक पहुंचाता है
     
     
    कभी कभी ये सावन बन कर
    चहुँ ओर छा जाता है
    मेरे मन के आँगन में ये
    रिम झिम मेह बरसाता है
     
     
    कभी पवन का झोंका बन कर
    तन मन शीतल करता है
    प्राण हीन सी पडी हुई में
    नव जीवन ये भरता है
     
     
    कभी कभी पर प्यार तुम्हारा
    मुझको यूँ तरसाता है
    तुमको कान्हा, विरह में मुझको
    मीरा सा कर जाता है
     
     
    जय साईं राम

    Offline saisewika

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #114 on: May 20, 2009, 07:57:40 AM »
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  • OM SAI RAM

    Sainetra ji

    Tanvi is truely a blessed child of Baba Sai.

    Its Baba's grace and kripa that she is singing his stuti at the age of 3.5.....


    May Baba always bless Tanvi and your family.


    JAI SAI RAM

    Offline saisewika

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    Re: काश ...........
    « Reply #115 on: May 21, 2009, 09:18:33 AM »
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  • ॐ साईं राम
     
    काश अगर मैं सटका होती
    साईं तेरे हाथ का
    परम पुनीत होता ये जीवन
    सुख पाती तव साथ का
     
     
    मुझे हाथ में थामे रहते
    मेरे प्यारे साईं राम
    फिर कोई चाहत ना रहती
    जीवन हो जाता निष्काम
     
     
    कभी धरा पर पटक के सटका
    जल के स्त्रोत बहाते तुम
    अग्नि ज्वाला मद्धम होती
    सटका जो लहराते तुम
     
     
    'सटका लीला' करते साईं
    निरख निरख जग सुख पाता
    तेरे हाथ में आकर साईं
    मेरा जीवन तर जाता
     
     
    काश अगर मैं झोला होती
    कन्धे पर लटकाते तुम
    जहां जहां भी जाते साईं
    मुझको भी ले जाते तुम
     
     
    सारे सुख दुख भक्त जनों के
    मुझमें तुम डाला करते
    बडे जतन से, समझ के संपद
    मझको नाथ संभाला करते
     
     
    काश अगर मैं कफनी होती
    मुझको धारण करते तुम
    पतित जो जीवन इस दासी का
    इसका तारण करते तुम
     
     
    कैसा पावन जीवन होता
    पाकर साईं संग तेरा
    कतरे कतरे पर चढ जाता
    प्रेम तेरा और रंग तेरा
     
     
    और जो होती तेरी पादुका
    श्री चरणों में रहती मैं
    मुझसा भाग्य नहीं किसी का
    ऐसा सबसे कहती मैं
     
     
    श्री चरणों की पावन रज को
    साईं निशदिन पाती मैं
    धारण कर मस्तक पर, अपनी
    किस्मत पर इतराती मैं
     
     
    टमरैल या भिक्षा पात्र ही होती
    साईं तेरी दासी तो
    महा पुण्य प्रताप मिल जाता
    नित दर्शन की प्यासी को
     
     
    जाने कितने क्षुधित तृषित
    तृप्ति आकर पा जाते
    कौर कौर को तरस रहे जो
    महाप्रसाद वो पा जाते
     
     
    काश अगर जो ऐसा होता
    धन्य धन्य हो जाती मैं
    पद पंकज में आश्रय पाकर
    चिर विश्रांति पाती मैं
     
     
    जय साईं राम

    Offline child_of_sai

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #116 on: May 22, 2009, 07:34:15 AM »
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  • saisewika ji, very nice indeed...thanks...
    Sai Ram.

    Offline saisewika

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #117 on: May 29, 2009, 11:43:27 AM »
  • Publish
  • OM SAI RAM

    Thanks child_of_SAI ji.


    JAI SAI RAM

    Offline saisewika

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #118 on: July 07, 2009, 11:47:23 AM »
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  • ॐ साईं राम

    गुरु शिष्य पूर्णिमा


    सदगुरू साईं गुरू दिवस की
    आपको बहुत बधाई
    श्री चरणों में हमको रखना
    साईं सर्व सहाई

    पुण्य दिवस में हमको साई
    बस इतना ही वर दो
    गुरू दिवस के संग संग इसको
    शिष्य पूर्णिमा कर दो

    हर शिष्य के मन मंदिर में
    साईॅ आन विराजो
    दास जनों के हृदय पटल पर
    सूरज सम तुम साजो

    शरण में अपनी राखिए
    सदगुरू साईं सुजान
    श्रद्धा और सबूरी का
    प्रभु दीजिए दान

    भक्ति से साईं आपकी
    कभी ना भटके मन
    हर पल तुझमें रमा रहे
    नश्वर ये जो तन

    सबके मन में सदा जले
    तेरे नाम की जोत
    प्रेम तेरे के रंग में साईं
    रहें ओत और प्रोत

    सदगुरू की महिमा अनंत
    नित नित गाते जाएं
    प्रति दिवस हो गुरू पूर्णिमा
    हर दिन इसे मनाऐॅ

    गुरू शिष्य की परम्परा
    सदा रहे अखंड
    ऐसा आशिश दीजिए
    हे श्री सच्चिदानन्द॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰

    जय साईॅ राम

    Offline saisewika

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    Re: साईं सतचरित्र
    « Reply #119 on: July 12, 2009, 03:43:24 PM »
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  • ॐ साईं राम

    साईं सतचरित्र

    साईं सतचरित्र नाम की
    महागंग है एक
    इसमें डूब के तर गए
    साईं भक्त अनेक

    साईं मार्ग का जान लो
    ये है अनुपम मोती
    भक्तों के जीवन में जगती
    इससे जगमग ज्योति

    बाबाजी के जीवन की
    इसमें सकल है गाथा
    जो बांचे इसे प्रेम से
    सो अतिशय सुख पाता

    साईं नाथ का नाम ले
    भाव की जोत बना लो
    अश्रु घी बन जाएंगे
    प्रेम का दीप जला लो

    श्रद्धा और सबूरी से
    अपने मन को भर लो
    चिन्तन, मनन,ध्यान फिर
    साईं नाथ का कर लो

    मन में धर के धारणा
    निशदिन पढो पढाओ
    हर अक्षर के संग में
    साईं साईं ध्याओ

    सांयकाल या प्रातः हो
    जब जी चाहे पढना
    या फिर सप्ताह पाठ ही
    चाहे इसका धरना

    समय हो चाहे खुशी का
    या आपद की घात
    पढो समय कट जावेगा
    यही सार की बात

    सतचरित्र के पठन से
    बढे भक्ति और ज्ञान
    पतित आत्मा पावन हो
    जन का हो कल्याण

    अविद्या का नाश कर
    काटे पाप के कर्म
    भवसागर से पार हो
    समझ गया जो मर्म

    सतचरित्र के पाठ से
    खुले मोक्ष के द्वार
    जन्म मरण छूटे सभी
    जन का हो उद्धार

    जय साईं राम

     


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