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Author Topic: बाबा की यह व्यथा  (Read 157774 times)

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Offline MANAV_NEHA

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Re: बाबा की यह व्यथा
« Reply #90 on: July 01, 2008, 02:06:11 PM »
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  • साई की है महिमा इतनी न्यारी
    जिस पर नाज़ करती है यह दुनिया सारी
    तेरी कृपा की है अब आशा
    तेरे रूप को देखने की है अभिलाषा
    कब हमारा मनोरत सिद्ध होगा
    कब इन आखो को तेरा दर्श होगा
    तुझ में है यह जग समाया
    तेरे दर से न कोई खाली आया
    सबके ह्रदय की बात तू जाने
    सबके मन में तू विराजे
    कण कण में तेरा वास है
    तेरी करुना का न कोई पार है
    तेरी महिमा है इतनी न्यारी
    जिसपे नाज़ करती है यह दुनिया सारी.......ॐ साई राम     
         
    गुरूर्ब्रह्मा,गुरूर्विष्णुः,गुरूर्देवो महेश्वरः
    गुरूर्साक्षात् परब्रह्म् तस्मै श्री गुरवे नमः॥
    अखण्डमण्डलाकांरं व्याप्तं येन चराचरम्
    तत्विदं दर्शितं येन,तस्मै श्री गुरवे नमः॥


    सबका मालिक एक

    Offline tana

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #91 on: July 01, 2008, 09:24:36 PM »
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  • ॐ साँई राम~~~

    अब और मुझसे सहा न जाए
    इक पल भी दूर रहा न जाए
    अब मुझे कुछ भी न भाए
    सांस लेना भी भारी लगे
    हर पल आप की याद सताएं
    आप ने क्या कर दिया
    मेरा कैसा हाल किया
    अब तो आँसू भी नहीं आते
    जब आते है तो रूक नहीं पाते
    आप की छवि आँखों में रहती
    दिल को मेरे कचोटती रहती
    बाहें फैलाए मुझे बुलाती
    पर मैं तो आ ही न पाते
    फिर उस पल मेरा दिल घबराए
    जी चाहे अभी उङ जाए
    पंछी बिन पर जैसे फङफङाए
    इसका वही हाल हो जाए
    ये आप तक आ न पाए
    बस यहीं पङा मायूस हो जाए
    अब और सही नहीं जाती ये सजाएं
    अब तो आप कृपा बरसाएं
    मुझको चरणों में अब बिठाएं~~~

    जय साँई राम~~~

    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
    Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

    May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
    May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

    Offline tana

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #92 on: July 04, 2008, 08:43:31 PM »
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  • ॐ साँई राम~~~

    बाबा की यह व्यथा~~~

    वाह रे वाह ओ समझदार इंसान,
    इतना कुछ मिला तुझे शुक्र ना हुआ,
    कुछ एक आध रह गया फट गिला दे दिया~~~

    जय साँई राम~~~
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
    Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

    May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
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    Offline tana

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #93 on: July 09, 2008, 09:37:12 PM »
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  • ॐ सांई राम~~~

    तेरे चाहने से कुछ नहीं होता
    होगा वही जो किस्मत में लिखा होगा,
    रो रो कर गिङगिङा कर देख ले
    फिर भी होगा वही जो होना होगा,
    तू कर समझौता और मुस्कुरा कर के देख
    फिर दुखों का दर्द कुछ कम होगा,
    खुशी-गम चाहे हो सुख-दुःख
    सब उसी की इच्छा से होगा,
    जीवन बिता पर ये याद रख
    उसकी इच्छा में कभी तेरा बुरा ना होगा,
    दुःख-सुख जो भी मिले तुझे
    इसमे जरूर कुछ भला ही होगा~~~


    जय सांई राम~~~

    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
    Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

    May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
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    Offline tana

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #94 on: July 25, 2008, 07:54:10 AM »
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  • ॐ साईं राम~~~

    जैसे बच्चा अपने टूटे खिलौने लाता है,
    आँखो में आँसू लिए,माता-पिता के पास!
    वैसे ही हम अपने टूटे सपने लाते है बाबा के पास,
    क्योंकि साईं, मेरे करूणामयी साईं पूरी करते है सब की आस!!

    फिर शांति से उन्हें काम
    करने देने की बजाय
    हम बार-बार उन्हें टोकते है,
    अपने ढ़ग से उन्हें मदद की गुहार लगाते है,
    ऐसा होता तो अच्छा रहता,
    ये हो जाता तो और अच्छा हो जाता,
    वो नहीं किया....ऐसा कर दो न बाबा.....

    जब फिर पूरे न होते सपने,
    फिर यूँ लगता अब बाबा न रहे अपने,
    फिर लगाने लगते शिकायतों की फेरी,
    दूसरों की व्यथा सुनते हो
    और मेरी बारी क्यों इतनी देरी??

    फिर मेरे साईं मेरे बाबा बोले कुछ यूँ रो कर--
    "ओ मेरे प्यारे बच्चों ,मैं क्या करता?
    मैं क्या कर सकता था?
    तुमने कभी पूर्ण विश्वास किया ही नहीं,
    तुमने कभी पूरी तरह छोङा ही नहीं मुझ पर ".....


    जय साईं राम~~~

    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
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    Offline saisewika

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #95 on: August 07, 2008, 08:57:36 AM »
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  • ओम साईं राम


    उदासियों के साये
    है ज़िंदगी पे छाये
    रस्ते पे हैं निगाहें
    शायद कभी तू आए

    जय साईं राम


    Offline abhinav

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #96 on: August 07, 2008, 09:12:02 AM »
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  • इस राह को मै तेरी राह समझकर चलने लगा,
    लड्खडाते कदमों से गिर-गिरकर मैं सम्भलने लगा।

    चला आया हूँ बहुत दूर अब घर से मैं,
    कि लौट के जाना भी अब मुम्किन तो नहीं।

    मुझे मंजिल मिले ये जरूरी तो नहीं,
    मै इसे तेरी रज़ा समझकर बढने लगा।
    मी पापी-पतित धीमंद । 
    तारणें मला गुरुनाथा, झडकरी ।।
    मुझसा कोई पापी तेरे दर पे ना आया होगा।
    और जो आया होगा, खाली लौटाया ना होगा॥
    ॐ साई राम          اوم ساي رام          ਓਮ ਸਾਈ ਰਾਮ          OM SAI RAM          ॐ साई राम          اوم ساي رام          ਓਮ ਸਾਈ ਰਾਮ          OM SAI RAM          ॐ साई राम          اوم ساي رام          ਓਮ ਸਾਈ ਰਾਮ          OM SAI RAM          ॐ साई राम          اوم ساي رام          ਓਮ ਸਾਈ ਰਾਮ          OM SAI RAM

    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #97 on: August 07, 2008, 09:28:02 AM »
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  • ओम साईं राम

    उदासियों के साये
    है ज़िंदगी पे छाये
    रस्ते पे हैं निगाहें
    शायद कभी तू आए

    जय साईं राम



    जय सांई राम।।।

    वो अपने दिल में एक तलाश रखते है
    न जाने क्यों हसीन चेहरे को उदास रखते है
    निगाहें उनकी बयां करती है हाल-ऐ-दिल
    न जाने क्यों लबों को वो खामोश रखते है

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline tana

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      • Sai Baba
    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #98 on: August 10, 2008, 11:32:36 PM »
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  • ओम साईं राम


    उदासियों के साये
    है ज़िंदगी पे छाये
    रस्ते पे हैं निगाहें
    शायद कभी तू आए

    जय साईं राम


    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
    Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

    May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
    May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #99 on: August 16, 2008, 01:50:10 PM »
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  • ओम साईं राम

    साईं तेरा साथ मिला
    जीवन से अब नहीं गिला

    बाबा तेरी भक्ति पाई
    दुख सहने की शक्ति पाई

    मन में जागी श्रद्धा पूरी
    सब्र किया और पाई सबूरी

    श्री चरणों में डाला डेरा
    दामन थाम लिया बस तेरा

    भेद भाव की तोड दिवार
    तुझ से कर ली आंखे चार

    कर्ता पन का भाव छोडकर
    मैं पन की तलवार तोड कर

    तुझ से प्रीत लगाई साईं
    थामें रहना सर्व सहाई

    परम प्रिय हे साईं हुज़ूर
    खुद से ना अब करना दूर

    कभी छोडना ना तुम साथ
    वरना जी ना पाएंगे हम नाथ

    जय साईं राम

    Offline saisewika

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #100 on: September 02, 2008, 11:32:26 AM »
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  • ॐ साईं राम

    साईं नाथ का आशीर्वाद है ऊदी
    बाबाजी का प्रसाद है ऊदी

    त्याग का पाठ पढाती है ऊदी
    वैराग का ज्ञान कराती है ऊदी

    बीमार की संजीवनी दवा है ऊदी
    भक्तो को बाबा की दुआ है ऊदी

    मुश्किलों में सहारा देती है ऊदी
    डूबते को किनारा देती है ऊदी

    श्रद्धालु के माथे का टीका है ऊदी
    जीवन जीने का तरीका है ऊदी

    बाबा पर बच्चो का विशवास है ऊदी
    साईं भक्तो के लिए बहुत ही ख़ास है ऊदी

    देवा के प्यारो की पूंजी है ऊदी
    असंभव से कामो की कुंजी है ऊदी

    साईं के संग का एहसास है ऊदी
    उनसे निकटता का आभास है ऊदी

    जय साईं राम

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #101 on: September 07, 2008, 10:10:48 AM »
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  • ॐ साईं राम

    कल रात सपने में मैंने
    बाबा जी को देखा
    आंखों से आंसू झरते थे
    मिट गयी थी स्मित रेखा

    सिसक रहे थे मेरे बाबा
    भरते लम्बी आँहें
    भक्तों ने ये क्या कर डाला
    चाहे या अनचाहे

    मैंने तो समझा था मेरे     
    प्यारे भक्त अनेक
    मिल जुल नाम करेंगे रोशन
    मेरा सहित विवेक 

    देख देख गदगद होता था
    सुंदर द्वारकामाई
    दूर दूर के भक्तों ने
    भावो. से जो सजायी

    अनुभव कोई सुनाता अपने
    नाम जाप कोई करता
    मुझको सबने मान लिया था
    सुख करता दुःख हरता

    कुछ दिन से पर लगता ऐसा
    भक्त खो गए सारे
    तू तू मैं मैं पर आ उतरे
    जो थे मेरे प्यारे

    उलझन में यूँ उनको पाकर
    मन रोता है मेरा
    क्यूँ मेरे मन्दिर में छाया
    अहम् भाव का घेरा

    क्या मैं समझूं भक्तों का
    विशवास ना मैंने जीता
    या फिर श्रद्धा और सबुरी
    से उनका मन रीता

    घायल मन है दुखी आत्मा
    देख सको तो देखो
    नाम छोड़ कर भटक रहे हैं
    मेरे भक्त अनेकों

    बाबा जी की व्यथा जान कर
    मन मेरा भी रोया
    बाबा हमको वापस दे दो
    जो भी हमने खोया

    मानव हैं हम हमसे दाता
    भूल हो गयी भारी
    हाथ जोड़कर क्षमा माँगते
    तुमसे बारी बारी

    बस अपना आशीष और प्यार
    मैया हमको दे दो
    अहम् भाव सब तुम्हें समर्पण
    इसको तुम ही ले लो

    वादा करते हैं हम तुमसे
    फिर ना होगा ऐसा
    जैसा तुम चाहते हो साईं
    मन्दिर रहेगा वैसा

    जय साईं राम

    Offline tana

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      • Sai Baba
    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #102 on: September 21, 2008, 09:06:44 PM »
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  • ॐ साँई राम~~~

    अब और मुझसे सहा न जाए
    इक पल भी दूर रहा न जाए
    अब मुझे कुछ भी न भाए
    सांस लेना भी भारी लगे
    हर पल आप की याद सताएं
    आप ने क्या कर दिया
    मेरा कैसा हाल किया
    अब तो आँसू भी नहीं आते
    जब आते है तो रूक नहीं पाते
    आप की छवि आँखों में रहती
    दिल को मेरे कचोटती रहती
    बाहें फैलाए मुझे बुलाती
    पर मैं तो आ ही न पाते
    फिर उस पल मेरा दिल घबराए
    जी चाहे अभी उङ जाए
    पंछी बिन पर जैसे फङफङाए
    इसका वही हाल हो जाए
    ये आप तक आ न पाए
    बस यहीं पङा मायूस हो जाए
    अब और सही नहीं जाती ये सजाएं
    अब तो आप कृपा बरसाएं
    मुझको चरणों में अब बिठाएं~~~

    जय साँई राम~~~

    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

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    May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

    Offline saisewika

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #103 on: September 24, 2008, 11:08:12 AM »
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  • ॐ साईं राम

    कल रात सपने में मैनें
    फिर बाबा को पुकारा
    कई प्रश्न पूछने हैं
    आ जाओ ना दोबारा

    आवाज़ मेरी सुनकर
    बाबाजी चले आए
    प्रश्नों की झडी लगादी
    बिन क्षण भी इक गवाए

    जो भी था मेरे मन में
    उनके समक्ष रखा
    फिर साईं की वाणी का
    सुमधुर सा रस चक्खा

    मैंने कहा ये उनसे
    साईं इतना तो बता दो
    मेरी भक्ती में क्या कमी है
    ये मुझको भी जता तो

    कभी भी बाबा क्यूँ तुम
    मेरे सामने ना आते
    क्यूँ चमत्कार कोई
    मुझको नहीं दिखलाते

    सोती हूँ जागती हूँ
    मैं तेरे ही सहारे
    नख शिख से जानता है
    मुझको तू साईं प्यारे

    फिर क्यूँ नहीं दिखलाते
    तुम लीला कोई न्यारी
    अदभुत सा खेल कोई
    दिखलादो अबकी बारी

    वो फूलों की जो माला
    मैनें तुम्हें चढाई
    मैं देखती ही रह गयी
    पर तुमने ना बढाई

    मेरे सामने हे दाता
    तुमने ना आँख खोली
    इक पलक ही झपका दो
    मैं कितना तुमसे बोली

    साईं तेरे लबों को
    मैं एक टक निहारी
    कभी ना बोले मुझसे
    तुम बाबा एक बारी

    मेरे घर का हर इक कोना
    मैंने तो छान डाला
    तुम कहीं तो दिखोगे
    ये वहम मैंने पाला

    पर तुम दिखे ना मुझको
    ना निशाँ कोई छोडा
    कैसे बताऊँ साईं
    इस दिल को तुमने तोडा

    ये बात मेरी सुनकर
    बाबाजी मुस्कुराए
    इक क्षण में दूर हो गए
    गमो के जो थे साए

    सुमधुर वाणी में फिर
    बाबाजी मुझसे बोले
    कच्ची तुम्हारी भक्ती
    जो क्षण क्षण में है डोले

    क्यूँ देखना चाहती हो
    तुम चमत्कार मेरा
    विशवास उठ गया क्या
    मुझसे ही कहो तेरा

    क्या बार बार मुझको
    परीक्षा देनी होगी
    क्यूँ चमत्कार चाहता
    आता है दर पे जो भी

    मैं भी तो चाहता हूँ
    कई भक्त ऐसे प्यारे
    म्हालसापति जैसे
    शामा के जैसे न्यारे

    इच्छा रहित करी थी
    उन सबने मेरी भक्ती
    ना आशा थी ना तृष्णा
    ना थी कोई आसक्ती

    जो नहीं दिखाउंगा
    मैं चमत्कार अपना
    तो भूलोगी क्या मुझको
    समझ के कोई सपना

    चमत्कार की तुम
    आशाएं ना यूँ पालो
    चंचल अधीर मन को
    साधो और संभालो

    भक्ति बढाओ अपनी
    ये माला, पलक छोडो
    श्रधा से मन को भर के
    तुम मेरी ओर मोडो



    मैं देह में नहीं पर
    भक्तों के दरम्यां हूँ
    ह्रदय टटोलो अपना
    पाओगी मैं वहाँ हूँ

    जय साईं राम 
    « Last Edit: September 25, 2008, 10:59:52 AM by saisewika »

    Offline etgirl

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #104 on: September 25, 2008, 12:47:02 AM »
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  • very beautiful....simply amazing words..
    may baba always bless u

    sairam

     


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