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Author Topic: बाबा की यह व्यथा  (Read 168885 times)

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Offline Ramesh Ramnani

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Re: बाबा की यह व्यथा
« Reply #60 on: March 29, 2008, 10:45:21 PM »
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  • जय सांई राम।।।

    मायूस मत होना ये एक गुनाह होता है
    मिलता वही है जो किस्मत में लिखा होता है
    हर चीज़ मिले हमे ये ज़रूरी तो नही
    कुछ चीज़ो का ज़िक्र दूसरे जंहा में होता है
    जो खुद को कोसते है वो शायद बेखबर है
    कुछ पा लेने का इकख्तयार खुद पे भी होता है
    हर एक को कसूरवार क्यों ठहराये हम
    अपने सामने भी तो एक आईना होता है
    हम अपनी ज़िन्दगी से क्यों हार जायें
    गर डूबता है सूरज तो कल भी उजाला होता है
    मायूस मत होना ये एक गुनाह होता है
    मिलता वही है जो किस्मत में लिखा होता है

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline tana

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      • Sai Baba
    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #61 on: March 30, 2008, 12:13:19 AM »
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  • ॐ सांई राम~~~

    तेरे चाहने से कुछ नहीं होता
    होगा वही जो किस्मत में लिखा होगा,
    रो रो कर गिङगिङा कर देख ले
    फिर भी होगा वही जो होना होगा,
    तू कर समझौता और मुस्कुरा कर के देख
    फिर दुखों का दर्द कुछ कम होगा,
    खुशी-गम चाहे हो सुख-दुःख
    सब उसी की इच्छा से होगा,
    जीवन बिता पर ये याद रख
    उसकी इच्छा में कभी तेरा बुरा ना होगा,
    दुःख-सुख जो भी मिले तुझे
    इसमे जरूर कुछ भला ही होगा~~~


    जय सांई राम~~~
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
    Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

    May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
    May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

    Offline saisewika

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #62 on: March 31, 2008, 08:36:05 AM »
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  • ओम साईं राम

    मायूसी और खुशी
    जुडवां बहने हैं
    सदा साथ साथ चलती हैं
    इसीलिए कभी हंसता है मानव
    कभी दिल से आह निकलती है

    पर इसका मतलब यह नहीं
    कि हम ज़िंदगी से हारे हैं
    क्योंकि साईं हमारे साथ हैं
    ये जीवन उन्हीं के सहारे है

    वैसे भी ये मायूसियां
    जीवन से लडना सिखाती हैं
    क्यूं कि हर खूबसूरत सुबह
    रात के बाद ही आती है

    इसलिए मायूसियां और उदासी
    हमें मंज़ूर है
    इनमें भी छुपी हुई
    बाबा की रज़ा ज़रूर है

    तभी ये मायूसियां
    हमें बहुत भाती हैं
    क्यूं कि हर मायूसी हमें
    बाबा के और पास ले जाती है

    जय साईं राम

    Offline saisewika

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #63 on: April 01, 2008, 10:26:02 AM »
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  • ओम साईं राम

    जो हंसते हैं साईं की याद में
    जो रोते हैं साईं की याद में
    जो जगते हैं साईं की याद में
    जो सोते हैं साईं की याद में

    जिनके लिए हर कौर
    साईं का प्रसाद है
    जिनके लिए जीवन का हर क्षण
    साईं की याद है

    साईं का नाम जिनके लब पर
    मुस्कुराहट लाता है
    वो आंख में समाए हैं
    इसलिए हर आंसू बह जाता है

    जिनके लिए आशा की पहली किरण
    श्री साईं हैं
    जिन्होंने आखरी उम्मीद
    सिर्फ बाबा से लगाई है

    जिन्होंने अपना तन मन
    साईं पर वारा है
    जिनके जीवन का आधार ही
    साईं प्यारा है

    जो जहां झुकते हैं
    द्वारकामाई बन जाती है
    जिनकी संगत ही
    शिरडी की याद दिलाती है

    उन सभी बाबा के बहुत प्यारों को
    उन सभी भक्त जन न्यारों को
    साईंसेविका का शत शत प्रणाम
    ये चंद पंक्तियां उन्हीं भक्तों के नाम

    जय साईं राम

    Offline tana

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      • Sai Baba
    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #64 on: April 02, 2008, 02:00:06 AM »
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  • ॐ सांई राम~~~

    हमारी इस द्वारकामाई में~~~

    हम हंसते बाबा के नाम संग~
    हम रोते बाबा के नाम संग~
    हम जागते बाबा के नाम संग~
    हम सोते बाबा के नाम संग~

    सुख बांटते बाबा के नाम संग~
    दुःख बांटते बाबा के नाम संग~
    हर पल बाबा के नाम संग~
    हर क्षण बाबा के नाम संग~

    हर लब की मुस्कुराहट बाबा के नाम संग~
    हर आँख के आँसू सूखे बाबा के नाम संग~

    आशा की पहली किरण बाबा के नाम संग~
    आखरी उम्मीद बाबा के नाम संग~
    तन मन की चाह बाबा के नाम संग~
    हर जीवन का आधार बाबा के नाम संग~

    इस द्वारकामाई में हर पल रहते बाबा के नाम संग~
    सब की मनोकामना पूरी होती बाबा के नाम संग~
    सब मिल एक दूसरे के लिए प्रार्थना करते बाबा के नाम संग~
    सब की मुरादे पूरी होती बाबा के नाम संग~

    और ऐसी सुदंर चंद पंक्तियां लिखने वाली सुरेखा दीदी के प्यार भरे प्रणाम को शत शत प्रणाम बाबा के नाम संग~~~

    जय सांई राम~~~
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
    Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

    May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
    May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #65 on: April 02, 2008, 07:40:29 AM »
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  • ओम साईं राम

    जो हंसते हैं साईं की याद में
    जो रोते हैं साईं की याद में.....

    जो जहां झुकते हैं
    द्वारकामाई बन जाती है
    जिनकी संगत ही
    शिरडी की याद दिलाती है

    उन सभी बाबा के बहुत प्यारों को
    उन सभी भक्त जन न्यारों को
    साईंसेविका का शत शत प्रणाम
    ये चंद पंक्तियां उन्हीं भक्तों के नाम.....

    जय साईं राम




    जय सांई राम।।।

    सौ बार देखूं तस्वीर अपने यार बाबा की, फिर भी प्यास रहे बाकी
    लगता है कुछ और ही है ये माजरा,
    कही ये इश्क तो नही सुरेखा दीदी?

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline saisewika

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #66 on: April 02, 2008, 10:33:32 AM »
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  • ओम साईं राम

    साईं जब से प्रीत लगी तुझसे
    मैं हुई जुदा खुद ही खुद से
    सब कहते रहते हैं मुझसे
    मेरे नैना लगते हैं खुश से

    इसे कह लो इश्क या कह लो प्यार
    मुझको कोई नहीं दरकार
    अलमस्त बनी तुझसे जुड के
    मुझे नहीं देखना अब मुड के

    तेरे प्रेम में मैं दीवानी हुई
    सारी दुनिया से अनजानी हुई
    साईं चरणों की मैं धूल सही
    उन्हें छू ही लूंगी मै उड के
    नहीं रहना उनसे बिछुड के

    जय साईं राम


    Offline saisewika

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #67 on: April 04, 2008, 01:55:15 PM »
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  • ओम साईं राम

    जब मन मेरा अकुलाता है
    मुझे ध्यान तुम्हारा आता है
    तुम आओगे मुझे थामोंगे
    कोई कानों मे कह जाता है

    जब आशाएं सब छूटती हैं
    जो बंधी उम्मीदें टूटती हैं
    मैं याद तुम्हे कर लेती हूं
    मन हर मुशकिल सह जाता है

    जब सुख में साथी कई मिले
    दुख आते ही सब छोड चले
    मैं दर्द सभी पी जाती हूं 
    बस ध्यान तेरा रह जाता है

    मैं जब भी ठोकर खाती हूं
    चलते चलते थक जाती हूं
    किसी मोड पे तुम मिल जाओगे
    विशवास मेरा गहराता है

    जय साईं राम



    Offline tana

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      • Sai Baba
    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #68 on: April 05, 2008, 02:29:25 AM »
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  • ॐ सांई राम~~~

    सुरेखा दीदी....ये ठोकरे बहुत कुछ सिखा देती है~~~बाबा के ओर करीब ला देती है~~~ इनका हर पल शुक्रिया~~~

    मुझको राह दिखाने वाली ओ प्यारी ठोकरो~
    मुझे सांई से मिलाने वाली ओ प्यारी ठोकरो~
    सोई को जगाने वाली ओ प्यारी ठोकरो~
    असलियत बताने वाले ओ प्यारी ठोकरो~
    दुनिया का रूप दिखाने वाले ओ प्यारी ठोकरो~
    मुझे पक्का करने वाली ओ प्यारी ठोकरो~
    धन्यवाद तुम्हारा है ओ प्यारी ठोकरो~
    तुम न होती तो मैं कैसे पाती ये राह,
    मुझ अंधी की कौन पकङता बाँह,
    सब से दूर करके तुमने,
    मुझे मेरे सांई के पास किया,
    ओ प्यारी ठोकरो तुम्हारा,
    हर पल शुक्रिया~~~

    जय सांई राम~~~
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #69 on: April 07, 2008, 11:03:15 AM »
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  • ओम साईं राम

    शब्दों ने साधी है फिर आज चुप्पी
    कविता भी कोने में बैठी है दुबकी
    कोरे हैं पन्ने सूखी है स्याही
    ख्यालों को भी मैने दे दी बिदाई
    बस मै हूं और है साईं मेरा प्यारा
    शब्दों को जब भी वो देगा सहारा
    दिल में नई रचना अंगडाई लेगी
    पन्नों पर स्याही फिर से उतरेगी
    फिर नई कविता के आसार होंगे
    शब्दों में फिर साईं साकार होंगे

    जय साईं राम

    Offline nimmi_sai

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      • Sai Baba
    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #70 on: April 07, 2008, 12:47:56 PM »
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  • saisevika ji,
    You always write so beautifully! Just too beautiful for words! So very heartfelt and touching! Your awesome poetry always moves me and causes deep emotions!

    ....On behalf of each and every one of us, Thank you... for giving us something strengthening to feel :)
    baba ki kripa app per hamesha aise hi bani rahey
    best wishes to u always
    Nimmi
    Surrender your problem entirely to God.
    Be humble.
     Forgive all your enemies.
    Have faith. Do not doubt.
    Thank God in advance and praise Him.
    Pray from the heart.
    om sai shri sai jai jai sai
    Nimmi

    Offline saisewika

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #71 on: April 08, 2008, 11:19:10 AM »
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  • OM SAI RAM
     
    Thank you nimmi_sai ji. 

    Your words of appreciation touched my heart. You are right, its all Baba's kripa prasad.

    May Baba bless you always.

    JAI SAI RAM

    Offline saisewika

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    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #72 on: April 09, 2008, 11:39:54 AM »
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  • ओम साईं राम

    आ जाओ अब मेरे साईं
    ऐसे आओ तुम
    मेरे मन में आन बसो और
    फिर ना जाओ तुम

    मेरी जैसी चाल देख लो
    तुम बिन जो है हाल देख लो
    अगर तुम्हें मैं भा जाऊं तो
    यहीं बस जाओ तुम

    पूजा अर्पण सब को परखो
    मन के आंदर झांको निरखो
    जो कोई भी मैल ना पाओ
    यहीं रस जाओ तुम

    कविता पढ लो मेरे मन की
    शब्दों से जो छेड छाड की
    तुमको अच्छी जो लग जाए
    कुछ मुस्काओ तुम

    मेरा भक्ती भाव देख लो
    साईं मिलन का चाव देख लो
    जो इसमें पूरी उतरूं तो
    दरस दिखाओ तुम

    मेरे तरसे नैना देखो
    कटे ना काली रैना देखो
    नाथ तार दो अब तो आकर
    ना तरसाओ तुम

    जय साईं राम

    Offline tana

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      • Sai Baba
    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #73 on: April 09, 2008, 02:15:56 PM »
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  • ॐ सांई राम~~~

    सांई दर आप का बरकतों का भण्डार है,
    तुझे तो सांई सभी से प्यार है,
    तेरी बेटी प्यासी है तेरे इस प्यार की,
    तेरे दुलार की,तेरे दीदार की,
    इस दर से कोई गया न निराश है,
    मेरे दिल में भी इक आस है,
    कैसी भी हूँ सांई मुझे अपनाओंगे तुम,
    मुझे हिए से लगाओगे तुम,
    ये दिल में आज ठाना है मैने,
    तुझे देखे बिना नहीं जाना है मैने,
    झोली भर के ही जाऊंगी मैं,
    जिद्द ये मेरी है तुम्हे आना पङेगा,
    मुझे हिए से लगाना पङेगा,
    पापी हूँ,पतित हूँ ,कुटिल हूँ चाहे,
    पर बेटी हूँ तेरी ये मानना पङेगा,
    पुकार ये आज तुझे सुननी पङेगी,
    नहीं तो बेटी तुझसे लङ पङेगी,
    तूं मान या न मान,तुझे प्यार है मुझसे,
    मैने जो पुकारा तुझे आना पङेगा,
    आकर मुझे हिए से लगाना ही पङेगा~~~

    जय सांई रामा~~~
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
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    May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

    Offline tana

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      • Sai Baba
    Re: बाबा की यह व्यथा
    « Reply #74 on: April 21, 2008, 05:31:39 AM »
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  • ॐ सांई राम~~~

    बाबा~~~ये मेरे मन की व्यथा~~~

    नाम महारस पान करा कर,पहले मुझे मस्त किया,
    अब आप कहे कर्त्तव्य निभाओ,ये आप की क्या अदा,
    कहीं मन न लगे,कुछ भी न भावे,दीवाना सा कर दिया,
    अब आप कीजीए जो हो करना,मुझसे सांई कुछ भी न होता,
    आप क्या जाने सांई आप की तङप,ये जो नाम रस आप का पिया,
    इस रस ने कहीं का न छोङा,मुझको कमली कर दिया,
    अब इसके आगे कुछ भी न भाए,हे मेरे सांई ये आप ने क्या किया~~~

    जय सांई राम~~~
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
    Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

    May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
    May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

     


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