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Author Topic: PYAAR ,MOHABBAT,ISHQ !!  (Read 28692 times)

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Offline tana

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Re: PYAAR ,MOHABBAT,ISHQ !!
« Reply #75 on: May 23, 2008, 11:58:20 PM »
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  • Om Sai Ram~~~

    LOVE~~~

    If I speak in tongues of men and of angels, but have not love, I am only a resounding going or a clanging cymbal. If I have the gift of prophecy and can fathom all mysteries and all knowledge and if I have a faith that can move mountains, but have not love, I am nothing. If I give up all I possess and surrender my body to the flames, but have not love, I gain nothing.

    Love is patient; love is kind; it does not envy; it does not boast; it is not proud. It is not rude; it is not self-seeking; it is not easily angered; it keeps no record of wrongs. Love does not delight in evil but rejoices with the truth. It always protects, always trusts, always hopes, always perseveres.

    Love never fails. But where there are prophecies, they will pass away; where there are tongues, they will be stilled; where there is knowledge it will pass away. For we know in part and we prophesy in part, but when perfection comes, the imperfect disappears.

    When I was a child, I talked like a child, I thought like a child, I reasoned like a child. When I became a man, I put childish ways behind me. Now we see but a poor reflection, then we shall see face to face. Now I know in part; then I shall know fully, even as I am fully known.

    And now these three remain: faith, hope and love, but the greatest of these is love~~


    Jai Sai Ram~~~
    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
    Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

    May all the worlds be happy. May all the beings be happy.
    May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~

    Offline MANAV_NEHA

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    Re: PYAAR ,MOHABBAT,ISHQ !!
    « Reply #76 on: June 28, 2008, 08:24:47 AM »
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  • Kamosh Zabaan Ke Lafzon Mein
    Kuch Posheeda Si Baatein Hai
    In Posheeda Si Baaton Mein
    Kuch Chahat Ki Barsaatein Hain
    In Baaton Ko Hum Muddat Se
    Seenay Mein Chhupaye Bethey Hain
    Kuch Paaye Bina Kuch Kho Dena
    Ye Pyar Mein Ham Ne Seekha Hai
    Sooraj Mein, Chand Sitaron Mein
    Har Shai Main Tumhi Ko Dekha Hai
    Dharkan Mein Bhi Naghma Ban Kar
    Saagar Ki Tarah Tum Behtey Ho
    Ye Pyar Nahi To Tumhi Kaho…
    Phir Pyar Kisey Tum Kehtey Ho?

    Jai Sai Ram
    « Last Edit: June 28, 2008, 08:26:36 AM by MANAV_NEHA »
    गुरूर्ब्रह्मा,गुरूर्विष्णुः,गुरूर्देवो महेश्वरः
    गुरूर्साक्षात् परब्रह्म् तस्मै श्री गुरवे नमः॥
    अखण्डमण्डलाकांरं व्याप्तं येन चराचरम्
    तत्विदं दर्शितं येन,तस्मै श्री गुरवे नमः॥


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    Offline MANAV_NEHA

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    Re: PYAAR ,MOHABBAT,ISHQ !!
    « Reply #77 on: June 29, 2008, 03:07:52 AM »
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  • "PREM HI ESHWAR HAI"

    JAISE ESHWAR KO PAANE KE LIYE SANGARSH KARNA PADTA HAI

                           USI TARAH PYAR KI RAAH BHI AASAN NAHI HOTI.................... :-*   
     

    JAI SAI RAM
    गुरूर्ब्रह्मा,गुरूर्विष्णुः,गुरूर्देवो महेश्वरः
    गुरूर्साक्षात् परब्रह्म् तस्मै श्री गुरवे नमः॥
    अखण्डमण्डलाकांरं व्याप्तं येन चराचरम्
    तत्विदं दर्शितं येन,तस्मै श्री गुरवे नमः॥


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    Offline tana

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    Re: PYAAR ,MOHABBAT,ISHQ !!
    « Reply #78 on: August 26, 2008, 11:22:35 PM »
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  • ॐ सांई राम~~~
     
    पृथ्वीराज और संयोगिता~~~

    पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता की प्रेमकथा राजस्थान के इतिहास में स्वर्ण अंकित है। वीर राजपूत जवान पृथ्वीराज चौहान को उनके नाना सा. ने गोद लिया था। वर्षों दिल्ली का शासन सुचारु रूप से चलाने वाले पृथ्वीराज को कन्नौज के महाराज जयचंद की पुत्री संयोगिता भा गई। पहली ही नजर में संयोगिता ने भी अपना सर्वस्व पृथ्वीराज को दे दिया, परन्तु दोनों का मिलन इतना सहज न था। महाराज जयचंद और पृथ्वीराज चौहान में कट्टर दुश्मनी थी।

    राजकुमारी संयोगिता का स्वयंवर आयोजित किया गया, जिसमें पृथ्वीराज चौहान को नहीं बुलाया गया तथा उनका अपमान करने हेतु दरबान के स्थान पर उनकी प्रतिमा लगाई गई। ठीक वक्त पर पहुँचकर संयोगिता की सहमति से महाराज पृथ्वीराज उसका अपहरण करते हैं और मीलों का सफर एक ही घोड़े पर तय कर दोनों अपनी राजधानी पहुँचकर विवाह करते हैं। जयचंद के सिपाही बाल भी बाँका नहीं कर पाते।

    इस अपमान का बदला लेने के लिए जयचंद ने मुहम्मद गौरी से हाथ मिलाता है तथा उसे पृथ्वीराज पर आक्रमण का न्योता देता है। पृथ्वीराज ने 17 बार मुहम्मद गौरी को परास्त किया तथा दरियादिल होकर छोड़ दिया।

    18वीं बार धोखे से मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज को कैद कर लिया तथा अपने मुल्क ले गया। वहाँ पृथ्वीराज के साथ अत्यन्त ही बुरा सलूक किया गया। उसकी आँखें गरम सलाखों से जला दी गईं। अंत में पृथ्वीराज के अभिन्न सखा चंद वरदाई ने योजना बनाई। पृथ्वीराज शब्द भेदी बाण छोड़ने में माहिर सूरमा था। चंद वरदाई ने गौरी तक इस कला के प्रदर्शन की बात पहुँचाई। गौरी ने मंजूरी दे दी। प्रदर्शन के दौरान गौरी के शाबास लफ्ज के उद्घोष के साथ ही भरी महफिल में अंधे पृथ्वीराज ने गौरी को शब्दभेदी बाण से मार गिराया तथा इसके पश्चात दुश्मन के हाथ दुर्गति से बचने के लिए दोनों ने एक-दूसरे का वध कर दिया।

    अमर प्रेमिका संयोगिता को जब इसकी जानकारी मिली तो वह भी वीरांगना की भाँति सती हो गई। दोनों की दास्तान प्रेमग्रंथ में अमिट अक्षरों से लिखी गई।

    जय सांई राम~~~

    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
    Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~

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    Offline tana

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    Re: PYAAR ,MOHABBAT,ISHQ !!
    « Reply #79 on: September 01, 2008, 01:02:41 AM »
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  • ॐ सांई राम~~~

    ख़ुसरो दरिया प्रेम का
    उल्टी वाकि धार~
    जो उतरा सो डूब गया
    जो डूब सो पार~~

    किसी भी स्तर पर प्रेम परिभाषा ये है कि प्रेम मे तब प्रवेश करो जब तुममें अपनी पहचान पोंछने की हिम्मत हो | प्यार बस प्यार है, ओर कुछ नही~~~

    जय सांई राम~~~

    "लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः
    ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"

    " Loka Samasta Sukino Bhavantu
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    Offline Dipika

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    Re: PYAAR ,MOHABBAT,ISHQ !!
    « Reply #80 on: September 01, 2008, 01:09:30 AM »
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  • ॐ सांई राम~~~

    ख़ुसरो दरिया प्रेम का
    उल्टी वाकि धार~
    जो उतरा सो डूब गया
    जो डूब सो पार~~

    किसी भी स्तर पर प्रेम परिभाषा ये है कि प्रेम मे तब प्रवेश करो जब तुममें अपनी पहचान पोंछने की हिम्मत हो | प्यार बस प्यार है, ओर कुछ नही~~~

    जय सांई राम~~~



    too gud Tana ji...............too gud.........balley balley................

    ALLAH MALIK!

    Sai baba let your holy lotus feet be our sole refuge.OMSAIRAM
    साईं बाबा अपने पवित्र चरणकमल ही हमारी एकमात्र शरण रहने दो.ॐ साईं राम


    Dipika Duggal

    Offline tana

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    Re: PYAAR ,MOHABBAT,ISHQ !!
    « Reply #81 on: September 01, 2008, 01:16:28 AM »
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  • ॐ सांई राम~~~

    ख़ुसरो दरिया प्रेम का
    उल्टी वाकि धार~
    जो उतरा सो डूब गया
    जो डूब सो पार~~

    किसी भी स्तर पर प्रेम परिभाषा ये है कि प्रेम मे तब प्रवेश करो जब तुममें अपनी पहचान पोंछने की हिम्मत हो | प्यार बस प्यार है, ओर कुछ नही~~~

    जय सांई राम~~~



    too gud Tana ji...............too gud.........balley balley................

    ALLAH MALIK!

    Sai baba let your holy lotus feet be our sole refuge.OMSAIRAM

    Om Sai Ram~~~

    Too Good na.....pyaar toh pyaar he hai....

    कई बार लगता है  दीपिका प्रेम सिर्फ एक एहसास ही है जिसे सिर्फ महसूस ही किया जा सकता है....और कुछ नहीं.....

    जय सांई राम~~~
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    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: PYAAR ,MOHABBAT,ISHQ !!
    « Reply #82 on: September 21, 2008, 10:10:20 AM »
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  • जय सांई राम।।।

    तड़प के देखो बाबा की चाहत में
    तब पता चले कि इन्तज़ार क्या होता है   
            अगर यूं ही मिल जाये बाबा बिना तड़पे   
                तो कैसे पता चले कि बाबा से प्यार क्या होता है

    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई

    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

    Offline dee

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    Re: PYAAR ,MOHABBAT,ISHQ !!
    « Reply #83 on: October 06, 2008, 06:53:11 AM »
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  • ॐ सांई राम....

    प्रेम और परमात्मा पर्यायवाची शब्द हैं !प्रेम शब्द का प्रयोग सिवाय परमात्मा और गुरुजनों के कहीं करना नहीं चाहिये , बाकी सब प्रेम नहीं आसक्ति है !

    Right...


    जय सांई राम....


    ~SAI Baba YOU ARE OUR INSPIRATION~~BABA IS PERFECT~
    ~SHRADDHA SABURI~Are Like Two Twin Sisters!!
    ALLAH MALIK~SABKA MALIK EK~Bow To Shri Sai Peace be to All


    Shirdi Sai Baba On http://forum.spiritualindia.org/index.php
    :-* Sai-Dwarkamai

    Offline MANAV_NEHA

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    Re: PYAAR ,MOHABBAT,ISHQ !!
    « Reply #84 on: October 10, 2008, 05:48:01 AM »
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  • MOHBAAT BANANE WALE TUNE KAMI NA KI
    KISKO KYA MILA YEH TOH TAQDEER KI BAAT HAI...

    गुरूर्ब्रह्मा,गुरूर्विष्णुः,गुरूर्देवो महेश्वरः
    गुरूर्साक्षात् परब्रह्म् तस्मै श्री गुरवे नमः॥
    अखण्डमण्डलाकांरं व्याप्तं येन चराचरम्
    तत्विदं दर्शितं येन,तस्मै श्री गुरवे नमः॥


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    Offline MANAV_NEHA

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    Re: PYAAR ,MOHABBAT,ISHQ !!
    « Reply #85 on: October 10, 2008, 05:51:25 AM »
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  • YA TOH DEEWANA HASE YA TU JISE TAUFIK DE
    WARNA IS DUNIYA MEIN AAKE MUSKURATA KAUN HAI..
    गुरूर्ब्रह्मा,गुरूर्विष्णुः,गुरूर्देवो महेश्वरः
    गुरूर्साक्षात् परब्रह्म् तस्मै श्री गुरवे नमः॥
    अखण्डमण्डलाकांरं व्याप्तं येन चराचरम्
    तत्विदं दर्शितं येन,तस्मै श्री गुरवे नमः॥


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    Offline Ramesh Ramnani

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    Re: PYAAR ,MOHABBAT,ISHQ !!
    « Reply #86 on: November 15, 2008, 06:00:40 AM »
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  • "जय सांई राम।।।

    प्यार को कभी भी किया नहीं जा सकता। प्यार तो अपने आप हो जाता है। दिन और रात... धरती और आसमान, एक दूसरे के बिना सब अधूरे हैं। सन-सन करती हवाएं,  सुन्दर नजारे,  फूलों की खुशबू... सभी में छिपा होता है प्यार... कुछ तो प्यार में हारकर भी जीत जाते हैं,  तो कुछ जीतकर भी अपना प्यार हार जाते हैं। प्यार एक ऐसा नशा है जिसमें जो डूबता है वो ही पार होता है। प्यार पर किसी का वश नहीं होता.... अगर आप भी प्यार महसूस करना चाहते हैं तो डूबिये अपने बाबा के प्यार में... दुनिया की सबसे बड़ी नेमत है ढाई आखर का प्यार... जब आप बाबा को इस कदर चाहने लगते हैं तो उनके दूर होने पर भी आपको उनके नजदीक होने का अहसास होगा,  हर चेहरे में आप उनका चेहरा ढूंढने की असफल कोशिश करते हैं,  कोई पल ऐसा न गुजरेगा जब उनका नाम आपके होठों पर न रहेगा ... यही तो होता है प्यार... सुन्दर, सुखद, निश्छल और पवित्र अहसास। पूरी दुनिया के सुख इस प्रेम में समाए हुए हैं। यह शब्द छोटा होते हुए भी सभी शब्दों में बड़ा महसूस होता है।
    .
    अपना सांई प्यारा सांई सबसे न्यारा अपना सांई
    ॐ सांई राम।।।
    अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी

     


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