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Author Topic: दान v/s दक्षिणा  (Read 760 times)

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Offline sai ji ka narad muni

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  • दाता एक साईं भिखारी सारी दुनिया
दान v/s दक्षिणा
« on: April 15, 2016, 09:47:25 AM »
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  • भूखे को रोटी दो
    बाबा को सोना क्या चढाते हो
    भिखमंगो को कपड़ा दो
    मंदिरों में क्यू भेट चढाते हो???


    Before you start clapping on my lines above,
    I must tell you , that's the stupidest thing which is being spread everywhere these days!!!
     भिखारी को रोटी कपड़ा देना और एक पवित्र ब्राह्मण को भोजन  कराना बिलकुल अलग हैं
    फल की दृष्टि से और कार्य की दृष्टि से भी
    मंदिर में चढ़ावा जो चढाया जाता हैं वह मन्दिर के लिय ही उपयोग होता हैं, प्रशाद लेने के लिय तो बड़ी जल्दी आजाते हैं आप सभी परन्तु दान देने के वक्त ये  बहाने  याद आजाते हैं!
    भगवान श्री कृष्ण कहते हैं की ब्राह्मण मेरे मुख हैं
    जो ब्राह्मण को भोजन से तृप्त करता हैं उसने मुझे ही तृप्त किया।।।
    किसी भी व्रत की पूर्णता के लिय शास्त्रों में क्या विधान हैं यह समझना आवश्यक हैं।।
    ब्राह्मणों को दक्षिणा और किसी गरीब की सहायता करना एक दुसरे के पूरक नही।।।
    I am not anti-bhikhari  किन्तु लोगो को भक्ति से दूर करने के लिय लोग भिखारियों को पैसा वगरह देने का ज्यादा ही प्रचार करने लगे हैं, जो मांस मदिरा पी जाते हैं हजारो रुपय की वे भी शिवलिंग पर पांच ₹ का दूध न चढाने की बाते करते हैं।।।
    ताली बजाने वाली भीड़ (जो की कथाओ में भी आजाती हैं) ऐसी बातो पर इतनी ख़ुशी से ताली बजाती हैं, खुद भले ही कभी भिखारी को जिन्दगी में एक रोटी न खिलाई हो पर दूसरो को धर्म में पैसा खर्च करते देख जरूर इनकी माँ मरती हैं।।।
    गधो!!! तुम्हे अगर बाबा को सोने हीरे और करोड़ो रुपय का चढ़ावा देखकर चिढ होती हैं तो पहली बात

    बाबा के भक्तो की एक एक पाई भी बाबा की ही देन हैं,
    संत कबीर दास कहते हैं
    " यह तन विष की बेल री, गुरु अमृत की खान
    शीश दिए जो गुरु मिले तो भी सस्ता जान ।"
    सर काट कर दे वो भी कम हैं तो धन की क्या औकात!!!

       

    भक्तो में दया तो सबके लिय होती हैं, पर साधक में विवेक भी होता हैं।
    गरीब को रोटी देना बहुत पुन्य का कार्य हैं
    परन्तु शिवलिंग पर चढ़ाए जाने वाले दूध की उपेक्षा एक प्रेमी भक्त कभी नही कर सकता|
    सच्चे भक्त अथवा
    गिरी बापू जी की कथा जो प्रेम सहित भक्तजन सुनते हैं वे उस प्रेम रस को सम्झेंगे।
     

    अगर मन्दिर में चढावे से ज्यादा ही दिक्कत हैं तो आखे दो सुई लेकर फोड़ लो, कौन मना करता हैं।


    भिखारी भी बड़े स्मार्ट हैं आजकल के
    मन्दिरों के सामने बैठकर भक्तो के आगे ढोंग करने में एक्सपर्ट  :P जिनकी वजह से जो वाकई अभाव ग्रस्त हैं वे भी उपेक्षित कर दिय जाते हैं।।।

    प्रेमी भक्त तो अपने इष्ट को सोने हीरे मोती और दिव्य से दिव्यतम ऐश्वर्यपूर्ण श्रृंगार से सजे हुए देखकर हर्षित होना चाहते हैं।।।
    जिस कर्म से भगवद प्रेम और भक्ति बढ़े वही सार्थक उद्योग हैं।
    ॐ साईं राम

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