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Author Topic: Why dress modestly!!!  (Read 983 times)

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Offline sai ji ka narad muni

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  • दाता एक साईं भिखारी सारी दुनिया
Why dress modestly!!!
« on: September 29, 2016, 06:43:56 AM »
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  • ॐ साईं राम
    जय साईं राम
    हर जगह वस्त्रो पर बहस हैं, संसारी ये बहस करे तो कोई आश्चर्य की बात नही परन्तु साईं भक्तो को ऐसी बाते बोलते देख बड़ा आश्चर्य होता हैं।
    वेद प्रमाण हैं,  its my personal choice कहने से पहले भक्त याद करे की शास्त्रों से अधिक हमारे कल्याण की चिंता हमारी अपनी बुद्धि को भी नहीं हैं। प्रमाण केवल वेद ही हैं हमारी या आपकी बुद्धि नही। surrender surrender कहने की वस्तु रह गई हैं बस . हमारे जीवन में यह चिन्तन का विषय हैं, समर्पण में अपनी कोई मान्यता नही रहती,  तो फिर एक तरफ surrender surrender दूसरी तरफ सनातन धर्म के विरुद्ध मान्यताये !!!
    yes i was a typical delhiite before sai came into my life but gradually i came to know what sai wants me to wear, he changed my pitiable mentality,now i buy clothes and choose what to wear only with his consent. (& I'm happy with that ) Yes everybody's life is different, so I'm not judging what other sai followers must wear but judging every moral advice wrong also can't be considered an intelligent act.
    One can't get good character by debating, lecturing, reading good things or anything
    Good character can be given by only baba's grace
    Only once you have good character, you'll know the meaning of characterlessness, lest you won't...
    When you have no mental impurities like that
    You'll be able to say
     ' अगर मैंने कभी धर्म विरुद्ध काम का सेवन न किया हो तो अभी मेरी इस परेशानी का हल हो जाये'
    'अगर मैं पवित्र हूँ, तो मुझपर कामुक दृष्टि रखने वाले पुरुष क्लीव हो जाये'
    That may sound strange to few,
    We can see many such example in purans . They can ask for anything by the tap (austerities) of their chastity and piousness !!
    Its really Utopia, practically impossible in today's world, because due to that kind of morality, people reckon the person abnormal, they'll mock, laugh etc.  And because of that, people to whom public opinion (sansari's) matters, can't keep living an ideal life...
    सनातन धर्म से लेकर इसाई और इस्लाम तक सभी धर्म स्त्रियों को शालीन और सभ्य वस्त्र पेहेनने की आज्ञा देते हैं ।
    जहां बात आती हैं की पुरुष तो बस धोती पहनते हैं तो भाई, धोती ही हमारी संस्कृति में पुरुषो की वेशभूषा हैं।  अंग प्रदर्शन के लिय अपने को पुरुषो से तुलना करना वाकई मानसिक स्तर को दर्शाता हैं।
    मन्दिर परिसर में स्त्रियों को शालीन वस्त्र भगवन से तन छिपाने के लिय नही पहनने को कहा गया,  मन्दिर और तीर्थो में अगर कोई स्त्री कामुक वस्त्र पहनती हैं तो उसके कारण अगर किसी पुरुष भक्त का भक्ति से ध्यान भंग होता हैं उस स्त्री से आकर्षित होने के कारण तो यह दोष उस स्त्री को लगता हैं। इसिलिय यह प्रमाणित करने की कोशिश करना की भगवान् से क्या छिपाना, उन्होंने तो सब देखा हैं, हास्यप्रद हैं।

    Sai sadbuddhi de!!!
    जिस कर्म से भगवद प्रेम और भक्ति बढ़े वही सार्थक उद्योग हैं।
    ॐ साईं राम

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