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Author Topic: ~*सदविचार*~  (Read 968 times)
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tana
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« Reply #30 on: January 30, 2008, 04:01:59 AM »

ॐ साईं राम~~~

जीतने के लिए कोई चीज है तो~~प्रेम
पीने के लिए कोई चीज है तो~~क्रोध
खाने के लिए कोई चीज है तो~~गम
देने के लिए कोई चीज है तो~~दान
करने के लिए कोई चीज है तो~~दया
लेने के लिए कोई चीज है तो~~ज्ञान
कहने के लिए कोई चीज है तो~~सत्य
रखने के लिए कोई चीज है तो~~इज्जत
त्यागने के लिए कोई चीज है तो~~ईष्या
छोङने के लिए कोई चीज है तो~~मोह

जय साईं राम~~~
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tana
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« Reply #31 on: March 02, 2008, 04:00:14 AM »

ॐ साईं राम~~~

कोई व्यक्ति कितना ही महान क्यों न हो, आंखे मूंदकर उसके पीछे न चलिए। यदि ईश्वर की ऐसी ही मंशा होती तो वह हर प्राणी को आंख, नाक, कान, मुंह, मस्तिष्क आदि क्यों देता ?
                                                                                         - विवेकानंद

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« Reply #32 on: March 06, 2008, 12:42:11 AM »

ॐ साईं राम~~~

मनुष्य क्रोध को प्रेम से, पाप को सदाचार से लोभ को दान से और झूठ को सत्य से जीत सकता है।
                                                          ~~गौतम बुद्ध

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« Reply #33 on: March 16, 2008, 11:33:57 AM »

the beauty of a woman is not in the clothes she wears, the figure that she carries, or the way she combs her hair.

The beauty of a woman must be seen in her eyes, because that is the doorway to her heart - the place where love resides."

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Surrender your problem entirely to God.
Be humble.
 Forgive all your enemies.
Have faith. Do not doubt.
Thank God in advance and praise Him.
Pray from the heart.
om sai shri sai jai jai sai
Nimmi
tana
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« Reply #34 on: March 17, 2008, 10:36:22 PM »

ॐ साईं राम~~~

माचिस की तीली का सिर होता है, पर दिमाग नहीँ, इसलिये वह थोड़े घर्षण से जल उठती है
हमारे पास सिर भी है और दिमाग भी।
फिर भी हम छोटी- सी बात पर उत्तेजित क्यों हो जाते हैं।

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« Reply #35 on: April 09, 2008, 03:08:40 AM »

ॐ साईं राम~~~

आपका सच्चा दोस्त आईना ही होता है, जो आपकी खोट को छिपाता नहीं है~~~

जय साईं राम~~~
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« Reply #36 on: April 28, 2008, 05:26:14 AM »

ॐ साईं राम~~~

बहुत जरुरी है:परिवार के लिए शांति ,समाज के लिए क्रांति ,जीवन के लिए उन्नति, सफलता के लिए सम्मति!
अपने अन्दर से कभी कम होने मत देना:प्रेम के भाव भाव को,शांति के स्वभाव को,ईश के प्रभाव को !!!!

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rajiv uppal
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~*साईं चरणों में मेरा नमन*~


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« Reply #37 on: May 09, 2008, 09:29:31 AM »

ॐ साईं राम~~~

"किसी को क्षमा करना या किसी व्यक्ति से क्षमा माँगना दोनों ही कार्य अत्यधिक साहस, हिम्मत व विशाल हृदय होने पर ही पूर्ण हो सकते हैं। क्षमा की सीधी-सादी परिभाषा है माफ करना या अपने कृत्य के लिए माफी माँगना या प्रायश्चित करना।"

ॐ साईं राम~~~
 
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..तन है तेरा मन है तेरा प्राण हैं तेरे जीवन तेरा,सब हैं तेरे सब है तेरा मैं हूं तेरा तू है मेरा..
tana
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« Reply #38 on: May 11, 2008, 11:27:03 PM »

ॐ साईं राम~~~


खुद की सुनो खुद ही करो~~

कोई कहता है ये करो, कोई कहता है वो करो, मैं कहता हूँ कि तुम वह करो जो तुम करना चाहते हो, नकारात्‍मक विचारों को अपने अंदर से उखाड़ फेंको, तुम ही हो जो सब कुछ कर सकते हो, स्‍वयं को जागृत करो, उठो खड़े हो जाओ और लग बैठो फिर किसी की न सुनो, नहीं नहीं कहने से तो सॉंप का विष भी असर नहीं करता, अपनी श्रेष्‍ठता को पहचानो – स्‍वामी विवेकानन्‍द 

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« Reply #39 on: May 11, 2008, 11:30:13 PM »

ॐ साईं राम~~~

मनुष्‍य के पतन और नष्‍ट होने का प्रथम लक्षण क्‍या है~~~

विनाश काले विपरीत बुद्धि ।


अर्थात जिस मनुष्‍य के विनाश का वक्‍त या पतन का वक्‍त आ जाता है, उसकी बुद्धि भ्रमित होकर उल्‍टे ही उल्‍टे सारे कार्य करने लगती है और वह उचित को अनुचित और अनुचित को उचित की भांति व्‍यवहृत करने लगता है – महाभारत

ताकों प्रभु दारूण दुख देंईं । ताकी मति पहलेईं हर लेंईं ।।

गोस्‍वामी तुलसीदास जी राम चरित मानस में लेख करते हैं कि प्रभु जिसको दारूण दुख देना चाहते हैं तो सबसे पहले वे उसकी बुद्धि का हरण कर लेते हैं जिससे वह सारे के सारे कार्य उल्‍टे ही उल्‍टे करने लगता है और अंतत: दारूण दुख पा कर पूर्णत: नष्‍ट हो जाता है । - तुलसीदास, रामचरित मानस

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« Reply #40 on: May 11, 2008, 11:32:01 PM »

ॐ साईं राम~~~

आपने क्‍या खोया क्‍या पाया??

Money is lost nothing is lost, Health is lost something is lost, Character is lost everything is lost.


आपने धन गँवा दिया समझिये कुछ नहीं खोया, आपने स्‍वास्‍थ्‍य गंवाया समझिये कुछ खो दिया, आपने अपना चरित्र गंवाया समझिये आपका सब कुछ खो गया नष्‍ट हो गया ।

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« Reply #41 on: May 12, 2008, 11:55:14 PM »

ॐ साईं राम~~~

कुलीन और खानदानी मनुष्‍यों के क्‍या लक्षण होते हैं?

'' कुलीन और खानदानी मनुष्‍यों का प्रथम लक्षण है कि नुकसान होते दिखने पर और हर समय तथा संकट के वक्‍त भी उनकी कथनी व करनी एक रहती है, तथा सत्‍य को स्‍वयं के और अपने राज्‍य को नष्‍ट होने या हानि होने पर भी नहीं छोड़ते, दूसरा लक्षण है कि वे शरणागत शत्रु को भी आश्रय देकर भयमुक्‍त करते है, तीसरा लक्षण है कि उनके भीतर भय कभी भूल कर भी प्रवेश नहीं कर सकता'' – भगवान श्री कृष्‍ण

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« Reply #42 on: May 14, 2008, 11:22:16 AM »

ॐ साईं राम~~~

सत्य बोलो और धर्म का आचरण करो। क्रोध, लोभ, भय और हँसी-मजाक आदि के कारण ही झूठ बोला जाता है। जहाँ न झूठ बोला जाता है, न ही झूठा व्यवहार किया जाता है वही लोकहित का साधक सत्यधर्म होता है

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« Reply #43 on: May 15, 2008, 05:40:21 AM »

ॐ साईं राम~~~

समय की ताकत~~~

''जो समय को नष्‍ट करता है, समय भी उसे नष्‍ट कर देता है'' ~~

''समय का हनन करने वाले व्‍यक्ति का चित्‍त सदा उद्विग्‍न रहता है, और वह असहाय तथा भ्रमित होकर यूं ही भटकता रहता है'' ~~

'' प्रति पल का उपयोग करने वाले कभी भी पराजित नहीं हो सकते, समय का हर क्षण का उपयोग मनुष्‍य को विलक्षण और अदभुत बना देता है'' ~~

''पड़े पड़े तो अच्‍छे से अच्‍छे फौलाद में भी जंग लग जाता है, निष्क्रिय हो जाने से,सारी दैवीय शक्तियां स्‍वत: मनुष्‍य का साथ छोड़ देतीं हैं'' ~~

'' यदि उपयोगी और महत्‍वपूर्ण बन कर विश्‍व में सम्‍मानित रहना है तो सबके काम के बनो और सदा सक्रिय रहो''~~


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« Reply #44 on: May 23, 2008, 12:08:07 AM »

ॐ साईं राम~~~

अभ्‍यास का महत्‍व~~~

करत करत अभ्‍यास सों, जड़मति होय सुजान ।
रसरी आवत जात ते सिल पर परत निसान ।।


निरन्‍तर अभ्‍यास करने से मूर्खतम मनुष्‍य भी सुजान (चतुर और ज्ञानवान) हो जाता है, जैसे कुंयें के पाट (पत्‍थर) पर बार बार रस्‍सी रगड़ते रहने से उस पर भी रस्‍सी के निशान (खांचे) बन जाते हैं ।

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