tana
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« Reply #45 on: May 27, 2008, 01:10:09 AM » |
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ॐ साईं राम~~~
दौलत पद और सत्ता मिलने और खोने पर क्या होता है ~~~
दौलत की दो लात हैं, तुलसी निश्चय कीन । आवत में अंधा करें, जावत करे अधीन ।।
दौलत, संपत्ति और पद जब मिलते हैं, तो मनुष्य अंधा हो जाता है, और जब ये छिनते हैं तो मनुष्य पागल हो जाता है यानि उसका दास गुलाम होकर पगलाया फिरता है – तुलसीदास
जय साईं राम~~~
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"लोका समस्ता सुखिनो भवन्तुः ॐ शन्तिः शन्तिः शन्तिः"
" Loka Samasta Sukino Bhavantu Aum ShantiH ShantiH ShantiH"~~~
May all the worlds be happy. May all the beings be happy. May none suffer from grief or sorrow. May peace be to all~~~
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rajiv uppal
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« Reply #46 on: June 14, 2008, 10:52:51 AM » |
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ॐ साईं राम~~~
"इस सुंदर जगत के रचनाकार उस परमात्मा ने हर जगह आनंद ही आनंद बिखेरा हुआ है। जब व्यक्ति का संपर्क उस जगत चालक से होता है तो वह भी उस परमानंद को प्राप्त करता है।"
जय साईं राम~~~
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rajiv uppal
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« Reply #47 on: June 14, 2008, 10:56:27 AM » |
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ॐ साईं राम~~~
'ज्ञानी मनुष्य के मन में किसी भी प्रकार का अहंकार नहीं होता यानी वह निर्रहंकारी होता है और यह गुण बहुत बड़ा होता है। ज्ञानी व्यक्ति अपने कर्म को सतत करता रहता है और उसमें उसे अहंकार नहीं होता। 'मैंने यह कर्म किया या मेरी वजह से यह कार्य पूर्ण हुआ।'
जय साईं राम~~~
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tana
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« Reply #48 on: June 30, 2008, 12:15:17 AM » |
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ॐ साईं राम~~~
भाग्य और प्रारब्ध में क्या फर्क है~~~
मनुष्य के पूर्व कर्मों से प्रारब्ध का निर्माण होता है और प्रारब्ध से भाग्य बनता है, मनुष्य के वर्तमान कर्म उसके भविष्य का निर्धारण करते हैं । अत: प्राप्ति जितनी सहज हो उसे सहेजना उससे कई गुना दुष्कर होता है । - संस्कृत की प्राचीन कहावत
जय साईं राम~~~
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rajiv uppal
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« Reply #49 on: June 30, 2008, 09:06:29 AM » |
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~~~जय साईं राम~~~
यह बात याद रखना चाहिए कि परिवार, समाज और सारी दुनिया आपसी सहयोग और भाईचारे की भावना से ही चल रही है। कष्ट या संकट किसी पर भी आ सकते हैं। ऐसे समय सहायता की जरूरत होती है। सहायता मिल जाने से संकट दूर हो जाते हैं और कष्टों से छुटकारा मिल जाता है|
~~~जय साईं राम~~~
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rajiv uppal
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« Reply #50 on: June 30, 2008, 09:08:27 AM » |
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~~~जय साईं राम~~~
जीवन और मृत्यु आत्मा और परमात्मा को पाने के दो पहलू हैं। रात के बाद दिन, दिन के बाद रात होती है। इसी तरह चोले बदलते हुए... अनुभवों से गुजरते हुए अपने आत्मस्वरूप को ब्रह्मस्वरूप को पाने के लिए मंगलमयी व्यवस्था है।
~~~जय साईं राम~~~
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« Reply #51 on: July 16, 2008, 01:47:28 AM » |
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ॐ साईं राम~~~
पाप~~~
1~पाप में जब आदमी की मनोवृति बिगड़ जाती है तब पाप होते हैं ! 2~जब रोटी खाने बैठो तो सोचो यह कैसे कमाई की रोटी है ! 3~इतने सहन शील मत बन जाओ की दुष्ट अपनी दुष्टता से आपको दुःख देते जायं !
जय साईं राम~~~
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« Reply #52 on: July 16, 2008, 02:00:29 AM » |
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ॐ साईं राम~~~
हंसना~~~
1~हंसना, हंसाना, गुनगुनाना अगर खत्म होगया तो दिमाग भी कमजोर हो जाता है ! 2~मशीन के युग में हम इतने व्यस्त हो गये हें की हम को यह ही पता नहीं की हम कौन हैं ! 3~अक्ल कब शांत होती है जब दिमाग शांत है, अशांत दिमाग में बुद्धि चली जाती है और काम करना बंद हो जाता है ! 4~हे भगवान मुझे अच्छे निर्णय लेने वाली बुद्धि देना !
जय साईं राम~~~
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« Reply #53 on: July 16, 2008, 02:23:38 AM » |
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ॐ साईं राम~~~
लक्ष्मी कहाँ रहती है??
जिस घर में सब प्रसन्न रहते हैं लक्ष्मी वहाँ रहती है! जिस घर में अशान्ति , अवव्यवस्था हो, नारी आंसू बहाये-बच्चे बड़ों का सत्कार न करें, धर्म से विमुख हों, बड़े गुस्सा करें, तो लक्ष्मी वहाँ एक दरवाजे से आयगी और दूसरे दरवाजे से निकल जायगी टिक भी नहीं पायेगी और बीमारी देकर जायेगी ! इसलिय घर में शान्ति बनाकर रखो !
जय साईं राम~~~
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« Reply #54 on: July 16, 2008, 05:20:43 PM » |
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ॐ साईं राम~~~
हंसो बिना बात के भी हंसो -खूब हंसो -खुश रहो ,भगवान का दिया हुआ वरदान है मुसकराना ,खुश रहना ,अपनी असली ख़ुशी को मत भूलो ! सदा प्रसन्न रहना स्वर्ग है ! अपना कर्म पूरा करो और फल भगवान के ऊपर छोड़ देना "मेहनत मेरी रहमत तेरी " !
जय साईं राम~~~
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« Reply #55 on: July 25, 2008, 10:22:14 PM » |
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ॐ साईं राम~~~
धन्या माता पिता धन्यो गोत्रं धन्यं कुलोद्भवः धन्या च वसुधा देवी यत्र स्याद गुरुभक्तता|| हे पार्वती ! जिसके अन्दर गुरुभक्ति हो उसकी माता धन्य है, उसका पिता धन्य है, उसका कुल गोत्र / वंश धन्य है, उसके वंश में, जन्म लेनेवाले धन्य हैं, समग्र धरती माता धन्य है - भगवान शिवजी
जय साईं राम~~~
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Ramesh Ramnani
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« Reply #56 on: July 25, 2008, 11:48:35 PM » |
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जय सांई राम।।।
पानी और उसका बुलबुला एक ही चीज है। उसी प्रकार जीवात्मा और परमात्मा एक ही चीज है, फर्क यह है कि एक परिमित है, दूसरा अनंत; एक परतंत्र है, दूसरा स्वतंत्र।
ॐ सांई राम।।।
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अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी
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« Reply #57 on: July 30, 2008, 04:34:14 AM » |
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ॐ सांई राम~~~
जब आप क्रोध करते हें , निराश होते हें, या चिंता में होते हें, ये सब आदमी को रोग ग्रस्त करती हें मगर आप आनंद में भगवान् को धन्यवाद देते हुए खुश होकर जीयगे तो इससे आपकी उम्र बढ़ती है।
जय सांई राम~~~
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Ramesh Ramnani
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« Reply #58 on: August 02, 2008, 02:01:50 AM » |
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जय सांई राम।।।
माला जपने से भक्त नहीं होता, माला चले न चले मन में भगवान् बसे तो भक्त है
ॐ सांई राम।।।
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अपना साँई प्यारा साँई सबसे न्यारा अपना साँई - रमेश रमनानी
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« Reply #59 on: August 03, 2008, 11:15:52 PM » |
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ॐ साईं राम~~~
जैसे एक पत्थर को तराशने से सुन्दर मूर्ति बन सकती है ऐसे ही कर्मों के सहारे ज़िन्दगी को तराशने से ज़िन्दगी का स्वरूप बहुत सुन्दर बन सकता है।
बडों के प्रति सम्मान की भावना , आत्मीयजनों के प्रति कोमलता ,स्वयं के प्रति निरीक्षण की भावना रखते हुए आत्मचिंतन के शीशे में अपने को रोज निहारो ।
जय साईं राम~~~
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